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अगर दादा नहीं होते तो पंचायत भवन में फंसा कोई भी आदमी जीवित नहीं बचता, प्रत्यक्षदर्शी सत्येंद्र रावत की जुबानी गृहमंत्री के शौर्य की गाथा