Paddy Cultivation: जैसे ही देश में खरीफ़ का मौसम शुरू होता है, किसान धान की खेती की तैयारी में जुट जाते हैं। धान भारत की सबसे ज़रूरी फ़सलों में से एक है। हर किसान चाहता है कि उसकी फ़सल जल्दी पके, उस पर कम खर्च हो और पैदावार भी भरपूर हो। इसी वजह से अब किसान पारंपरिक बीजों को छोड़कर नई और उन्नत किस्मों को अपना रहे हैं। ये आधुनिक किस्में न सिर्फ़ कम समय में ज़्यादा पैदावार देती हैं, बल्कि फ़सल को कई तरह की बीमारियों से भी बचाती हैं।
ऐसे में धान की ऐसी पाँच उन्नत किस्में किसानों के लिए बहुत फ़ायदेमंद साबित हो सकती हैं, क्योंकि ये कम पानी में भी बेहतरीन पैदावार देती हैं और जल्दी पक जाती हैं। CSR-10, NDR-359, अनामिका, WGL-32100 और IR-36 जैसी किस्में, आम किस्मों के मुकाबले 10 से 30 प्रतिशत ज़्यादा पैदावार देती हैं। सही बीज चुनकर, किसान कम लागत में भी काफ़ी मुनाफ़ा कमा सकते हैं। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि अगर किसान सही किस्म का चुनाव करें तो वे कम मेहनत में भी अच्छा-खासा मुनाफ़ा कमा सकते हैं। हम आपको धान की ऐसी ही 5 बेहतरीन किस्मों के बारे में बता रहे हैं, जो किसानों के बीच तेज़ी से लोकप्रिय हो रही हैं।
CSR-10: खारी ज़मीन के लिए सबसे बढ़िया विकल्प
CSR-10 धान की एक अनोखी किस्म है। इसे उन इलाकों के लिए बहुत ही मुफ़ीद माना जाता है जहाँ की मिट्टी में ज़्यादा खारापन होता है या जहाँ खेतों में पानी भर जाने का खतरा रहता है। जहाँ अक्सर किसानों को ऐसी मुश्किल ज़मीनों पर खेती करने में काफ़ी मशक्कत करनी पड़ती है, वहीं यह खास किस्म ऐसी परिस्थितियों में भी ज़बरदस्त पैदावार देती है।
धान की यह किस्म लगभग 120 से 125 दिनों में पककर तैयार हो जाती है। इसकी पैदावार आम तौर पर 50 से 55 क्विंटल प्रति हेक्टेयर होती है। इसके दाने छोटे, चमकदार और सफ़ेद होते हैं, जिनकी बाज़ार में अच्छी-खासी कीमत मिलती है। पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र और कर्नाटक जैसे कई राज्यों के किसान बड़े पैमाने पर इस किस्म की खेती कर रहे हैं। यह एक मज़बूत किस्म है, जिसके खराब होने का खतरा बहुत कम होता है। इस वजह से किसानों को इससे काफ़ी आर्थिक फ़ायदा होता है।
NDR-359: एक शानदार और जल्दी पकने वाली किस्म
NDR-359 धान की एक बेहद लोकप्रिय किस्म है। इसे जल्दी पकने वाली फ़सल माना जाता है। किसान इसे इसलिए पसंद करते हैं, क्योंकि यह सिर्फ़ 115 से 120 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है।
इसकी पैदावार भी काफ़ी अच्छी है। एक हेक्टेयर में लगभग 50 से 55 क्विंटल धान पैदा हो सकता है। क्योंकि इसके पौधे बहुत ज़्यादा ऊँचे नहीं बढ़ते, इसलिए तेज़ हवा या भारी बारिश के दौरान इनके गिरने का खतरा कम रहता है। सबसे ज़रूरी बात यह है कि इसमें कई खतरनाक बीमारियों का सामना करने की क्षमता होती है। उत्तर प्रदेश, बिहार और ओडिशा के किसान बड़े पैमाने पर इस किस्म की खेती कर रहे हैं। इस किस्म को कम समय में अच्छी आमदनी करने के लिए बहुत फ़ायदेमंद माना जाता है।
अनामिका: स्वाद और कीमत दोनों में बेहतरीन
अनामिका धान की एक ऐसी किस्म है जिसे पूरे पूर्वी भारत में बहुत पसंद किया जाता है। बिहार, पश्चिम बंगाल, असम और ओडिशा के किसान इसकी बड़े पैमाने पर खेती करते हैं।
धान की यह किस्म लगभग 130 से 135 दिनों में पककर तैयार हो जाती है। इसकी पैदावार लगभग 50 से 55 क्विंटल प्रति हेक्टेयर होती है। इसके दाने लंबे और मोटे होते हैं। पकने के बाद, इसका चावल स्वादिष्ट होता है और थोड़ा चिपचिपा होता है।
इसके बेहतरीन स्वाद की वजह से बाज़ार में इसकी लगातार माँग बनी रहती है। किसानों का कहना है कि इस किस्म से उन्हें अच्छी कीमत मिलती है, जिससे उन्हें ज़्यादा मुनाफ़ा होता है।

WGL-32100: ज़्यादा पैदावार देने वाली किस्म
WGL-32100 धान की एक उन्नत और ज़्यादा पैदावार देने वाली किस्म है। यह लगभग 125 से 130 दिनों में पककर तैयार हो जाती है। इस किस्म की एक खास बात यह है कि इससे प्रति हेक्टेयर 55 से 60 क्विंटल तक पैदावार मिल सकती है।
इसके पौधे बहुत ज़्यादा ऊँचे नहीं बढ़ते। इसलिए तेज़ हवा और भारी बारिश के दौरान भी फ़सल सीधी खड़ी रहती है। इसके दाने छोटे और पतले होते हैं। यह एक ऐसी खासियत है जिसकी बाज़ार में बहुत तारीफ़ होती है। अपनी बेहतरीन गुणवत्ता और मज़बूत पौधों की वजह से, यह किस्म किसानों के बीच तेज़ी से लोकप्रिय हो रही है।
IR-36: कम पानी में भी अच्छी पैदावार
IR-36 धान की एक पुरानी, लेकिन बहुत भरोसेमंद किस्म है। इसे खास तौर पर उन इलाकों के लिए बहुत सही माना जाता है जहाँ कम बारिश होती है। धान की यह किस्म लगभग 115 से 120 दिनों में पककर तैयार हो जाती है। इसकी पैदावार 40 से 45 क्विंटल प्रति हेक्टेयर होती है। सूखा-सहिष्णु किस्म होने के कारण, यह सीमित पानी की उपलब्धता में भी अच्छी पैदावार देती है। इसके अलावा, इसमें विभिन्न कीटों और बीमारियों का सामना करने की भी क्षमता है। यही कारण है कि किसान आज भी इस किस्म पर अपना भरोसा बनाए हुए हैं।
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सही बीज किसान की किस्मत बदल सकते हैं
कृषि विशेषज्ञ इस बात पर ज़ोर देते हैं कि सफल खेती के लिए सही बीजों का चुनाव करना अत्यंत महत्वपूर्ण है। यदि किसान उन्नत किस्मों का उपयोग करते हैं, तो वे कम लागत में अधिक पैदावार प्राप्त कर सकते हैं।
वर्तमान समय में मौसम के मिजाज में तेज़ी से बदलाव आ रहा है। परिणामस्वरूप, ऐसी किस्मों का चयन करना अनिवार्य हो गया है जो जल्दी पकती हों और बीमारियों के प्रति प्रतिरोधी हों।












