मोरिंगा उगाकर किसान कर सकते हैं अच्छी पैदावार Moringa Farming : गर्मियों का सीजन आते ही किसानों के मन में ये सवाल आने लगता है कि कम पानी में कौन सी फसल उगाई जाए, जिससे लागत के हो और मुनाफा ज्यादा हो। यही हाल राजस्थान के किसानों का है। अक्सर इस बात को ल...
मोरिंगा उगाकर किसान कर सकते हैं अच्छी पैदावार
Moringa Farming : गर्मियों का सीजन आते ही किसानों के मन में ये सवाल आने लगता है कि कम पानी में कौन सी फसल उगाई जाए, जिससे लागत के हो और मुनाफा ज्यादा हो। यही हाल राजस्थान के किसानों का है। अक्सर इस बात को लेकर किसान परेशान रहते हैं कि कम पानी में कौन सी फसल उगाएं जिससे ज़्यादा प्रॉफिट हो। अगर आप भी अपनी बंजर या कम उपजाऊ ज़मीन को लेकर परेशान हैं, तो आज हम आपके लिए खेती का एक ऐसा तरीका लाए हैं, जिससे आपकी सूखी ज़मीन भी सोना उगाएगी।
राजस्थान में किसानों के लिए मोरिंगा की खेती (Moringa Farming) कम लागत में ज़्यादा प्रॉफिट कमाने का ज़रिया बनती जा रही है। बंजर ज़मीन पर उगने वाला यह पौधा औषधीय गुणों से भरपूर है और 6 से 8 महीने में पैदावार देना शुरू कर देता है। सालाना 6 लाख रुपये प्रति हेक्टेयर तक की कमाई के साथ, यह पारंपरिक खेती का एक बेहतरीन विकल्प है। यह जादुई फसल है मोरिंगा, जिसे मोरिंगा या ड्रमस्टिक भी कहते हैं। यह फसल राजस्थान के गर्म मौसम और रेतीली मिट्टी के लिए सबसे सही मानी जाती है। मोरिंगा की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसे बहुत कम पानी की ज़रूरत होती है और यह बंजर मिट्टी में भी अच्छी तरह उग जाती है।
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Moringa Farming[/caption]
पोषक तत्वों और दवाइयों का खजाना है
मोरिंगा का पौधा सिर्फ़ एक पेड़ नहीं है, बल्कि पोषक तत्वों और दवाइयों का खजाना है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, इसमें दूध से ज़्यादा कैल्शियम, संतरे से ज़्यादा विटामिन C और केले से कई गुना ज़्यादा पोटैशियम होता है। इसकी पत्तियों, फूलों और फलियों का इस्तेमाल सिर्फ़ सब्ज़ी बनाने में ही नहीं, बल्कि दवाइयों, जानवरों के चारे और ऑर्गेनिक पेस्टिसाइड्स के लिए भी बहुत ज़्यादा होता है। इसे हाई ब्लड प्रेशर, आर्थराइटिस और शरीर में सूजन जैसी गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए रामबाण माना जाता है। बाज़ार में इसके पाउडर और फलियों की बढ़ती मांग की वजह से किसान अच्छा-खासा मुनाफ़ा कमा रहे हैं।
बुवाई का सही समय और एडवांस्ड टेक्नोलॉजी
फरवरी-मार्च या जून-जुलाई मोरिंगा की खेती के लिए सबसे अच्छे महीने माने जाते हैं। हल्की दोमट से रेतीली दोमट मिट्टी इसके लिए सबसे अच्छी होती है, क्योंकि यह 25 से 35 डिग्री सेल्सियस के तापमान में तेज़ी से बढ़ती है। अच्छी पैदावार के लिए किसान PKM-1, PKM-2, या कोयंबटूर-1 जैसी बेहतर किस्में चुन सकते हैं। बुवाई के समय पौधे से पौधे के बीच कम से कम 50-60 cm की दूरी और लाइनों के बीच कम से कम 1 मीटर की दूरी होना ज़रूरी है। पहले दो महीने हल्की सिंचाई के बाद, आप 10-15 दिन के गैप पर पानी दे सकते हैं। इसके लिए ड्रिप इरिगेशन सबसे अच्छा तरीका है।
सहजन की खेती (Moringa Farming) किसानों के लिए एक इन्वेस्टमेंट
सहजन की खेती किसानों के लिए एक इन्वेस्टमेंट है, क्योंकि यह बुवाई के छह से आठ महीने बाद ही फल और फूल देना शुरू कर देता है। एक हेक्टेयर ज़मीन से लगभग 15 से 25 टन पैदावार मिल सकती है।
अगर सही तरीके से मार्केटिंग की जाए, तो किसान पत्तियों और फलियों को बेचकर हर हेक्टेयर 400,000 से 600,000 रुपये की अच्छी-खासी सालाना इनकम कमा सकते हैं। फर्टिलाइज़र मैनेजमेंट के लिए, नाइट्रोजन और फॉस्फोरस का सही मिक्सचर, साथ में हर हेक्टेयर 10-15 टन गोबर की खाद, इसकी ग्रोथ को और तेज़ करता है।