NDA सरकार ने ग्रामीण भारत के लिए एक नया और बड़ा कदम उठाते हुए Viksit Bharat—Guarantee for Rozgar and Ajeevika Mission (Gramin) यानी VB-G Ram G Bill, 2025 पेश किया है। यह बिल मौजूदा मनरेगा (MGNREGA) कानून, 2005 की जगह लेगा और ग्रामीण रोजगार गारंटी व्यवस्था में कई अहम बदलाव लेकर आएगा।
इस नए बिल के तहत जहां एक ओर ग्रामीण परिवारों को ज्यादा दिनों का रोजगार देने की बात कही गई है, वहीं दूसरी ओर राज्यों पर वित्तीय बोझ भी बढ़ सकता है। इसके अलावा पहली बार रोजगार गारंटी में “ब्रेक” यानी अस्थायी रोक का प्रावधान भी जोड़ा गया है।
आइए आसान भाषा में समझते हैं कि VB-G Ram G Bill 2025 में कौन-कौन से 5 बड़े बदलाव प्रस्तावित किए गए हैं।
1. रोजगार गारंटी के दिन बढ़कर 125

VB-G Ram G Bill के तहत अब हर ग्रामीण परिवार को एक वित्तीय वर्ष में 125 दिनों का गारंटीड रोजगार देने का प्रस्ताव है। अभी मनरेगा के तहत यह सीमा 100 दिन है।
हालांकि, मनरेगा कानून में “कम से कम 100 दिन” लिखा है, लेकिन व्यवहार में यह 100 दिन की अधिकतम सीमा बन चुकी है, क्योंकि सॉफ्टवेयर 100 दिन से ज्यादा काम दर्ज करने की अनुमति नहीं देता, जब तक राज्य विशेष अनुरोध न करे।
फिलहाल कुछ खास परिस्थितियों में अतिरिक्त दिन मिलते हैं, जैसे:
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वन क्षेत्रों में रहने वाले अनुसूचित जनजाति (ST) परिवारों को 150 दिन तक काम
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सूखा या प्राकृतिक आपदा घोषित होने पर अतिरिक्त 50 दिन का रोजगार
नया बिल इस व्यवस्था को स्पष्ट करते हुए 125 दिनों की गारंटी को मानक बनाता है।
2. मजदूरी का खर्च अब केंद्र और राज्य मिलकर उठाएंगे

VB-G Ram G Bill का एक बड़ा बदलाव है फंडिंग पैटर्न। अभी मनरेगा में अकुशल मजदूरी का पूरा खर्च केंद्र सरकार उठाती है, लेकिन नए बिल में राज्यों को भी मजदूरी का हिस्सा देना होगा।
प्रस्तावित फंड शेयरिंग इस प्रकार होगी:
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पूर्वोत्तर राज्य, हिमालयी राज्य और कुछ केंद्र शासित प्रदेश – 90:10 (केंद्र:राज्य)
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अन्य राज्य और विधानसभा वाले केंद्र शासित प्रदेश – 60:40
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बिना विधानसभा वाले केंद्र शासित प्रदेश – पूरा खर्च केंद्र सरकार उठाएगी
इस बदलाव से साफ है कि राज्यों के खजाने पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है।
3. लेबर बजट की जगह “Normative Allocation”
अब तक मनरेगा के तहत हर साल राज्य अपनी जरूरत के हिसाब से लेबर बजट पेश करते थे, जो काम की मांग पर आधारित होता था। लेकिन VB-G Ram G Bill में इसे बदलकर “Normative Allocation” कर दिया गया है।
इसका मतलब:
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केंद्र सरकार हर राज्य के लिए पहले से तय करेगी कि उसे कितनी राशि मिलेगी
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अगर कोई राज्य तय सीमा से ज्यादा खर्च करता है, तो उसका बोझ राज्य सरकार को खुद उठाना होगा
यानी अब मनरेगा जैसी ओपन-एंडेड फंडिंग नहीं रहेगी।
4. खेती के सीजन में रोजगार पर अस्थायी रोक
यह सबसे नया और विवादित बदलाव माना जा रहा है। VB-G Ram G Bill में पहली बार रोजगार गारंटी को खेती के पीक सीजन में रोकने का प्रावधान किया गया है।
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बुवाई और कटाई के मौसम में
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एक वित्तीय वर्ष में कुल 60 दिन तक
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इन दिनों में कोई काम नहीं दिया जाएगा
राज्य सरकारें अलग-अलग जिलों, ब्लॉकों या पंचायतों के लिए अलग नोटिफिकेशन जारी कर सकेंगी।
सरकार का कहना है कि इससे खेती के समय मजदूरों की कमी नहीं होगी, लेकिन इसका मतलब यह भी है कि 125 दिन का रोजगार लेने के लिए समय कम हो जाएगा।
5. साप्ताहिक मजदूरी भुगतान

VB-G Ram G Bill के तहत मजदूरों को अब हर हफ्ते मजदूरी देने का प्रावधान किया गया है। अभी मनरेगा में मजदूरी भुगतान की अधिकतम सीमा 15 दिन है।
नए बिल के मुताबिक:
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मजदूरी साप्ताहिक आधार पर दी जाएगी
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या फिर अधिकतम 15 दिन के भीतर भुगतान जरूरी होगा
अगर भुगतान में देरी होती है, तो मजदूरों को पहले की तरह मुआवज़ा (compensation) भी मिलेगा। मजदूरी दरें मनरेगा के तहत तय दरों के अनुसार ही रहेंगी।
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