शुक्रवार को मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर सोना और चांदी की कीमतों में जबरदस्त वापसी देखने को मिली। पिछले सेशन में आई भारी गिरावट के बाद दोनों कीमती धातुओं ने अच्छी रिकवरी दिखाई। चांदी जहां करीब 3.5% से ज्यादा उछलकर ₹2,40,000 प्रति किलो के आसपास पहुंच गई, वहीं सोना भी करीब 3% की तेजी के साथ ₹1,48,000 प्रति 10 ग्राम के ऊपर ट्रेड करता नजर आया। हालांकि इस उछाल के पीछे एक्सपर्ट इसे एक “टेक्निकल बाउंस” मान रहे हैं, यानी गिरावट के बाद थोड़ी राहत वाली तेजी, न कि कोई मजबूत ट्रेंड बदलने का संकेत।
अगर ग्लोबल मार्केट की बात करें तो वहां भी सोने में हल्की तेजी जरूर आई, लेकिन पूरा हफ्ता इसके लिए कमजोर ही रहा। डॉलर की मजबूती और अमेरिका के सेंट्रल बैंक (Fed) के सख्त रुख ने सोने पर दबाव बनाए रखा है। यही वजह है कि निवेशक अभी बड़े स्तर पर सोने में पैसा लगाने से बच रहे हैं।
क्यों गिरे थे सोना-चांदी इतने तेज?
कई लोगों को यह समझ नहीं आया कि जब दुनिया में तनाव बढ़ रहा है, खासकर मिडिल ईस्ट में हालात खराब हैं, तो फिर सोना-चांदी क्यों गिर रहे हैं। असल में इसके पीछे कई कारण हैं। सबसे पहला कारण है प्रॉफिट बुकिंग। युद्ध शुरू होने से पहले ही सोना-चांदी काफी ऊपर जा चुके थे, तो जैसे ही अनिश्चितता बढ़ी, बड़े निवेशकों ने मुनाफा निकालना शुरू कर दिया।
दूसरा बड़ा कारण है बढ़ती महंगाई और कच्चे तेल की कीमतें। जब तेल महंगा होता है तो महंगाई बढ़ती है, और ऐसे में सेंट्रल बैंक ब्याज दरें कम करने से बचता है। ब्याज दरें ऊंची रहने का मतलब है कि सोने जैसे बिना ब्याज वाले निवेश कम आकर्षक हो जाते हैं। इसी वजह से सोने पर दबाव बना।
तीसरा फैक्टर है मजबूत डॉलर। क्योंकि अंतरराष्ट्रीय ट्रेडिंग डॉलर में होती है, डॉलर मजबूत होने पर सोना महंगा पड़ता है और उसकी मांग घटती है।
सेंट्रल बैंकों की खरीद भी धीमी पड़ी
पिछले साल (2025) में दुनिया भर के सेंट्रल बैंकों ने जमकर सोना खरीदा था, जिससे कीमतों को मजबूत सपोर्ट मिला था। लेकिन 2026 की शुरुआत में यह रफ्तार धीमी पड़ती दिख रही है। जनवरी में जहां सिर्फ 5 टन सोना खरीदा गया, वहीं पिछले साल हर महीने औसतन 27 टन खरीदा जा रहा था। इसका मतलब यह है कि अब सोने को पहले जैसा मजबूत सपोर्ट नहीं मिल रहा है।
सोना vs चांदी – दोनों का खेल अलग है

सोना हमेशा से एक “सेफ हेवन” माना जाता है, यानी जब बाजार में डर होता है तो लोग इसमें पैसा लगाते हैं। वहीं चांदी का मामला थोड़ा अलग है। चांदी का बड़ा इस्तेमाल इंडस्ट्री में होता है जैसे इलेक्ट्रॉनिक्स और सोलर पैनल में इसलिए यह आर्थिक ग्रोथ से ज्यादा जुड़ी होती है। इसी वजह से चांदी में उतार-चढ़ाव ज्यादा देखने को मिलता है। जब बाजार गिरता है तो चांदी सोने से ज्यादा गिरती है और जब तेजी आती है तो ज्यादा तेजी भी दिखाती है।
आगे क्या रहेगा ट्रेंड?
एक्सपर्ट्स के मुताबिक अभी शॉर्ट टर्म में बाजार थोड़ा कमजोर और वोलाटाइल रह सकता है। सोने के लिए इंटरनेशनल मार्केट में $4,500–$4,700 के बीच सपोर्ट दिख रहा है, जबकि ऊपर की तरफ $5,000 के आसपास मजबूत रेजिस्टेंस है। घरेलू बाजार में ₹1,41,000–₹1,39,000 का स्तर सपोर्ट के तौर पर देखा जा रहा है। चांदी की बात करें तो इसमें उतार-चढ़ाव ज्यादा रह सकता है। ₹2,30,000 के आसपास सपोर्ट है, जबकि ₹2,45,000 के ऊपर जाने पर ही मजबूती मानी जाएगी।
निवेशकों के लिए क्या सही रणनीति है?
अगर आप सोना-चांदी में निवेश करने की सोच रहे हैं, तो अभी जल्दबाजी करना सही नहीं होगा। बाजार अभी भी कन्फ्यूजन में है और साफ ट्रेंड नहीं बना है। एक्सपर्ट्स की सलाह है कि एकदम से बड़ा निवेश करने के बजाय धीरे-धीरे (SIP तरीके से) खरीदारी करें। जब तक बाजार में स्थिरता नहीं आती, तब तक हर तेजी पर खरीदने की बजाय इंतजार करना ज्यादा समझदारी होगी। अगर पहले से निवेश है, तो इस तरह की रिकवरी में थोड़ा मुनाफा बुक करना भी गलत नहीं है।
फिलहाल सोना और चांदी दोनों ही “उलझन वाले मोड” में हैं ऊपर भी जा सकते हैं और नीचे भी। ग्लोबल फैक्टर्स जैसे डॉलर, कच्चा तेल और ब्याज दरें इनके मूवमेंट को तय करेंगे। लंबी अवधि में सोना अभी भी मजबूत माना जा रहा है, लेकिन शॉर्ट टर्म में सतर्क रहना ही सबसे बेहतर रणनीति है।














