धार्मिक

अयोध्या राम मंदिर दान विवाद: 8 गिरफ्तार, लेकिन बड़े जिम्मेदारों पर उठ रहे सवाल, जांच पर टिकी सबकी नजर

राम मंदिर

राम मंदिर में श्रद्धालुओं के दान में कथित गड़बड़ी के मामले में अब तक 8 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है। हालांकि, इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि क्या जांच केवल निचले स्तर के कर्मचारियों तक सीमित रहेगी या फिर शीर्ष पदों पर बैठे लोगों की भूमिका की भी जांच होगी।

मामले की जांच के बीच राम जन्मभूमि मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा से जवाबदेही को लेकर सवाल पूछे गए। इस पर उन्होंने कहा कि यह उनके “कार्य क्षेत्र (Domain of Responsibility)” का हिस्सा नहीं है। इससे पहले उन्होंने कहा था कि मामले में गठित स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) की रिपोर्ट का इंतजार किया जाना चाहिए।

क्या कहती है SIT की रिपोर्ट?

दान में कथित गड़बड़ी के आरोप सामने आने के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की सिफारिश पर एसआईटी का गठन किया था।

एसआईटी की 20 पन्नों की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि 27 अप्रैल से 5 जून 2026 के बीच सीसीटीवी फुटेज की जांच में करीब 70 चोरी या गड़बड़ी से जुड़े मामले सामने आए। रिपोर्ट के अनुसार यह कथित अनियमितताएं दो साल से अधिक समय से चल रही थीं और लगभग 70 लोगों पर संदेह जताया गया है।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि दान की गिनती के लिए बनाई गई स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) का पालन नहीं किया गया। जांच में इसे गंभीर लापरवाही बताया गया है।

अब तक 8 लोगों की गिरफ्तारी

इस मामले में पुलिस ने दान की नकदी और कीमती सामान की गिनती से जुड़े 8 लोगों को गिरफ्तार किया है। इनमें अविनाश शुक्ला, अनुकल्प मिश्रा, लव कुश मिश्रा, मनीष कुमार यादव, करुणेश पांडेय, राम शंकर मिश्रा, सुभाष श्रीवास्तव और रामाशंकर उर्फ टिन्नू यादव शामिल हैं।

जांच एजेंसियों के अनुसार सुभाष श्रीवास्तव और टिन्नू यादव को कथित साजिश के प्रमुख आरोपियों में माना जा रहा है।

शीर्ष पदों पर बैठे लोगों पर भी उठे सवाल

रिपोर्ट में ट्रस्ट से जुड़े कुछ वरिष्ठ पदाधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए हैं। इसी बीच ऐसी खबरें भी सामने आई हैं कि चंपत राय ने ट्रस्ट के महासचिव पद से इस्तीफा देने की पेशकश की है।

हालांकि इस मामले में चंपत राय और ट्रस्ट सदस्य अनिल मिश्रा की ओर से मीडिया के सवालों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

विपक्ष ने की निष्पक्ष जांच की मांग

कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने कहा कि यदि छोटे कर्मचारियों से सवाल पूछे जा रहे हैं तो ट्रस्ट के शीर्ष पदाधिकारियों से भी जवाब मांगा जाना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि केवल निचले स्तर के कर्मचारियों पर कार्रवाई पर्याप्त नहीं है और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।

वहीं उत्तर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय ने भी मामले में वरिष्ठ पदाधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।

विहिप ने क्या कहा?

विश्व हिंदू परिषद (VHP) के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार ने कहा कि यदि जांच में जरूरत पड़े तो बड़े पदों पर बैठे लोगों से भी पूछताछ की जानी चाहिए। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी व्यक्ति को जांच पूरी होने से पहले दोषी नहीं माना जा सकता।

योगी सरकार का बयान

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि एसआईटी पूरी निष्पक्षता के साथ जांच कर रही है और दोषी चाहे कोई भी हो, उसे बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने भरोसा दिलाया कि जांच के आधार पर सच्चाई सामने लाई जाएगी।

फिलहाल जांच जारी है और अब सभी की नजर इस बात पर है कि क्या एसआईटी की कार्रवाई केवल गिरफ्तार किए गए कर्मचारियों तक सीमित रहेगी या जांच का दायरा ट्रस्ट के वरिष्ठ पदाधिकारियों तक भी पहुंचेगा। मामले में आगे आने वाली जांच रिपोर्ट और आधिकारिक बयानों का इंतजार किया जा रहा है।

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