EPFO के ट्रस्टी और CBT मेंबर एस.पी. तिवारी के मुताबिक, सेंट्रल बोर्ड ऑफ़ ट्रस्टीज़ की तीन मीटिंग में मिनिमम पेंशन को 1,000 रुपये से बढ़ाकर 3,000 रुपये करने के प्रपोज़ल को मंज़ूरी मिल चुकी है। लेबर मिनिस्टर मनसुख मंडाविया ने भी इस प्लान को मंज़ूरी दी है, जिसके बारे में EPFO का कहना है कि इसे अपनी इंटरेस्ट इनकम और दूसरे रिसोर्स से फंड किया जा सकता है। इस बढ़ोतरी से पूरे भारत में लगभग 4 मिलियन पेंशनर्स को सीधा फ़ायदा होगा।
EPFO में क्यों नहीं बढ़ रही पेंशन को सीधे ₹7,500 तक?
हालांकि कुछ पेंशनर्स ग्रुप्स ने मिनिमम EPS-95 पेंशन को बढ़ाकर 7,500 रुपये करने की मांग की है, लेकिन अधिकारियों का कहना है कि अभी इतनी बढ़ोतरी मुमकिन नहीं है। लेबर मिनिस्ट्री में बातचीत में इसके बजाय थोड़ी बढ़ोतरी पर ध्यान दिया गया है, जिसमें 1,500 रुपये, 2,000 रुपये, 2,500 रुपये और 3,000 रुपये जैसे नंबरों पर विचार किया जा रहा है। 3,000 रुपये के प्रपोज़ल को फिस्कल सस्टेनेबिलिटी और लंबे समय से चली आ रही पेंशन एडिक्वेसी चिंताओं को दूर करने के बीच बैलेंस के तौर पर देखा जा रहा है।
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EPFO में कम इनकम वाले पेंशनर्स को मिलेगी सबसे ज्यादा राहत

अगर मंज़ूरी मिल जाती है, तो Rs 3,000 की मिनिमम पेंशन से कम इनकम वाले पेंशन लेने वालों की इनकम सिक्योरिटी में काफ़ी सुधार होगा, जिनमें से कई को अभी सिर्फ़ Rs 1,000 की गारंटीड फ्लोर मिलती है। यह बदलाव खास तौर पर उन लोगों के लिए फ़ायदेमंद होगा जिनकी पेंशन वाली सैलरी कम है और कंट्रीब्यूशन हिस्ट्री भी कम है, जिनकी कैलकुलेटेड पेंशन अक्सर मिनिमम से कम हो जाती है। इस तरह की बढ़ोतरी महंगाई के दबाव और रिटायरमेंट के बाद रहने-सहने के बढ़ते खर्चों को कम करने में मदद कर सकती है।
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