हर साल 25 मई के आते ही अचानक इतनी गर्मी क्यों बढ़ जाती है? क्यों बुजुर्ग कहते हैं कि ये 9 दिन संभलकर रहना? आइए जानते हैं नौतपा के पीछे का विज्ञान…
यह सिर्फ एक हीटवेव नहीं है। नौतपा में 5,000 साल पुरानी भारतीय समझ छिपी है, और इस बार विज्ञान भी इसकी हर बात को सही साबित करता दिख रहा है।
अगर आप इन दिनों घर से बाहर निकलते ही सोच रहे हैं कि क्या किसी ने चुपचाप भारत को सूरज के 10 डिग्री और करीब कर दिया है, तो आप गलत नहीं हैं। नौतपा 2026 की शुरुआत 25 मई से हो चुकी है, और शुरुआती दिनों को देखकर साफ है कि आने वाले नौ दिन बेहद कठिन होने वाले हैं।
उत्तर भारत और राजस्थान के कई हिस्सों में तापमान पहले ही 46–47°C तक पहुंच चुका है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने उत्तर-पश्चिम और मध्य भारत में हीटवेव अलर्ट जारी किया है। स्वागत है नौतपा में , भारतीय कैलेंडर के सबसे गर्म नौ दिनों में, जहां प्राचीन खगोल विज्ञान और आधुनिक मौसम विज्ञान एक-दूसरे से मिलते नजर आते हैं।
नौतपा क्या है? भारत के “आग जैसे 9 दिनों” को समझिए
नाम ही सब कुछ बता देता है। “नौ” यानी 9 और “तपा” यानी तपन या जलाने वाली गर्मी। नौतपा हर साल आने वाला वह नौ दिन का समय है जब भारत में गर्मी अपने सबसे खतरनाक रूप में होती है। 2026 में यह 25 मई से 2 जून तक रहेगा।
लेकिन नौतपा को सिर्फ सामान्य गर्मी से अलग क्या बनाता है? यह कोई मनमाना समय नहीं है। इसका उल्लेख हजारों साल पुराने भारतीय ज्योतिष ग्रंथों में मिलता है। नौतपा तब शुरू होता है जब सूर्य ज्येष्ठ महीने में रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करता है। सूर्य के इस 15 दिन के गोचर के पहले 9 दिन नौतपा कहलाते हैं।
भारत मौसम विज्ञान विभाग के पूर्व निदेशक आनंद शर्मा ने भी माना कि IMD आधिकारिक रूप से “नौतपा” शब्द का उपयोग नहीं करता, लेकिन यह पारंपरिक ज्ञान पूरी तरह वास्तविक है। उनके अनुसार, मई के मध्य से जून की शुरुआत तक का सबसे तीव्र हीटवेव सीजन लगभग हमेशा इसी अवधि से मेल खाता है।
Quick Fact
सूर्य लगभग 15 दिनों तक रोहिणी नक्षत्र में रहता है। इनमें से पहले 9 दिन, जब चंद्रमा भी विशेष नक्षत्रों से गुजरता है, नौतपा कहलाते हैं। प्राचीन ग्रंथों के अनुसार यह अवधि रोहिणी से शुरू होकर नौ नक्षत्रों की स्थिति से निर्धारित होती है।
नौतपा के पीछे ज्योतिष: क्यों “क्रोधित” हो जाता है सूर्य?
यहीं से चीजें और दिलचस्प हो जाती हैं, चाहे आप ज्योतिष में विश्वास करते हों या नहीं।
भारतीय ज्योतिष में वृषभ राशि को नौतपा का केंद्र माना जाता है। इस राशि में तीन नक्षत्र आते हैं, कृत्तिका (सूर्य का नक्षत्र), रोहिणी (चंद्रमा का नक्षत्र) और मृगशिरा (मंगल का नक्षत्र)।
जब सूर्य, जो पहले से अग्नि तत्व वाला ग्रह माना जाता है, रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करता है, तब एक प्रकार का “आकाशीय तनाव” बनता है। ठंडी प्रकृति वाला रोहिणी नक्षत्र इस समय सूर्य के बेहद करीब माना जाता है, जिससे सौर प्रभाव और तेज हो जाता है।
“ज्येष्ठ मासे शीत पक्षे आर्द्रादि दशतारका।
सजला निर्जला ज्ञेया निर्जला सजलास्तथा॥”
इस प्राचीन श्लोक का अर्थ है कि यदि ज्येष्ठ महीने में आर्द्रा से शुरू होने वाले नक्षत्रों के दौरान भारी वर्षा होती है, तो मानसून में सूखा पड़ सकता है, और यदि नौतपा बहुत तेज पड़ता है, तो मानसून भी उतना ही अच्छा माना जाता है।
भारत के किसान पीढ़ियों से इस मान्यता पर भरोसा करते आए हैं।
इस साल ग्रहों की स्थिति भी खास मानी जा रही है। शनि और मंगल जल तत्व वाली राशियों में हैं, खासकर मंगल वृश्चिक राशि में। ज्योतिषियों के अनुसार इससे इस बार भीषण गर्मी के साथ कुछ इलाकों में अचानक भारी बारिश और लोकल फ्लडिंग भी देखने को मिल सकती है।
नौतपा का विज्ञान: आखिर तापमान इतना क्यों बढ़ जाता है?
अब बात करते हैं असली विज्ञान की, क्योंकि यहां मौसम विज्ञान भी उतना ही दिलचस्प है जितना ज्योतिष।
सीधी सूर्य किरणें और पृथ्वी की स्थिति
मई के आखिर में भारत का झुकाव लगभग सीधे सूर्य की ओर होता है। यह सिर्फ कहने की बात नहीं, बल्कि ज्यामिति है। इस दौरान सूर्य की किरणें भारतीय उपमहाद्वीप पर लगभग सीधी पड़ती हैं। इससे किरणों को वातावरण में कम दूरी तय करनी पड़ती है और जमीन तक ज्यादा गर्मी पहुंचती है।
सीधी रोशनी हमेशा ज्यादा तेज असर करती है, ठीक वैसे जैसे टॉर्च को सीधे चमकाने पर रोशनी ज्यादा तेज लगती है। इसके अलावा मई के अंतिम सप्ताह में भारतीय भूभाग पर सौर विकिरण की तीव्रता भी बढ़ जाती है, जिससे गर्मी और ज्यादा आक्रामक महसूस होती है।
प्री-मानसून हीटवेव और सूखी हवाएं
भारतीय गर्मियों की सबसे बड़ी विडंबना यही है कि मानसून आने से ठीक पहले मौसम सबसे ज्यादा खतरनाक हो जाता है।
अरब सागर से मानसूनी हवाएं अभी पूरी तरह सक्रिय नहीं होतीं। जमीन कई हफ्तों से तप रही होती है। उत्तर-पश्चिम से चलने वाली “लू” नमी नहीं बल्कि सिर्फ गर्मी लेकर आती है। यही वजह है कि नौतपा अप्रैल की गर्मी से भी ज्यादा खतरनाक महसूस होता है।
नौतपा में खुद को कैसे सुरक्षित रखें? जानिए जरूरी उपाय
जेब में प्याज रखने का देसी तरीका: मिथक या विज्ञान?
आपने शायद अपनी दादी या मां से सुना होगा, “बेटा बाहर जा रहे हो? प्याज साथ रख लो।”
यह सिर्फ घरेलू नुस्खा नहीं है। इसके पीछे विज्ञान भी मौजूद है। प्याज में सल्फर यौगिक और आवश्यक तेल होते हैं जो शरीर का तापमान नियंत्रित करने और हीट स्ट्रोक के खतरे को कम करने में मदद कर सकते हैं।
कुछ शोधों के अनुसार कच्चा प्याज शरीर की अतिरिक्त गर्मी को कम करने में मदद कर सकता है। यह बर्फ जितना असरदार नहीं, लेकिन पूरी तरह गलत भी नहीं है।
सिर्फ पानी नहीं, सही हाइड्रेशन जरूरी
नौतपा में शरीर तेजी से इलेक्ट्रोलाइट्स खोता है। ऐसे में पारंपरिक भारतीय पेय बेहद फायदेमंद माने जाते हैं:
- आम पन्ना शरीर में सोडियम और पोटैशियम की कमी पूरी करता है
- छाछ पेट को ठंडा रखती है
- सत्तू का शरबत शरीर को लंबे समय तक ऊर्जा देता है
- नारियल पानी प्राकृतिक इलेक्ट्रोलाइट ड्रिंक है
सही कपड़े और धूप से बचाव
ढीले और हल्के रंग के सूती कपड़े गर्मी में सबसे बेहतर माने जाते हैं। सूती कपड़ा पसीना सोखता है और शरीर को सांस लेने देता है।
बाहर निकलते समय सिर ढकना जरूरी है। गर्दन के पीछे गीला कपड़ा रखने से काफी राहत मिल सकती है।
UV प्रोटेक्शन वाले चश्मे भी जरूरी हैं क्योंकि लगातार तेज धूप आंखों को नुकसान पहुंचा सकती है।
क्या बिल्कुल नहीं करना चाहिए
इन नौ दिनों में कुछ चीजों से बचना बेहद जरूरी है:
- दोपहर 12 बजे से 4 बजे के बीच बाहर निकलने से बचें
- ज्यादा तला-भुना और भारी खाना न खाएं
- धूप से आने के तुरंत बाद बर्फ जैसा ठंडा पानी न पिएं
- चाय और कॉफी कम लें क्योंकि ये शरीर में पानी की कमी बढ़ा सकते हैं
भारतीय पारंपरिक ज्ञान और गर्मी से बचाव
हमारे पूर्वजों ने बिना बिजली के भी शानदार कूलिंग सिस्टम बनाए थे।
मटके का पानी फ्रिज के पानी से ज्यादा प्राकृतिक तरीके से ठंडा होता है। मिट्टी की सतह से पानी धीरे-धीरे वाष्पित होता है, जिससे अंदर का पानी ठंडा रहता है। यही सिद्धांत एयर कंडीशनर में भी इस्तेमाल होता है।
सौंफ और जीरा जैसे मसाले सिर्फ स्वाद के लिए नहीं होते। इनमें शरीर को अंदर से ठंडा रखने वाले गुण होते हैं। सुबह जीरा पानी पीना आज भी असरदार माना जाता है।
कच्चे धनिए की चटनी, खीरे का रायता और पुदीना भी शरीर को ठंडा रखने में मदद करते हैं।
“नौतपा सिर्फ एक शब्द नहीं है। यह 5,000 साल से भारतीयों द्वारा आसमान को समझने, धरती को पढ़ने और मौसम के चक्र को पहचानने की परंपरा है।”
प्रकृति के इस चक्र का सम्मान करें और सुरक्षित रहें
नौतपा में एक खास संतुलन छिपा है। यही तेज गर्मी आगे चलकर अच्छे मानसून की तैयारी मानी जाती है।
कई किसान आज भी मानते हैं कि अगर नौतपा ठीक से नहीं तपे, तो मानसून भी कमजोर रह सकता है।
भले ही विज्ञान “नौतपा” शब्द को आधिकारिक रूप से स्वीकार न करे, लेकिन IMD भी मानता है कि यही समय भारत में सबसे ज्यादा हीटवेव जोखिम वाला होता है।
क्लाइमेट चेंज ने नौतपा को और खतरनाक बना दिया है। हीटवेव पहले आ रही हैं, ज्यादा समय तक रह रही हैं और ज्यादा जानलेवा हो रही हैं। 2000 से 2020 के बीच भारत में 10,000 से ज्यादा लोगों की मौत अत्यधिक गर्मी के कारण हुई।
इसलिए इस हफ्ते खुद का और अपने आसपास के लोगों का ध्यान रखें। बुजुर्गों, बच्चों और बाहर काम करने वाले लोगों की मदद करें। पानी हमेशा साथ रखें। और अगर आप चाहें, तो जेब में प्याज भी रख सकते हैं, विज्ञान कहता है कि यह इतना बुरा आइडिया नहीं है।
नौतपा 2026, 25 मई से 2 जून तक चलेगा। दिल्ली-NCR, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के कई हिस्सों में IMD का हीटवेव अलर्ट जारी है। कई जिलों में तापमान 46°C या उससे ज्यादा पहुंच सकता है।













