उत्तर प्रदेश के Agra से PM आवास योजना को लेकर एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। ईदगाह इलाके में एक मकान के फर्जी दस्तावेज तैयार कर छह लोगों द्वारा करीब 15 लाख रुपये का अनुदान लेने का आरोप लगा है। मामले के सामने आने के बाद अब मकान मालिक ने जिलाधिकारी से मिलकर आरोपियों के खिलाफ FIR दर्ज कराने की मांग की है।
बताया जा रहा है कि ईदगाह निवासी पदमचंद ने डीएम मनीष बंसल से मुलाकात कर पूरे मामले की शिकायत की। उनका आरोप है कि उनके मकान का फर्जी नंबर “108 धनीराम की बगीची” दिखाकर छह किरायेदारों ने प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ उठा लिया। इतना ही नहीं, इस पूरे मामले में डूडा कर्मचारियों की मिलीभगत होने का भी आरोप लगाया गया है।
तीन महीने बाद भी जांच अधूरी, बढ़ा शक
मामले की जांच अपर नगर आयुक्त को सौंपी गई थी, लेकिन तीन महीने गुजर जाने के बाद भी जांच पूरी नहीं हो सकी है। इसी को लेकर अब पीड़ित पक्ष लगातार अधिकारियों के चक्कर काट रहा है। मकान मालिक का कहना है कि अगर समय रहते कार्रवाई होती, तो सरकारी धन के इस कथित घोटाले को रोका जा सकता था।
डीएम से शिकायत के बाद मामले ने और तूल पकड़ लिया है। जानकारी के मुताबिक जिलाधिकारी ने इस पूरे प्रकरण में आपराधिक मामला दर्ज करने के निर्देश दिए हैं। अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि जांच में किन-किन लोगों की भूमिका सामने आती है।
PM आवास योजना में सत्यापन कैसे होता है?
प्रधानमंत्री आवास योजना में किसी भी लाभार्थी को किस्त जारी करने से पहले कई स्तर पर जांच की जाती है। सर्वेयर को मौके पर जाकर जिओ-कोऑर्डिनेट के जरिए लोकेशन सत्यापित करनी होती है। साथ ही लाभार्थी के मकान की फोटो भी अपलोड की जाती है।
योजना के तहत तीन चरणों में फोटो ली जाती हैं। पहली फोटो पहली किस्त जारी होने से पहले, दूसरी मकान की छत पड़ने के समय और तीसरी निर्माण पूरा होने के बाद ली जाती है। इसके बाद रिपोर्ट भेजी जाती है और तभी अंतिम किस्त लाभार्थी के खाते में ट्रांसफर होती है।
ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जब पूरी प्रक्रिया लोकेशन बेस्ड और फोटो वेरिफिकेशन पर आधारित है, तो फिर एक ही मकान पर छह लोगों को अनुदान कैसे मिल गया? यही वजह है कि अब इस मामले को बड़ा घोटाला माना जा रहा है।
सरकारी सिस्टम पर उठे सवाल
इस पूरे मामले ने सरकारी सत्यापन प्रक्रिया और निगरानी तंत्र पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। अगर आरोप सही साबित होते हैं, तो यह सिर्फ फर्जी लाभार्थियों का मामला नहीं रहेगा, बल्कि सिस्टम में अंदर तक मिलीभगत की आशंका भी मजबूत होगी।
स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रधानमंत्री आवास योजना गरीबों को पक्का घर देने के उद्देश्य से शुरू की गई थी, लेकिन अगर इस तरह फर्जीवाड़ा होता रहा तो असली जरूरतमंद लोग योजना के लाभ से वंचित रह जाएंगे।













