भारत और अमेरिका के बीच बड़ा ट्रेड डील घोषित हो गया है, जिसमें अचानक कृषि (agriculture) और टैरिफ (tariff) जैसे संवेदनशील मुद्दों पर भी बातचीत आगे बढ़ने का दावा किया गया है। अमेरिका के कृषि सचिव ब्रूक रॉलिन्स ने तो कहा है कि अब अमेरिकी कृषि उत्पाद भारत क...

बात जब भारत-अमेरिका ट्रेड डील की होती है, तो सबसे बड़ा sticking point लंबे समय से कृषि और किसान सुरक्षा रहा है। पिछली ट्रेड वार्ताओं में भारत ने साफ रुख अपनाया था कि वह अपने किसानों को अमेरिकी कृषि उत्पादों के मुकाबले बचाना चाहता है और बड़े पैमाने पर बाज़ार खोलने से पहले अपने हितों की रक्षा करेगा।
लेकिन इस नई डील में अमेरिकी कृषि सचिव ब्रूक रॉलिन्स ने खुलकर कहा है कि अमेरिका के अनाज, फल तथा अन्य farm products अब भारत के विशाल बाज़ार तक पहुँचेंगे, जिससे अमेरिकी किसानों को बेहतर कीमतें मिलेंगी और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को फायदा होगा — इसे उन्होंने एक “बंपर लॉटरी” जैसा बताया।
डील के मुख्य हिस्सों में यह है कि अमेरिका ने भारत के लिए लगाए गए टैरिफ को 25% से घटाकर 18% कर दिया है, और ट्रंप ने कहा कि यह “दोस्ती और सम्मान” के साथ तुरंत प्रभाव से लागू होगा।
इसके अलावा एक बड़ा बयान यह भी आया है कि भारत ने रूसी तेल की खरीद बंद करने और अमेरिका से ज्यादा तेल खरीदने पर सहमति जताई है, जिसे ट्रंप ने युद्ध को समाप्त करने में मदद के तौर पर बताया। हालांकि इस ऊर्जा मुद्दे की आधिकारिक पुष्टि भारत की सरकार की तरफ से नहीं आई है और यह बाद में भी विवाद का विषय बना हुआ है।
बाजार और आर्थिक प्रभाव यह खबर वित्तीय बाजारों पर भी असर दिखा रही है। भारतीय शेयर बाजारों में तेजी आई है और रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले मजबूत हुआ है, ऐसा निवेशकों के भरोसे के चलते देखा गया है।
डोनाल्ड ट्रंप ने फोन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बातचीत के बाद इस डील की घोषणा की, जिसमें दोनों ने रिलेशनशिप को “मजबूत, पारस्परिक सम्मान और दोस्ती” का नाम दिया। मोदी ने भी इस फैसले का स्वागत किया है।
सोशल मीडिया पर इस डील को लेकर मिश्रित प्रतिक्रियाएँ हैं। कुछ लोग इसे भारत-अमेरिका के रिश्तों को मजबूत करने वाला कदम बता रहे हैं, तो कुछ इसे किसानों के हितों के खिलाफ करार दे रहे हैं। विपक्षी दलों ने भी इसे सरकार पर हमला करने का एक मौका बनाया है।
अब तक डील पर आधिकारिक दस्तावेज़ सामने नहीं आए हैं, बल्कि ज्यादातर घोषणाएँ दोनों देशों के नेताओं और मंत्रियों के ट्वीट/बयान पर आधारित हैं। हालांकि अमेरिकी अधिकारी काफी उत्साहित हैं, भारतीय सरकार की तरफ से कुछ विषयों पर सटीक विस्तृत प्रतिक्रिया अभी तक सार्वजनिक नहीं आई है।
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