8th Pay Commission: पिछले कुछ समय से देश में लगातार 8वें वेतन आयोग को लेकर जंग छिड़ी हुई है। हालांकि 8 वें वेतन आयोग पर सरकार ने हरी झंडी दे दी है और अब इस पर प्रस्ताव भी तैयार किया जा रहा है। परंतु हाल ही में 8वें वेतन आयोग से पहले ही केंद्र सरकार का एक और बड़ा फैसला लिया है जो पूरे क्रम में विवाद की वजह बन गया है।
जी हां 8 वें वेतन आयोग के अंतर्गत केंद्र सरकार ने कंपोजिट सैलरी अकाउंट शुरू करने की बात कही। कंपोजिट सैलरी अकाउंट एक विशेष अकाउंट होने वाला था जिसका फायदा सभी केंद्रीय कर्मचारियों को मिलने वाला था। परंतु इस प्रक्रिया के शुरू होने से पहले ही करीबन 2.5 लाख कर्मचारी इस लाभ से बाहर कर दिए गए हैं। सरकार के इस फैसले के सामने आते ही कर्मचारी संगठनों में नाराजगी पसर गई है।
2.5 लाख कर्मचारियों को कंपोजिट सैलरी अकाउंट से बाहर रखने का मुख्य कारण
- कर्मचारियों को कंपोजिट सैलरी अकाउंट से बाहर रखा जाएगा इसके पीछे सरकार दलील दे रही है कि यह कर्मचारी कागजी और प्रशासनिक रूप से सीधा केंद्रीय मंत्रालयों के अंतर्गत नहीं आते।
- मतलब 2.5 लाख कर्मचारी ऐसे हैं जो सेंट्रल ऑटोनॉमस बॉडी, बोर्ड ट्रस्ट और संस्थानों में कार्यरत हैं और उनकी वित्तीय और बैंकिंग व्यवस्थाएं अलग नियमों से संचालित होती है।
- इसी वजह से सरकार 8वें वेतन आयोग के अंतर्गत शुरू किए गए इस कंपोजिट सैलरी अकाउंट का फायदा इन 2.5 लाख कर्मचारियों को नहीं देगी।
- केंद्र सरकार का तर्क है कि यह सब स्वायत्त संस्थाएं हैं, इनका सैलरी प्रकार, बैंक टाइप और वित्तीय दायित्व अलग-अलग है इसीलिए इन सभी कर्मचारियों को एक साथ सुविधा देना केंद्र सरकार के बस के बाहर की बात है।
- वही 8 वें वेतन आयोग की वजह से केंद्र सरकार पर पहले ही वित्तीय बोझ बढ़ने वाला है इसीलिए सरकार अब इस योजना को सीमित दायरे में ही शुरू करने वाली है।
क्या है कंपोजिट सैलरी अकाउंट
कंपोजिट सैलरी अकाउंट एक जीरो बैलेंस सैलरी अकाउंट होगा, जिसमें न्यूनतम बैलेंस रखने की कोई बाध्यता नहीं होगी। फिर चाहे खाते में पैसे हो या ना हो। हालांकि इस खाते को खोलने के बाद कर्मचारियों को कई प्रकार की सुविधाएं मिलेंगी जैसे कि:
- फ्री डेबिट कार्ड
- फ्री चेक बुक
- अनलिमिटेड ATM ट्रांजैक्शन
- UPI,NEFT, RTGS, IMPS जैसे सैलरी ट्रांजैक्शन
- सस्ते ब्याज पर लोन की सुविधा
- ओवरड्राफ्ट और पर्सनल लोन की सुविधा
- प्री-अप्रूव्ड पर्सनल लोन
- इंश्योरेंस कवर का फायदा
- क्रेडिट कार्ड का फायदा
- बेहतर कस्टमर सपोर्ट
- एयरपोर्ट लाउन्ज एक्सेस की सुविधा
- डाइनिंग, शॉपिंग और ट्रैवल पर डिस्काउंट
- फ्यूल सरचार्ज वेवर
- प्रीमियम बैंकिंग और लाइफटाइम बेनिफिट्स की सुविधा
क्यों हुआ है यह पूरा विवाद
असल में 8 वें वेतन आयोग को लेकर केंद्र सरकार द्वारा लिए गए कई निर्णय काफी फायदेमंद है जिसकी वजह से सारे केंद्रीय कर्मचारी खुश भी दिखाई दे रहे थे। परंतु समस्या आ रही है चयन में, क्योंकि सरकार ने यह कंपोजिट सैलरी अकाउंट कुछ चुनिंदा केंद्रीय मंत्रालय एवं और विभागों में कार्य करने वाले कर्मचारियों के लिए खोलने का फैसला किया है। लगभग 5000 ऑटोनॉमस बॉडी में काम करने वाले 2.5 लाख कर्मचारी इस स्कीम से बाहर कर दिए गए हैं। मतलब यह सारे कर्मचारी काम भले ही केंद्र सरकार के लिए कर रहे हैं लेकिन केंद्र सरकार इन सभी को सुविधा प्रदान नहीं करेगी।
कर्मचारी संगठन का क्या कहना है?
2.5 लाख केंद्रीय कर्मचारियों को इस योजना से बाहर करने पर अब ऑल इंडिया एंप्लॉयी फेडरेशन इस फैसले को भेदभावपूर्ण बता रहा है। उन्होंने वित्त मंत्री को पत्र लिखकर साफ कर दिया है कि सारे कर्मचारी केंद्र सरकार के अधीन ही काम कर रहे है तो फिर सुविधा सभी को मिलनी चाहिए। उन्होंने स्पष्ट कर दिया है की 8 वें वेतन आयोग को लागू करने से पहले ही ऐसा भेदभाव पूर्ण फैसला कर्मचारियों के मनोबल को तोड़ देगा।
8वें वेतन आयोग को लेकर अब कर्मचारियों का रुख
कर्मचारी इसीलिए भी ज्यादा चिंतित हो गए हैं की 8 वें वेतन आयोग को लागू करने से पहले ही जब इतना भेदभाव किया जा रहा है तो आगे सरकार क्या करेगी? क्योंकि कंपोजिट सैलरी अकाउंट को 8वें वेतन आयोग की तैयारी से जोड़ा जा रहा था। ऐसे में जहां एक तरफ कर्मचारी उम्मीद कर रहे थे की सैलरी स्ट्रक्चर बदलेगा, भत्ते बढ़ेंगे, बैंकिंग और सोशल सिक्योरिटी सुविधा बढ़ेगी और वहीं दूसरी ओर जब शुरुआत में ही लाखों कर्मचारियों को डायरेक्ट काम न करने की शर्त के चलते योजना से बाहर कर दिया गया है तो अब 8 वें वेतन आयोग पर भी सवाल उठने लगे हैं।
सरकार का क्या रुख है?
हालांकि सरकार फिलहाल अपनी तरफ से विभिन्न दलीलें दे रही है। सरकार का कहना है कि सभी कर्मचारी अलग-अलग स्वास्थ्य संस्थानों में काम करते हैं। यह सारी ऑटोनॉमस बॉडीज है जिनके वित्तीय रूप अलग है। वहीं दूसरी ओर सरकार का कहना है कि सरकार धीरे-धीरे इस योजना को लागू करने के बारे में सोच रही है। मतलब आने वाले कुछ वर्षों में ऑटोनॉमस बॉडीज में काम करने वाले कर्मचारियों को भी कंपोजिट सैलरी अकाउंट जैसी योजना का लाभ दिया जाएगा।
कुल मिलाकर देश में कर्मचारी संगठनों में असंतोष पसर चुका है। आने वाले समय में यूनियन आंदोलन भी कर सकती है और 8वें वेतन आयोग से पहले माहौल खराब भी हो सकता है। वही 1 फरवरी 2026 को यूनियन बजट पेश किया जाने वाला है। ऐसे में बजट से पहले ही सरकार का यह रुख अब कर्मचारियों के मनोबल को तोड़ता हुआ प्रतीत हो रहा है।
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