दुनिया की राजनीति में कभी-कभी एक बयान ऐसा आता है जो सिर्फ खबर नहीं रहता, बल्कि कई देशों के रिश्तों की परतें खोल देता है। इस बार ऐसा ही हुआ जब Donald Trump ने एयर फोर्स वन में पत्रकारों से बातचीत के दौरान कहा कि उन्होंने ईरान के साथ सीजफायर सिर्फ पाकिस्तान के लिए एहसान के तौर पर माना था। यह बयान सामने आते ही सोशल मीडिया से लेकर अंतरराष्ट्रीय मीडिया तक हर जगह हलचल मच गई। लोग सिर्फ ये नहीं समझने की कोशिश कर रहे कि ट्रंप ने ऐसा क्यों कहा, बल्कि ये भी जानना चाहते हैं कि आखिर पाकिस्तान की भूमिका इतनी अहम कैसे हो गई। चीन दौरे से लौट रहे ट्रंप ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम, चीन के रवैये और अमेरिका की रणनीति पर भी कई तीखे बयान दिए।
Donald Trump Iran Ceasefire Pakistan बयान क्यों बना इतना बड़ा मुद्दा?

ट्रंप अपने बयानों के लिए हमेशा चर्चा में रहते हैं, लेकिन इस बार मामला थोड़ा अलग था। उन्होंने साफ कहा कि अगर पाकिस्तान की तरफ से अनुरोध नहीं आता, तो शायद वह सीजफायर के पक्ष में नहीं होते। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के फील्ड मार्शल और प्रधानमंत्री ने उनसे बात की थी और उसी के बाद अमेरिका ने नरमी दिखाई। यह बात इसलिए भी बड़ी मानी जा रही है क्योंकि पिछले कुछ समय से अमेरिका और ईरान के बीच तनाव काफी बढ़ चुका था। कई एक्सपर्ट्स का मानना है कि ट्रंप का यह बयान सिर्फ राजनीतिक नहीं, बल्कि एक रणनीतिक संदेश भी हो सकता है। इससे पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय मंच पर अहम दिखाने की कोशिश भी नज़र आती है।
Iran पर ट्रंप का सख्त अंदाज़
ट्रंप ने बातचीत के दौरान दो टूक कहा कि अमेरिका किसी भी हालत में ईरान को परमाणु हथियार हासिल नहीं करने देगा। उन्होंने यह भी कहा कि तेहरान को अपने पास जमा की गई enriched uranium छोड़ना होगा। सबसे ज्यादा चर्चा उस वक्त हुई जब ट्रंप ने बताया कि उन्होंने ईरान का शांति प्रस्ताव पहली लाइन पढ़ते ही खारिज कर दिया। उनका अंदाज़ हमेशा की तरह सीधा और आक्रामक था। उन्होंने कहा कि अगर शुरुआत ही कमजोर लगे तो आगे पढ़ने का कोई मतलब नहीं होता। यही बात अब दुनिया भर में सुर्खियां बन चुकी है।
चीन दौरे में Xi Jinping से क्या बात हुई?
चीन दौरे के दौरान ट्रंप की मुलाकात चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से हुई। दोनों नेताओं के बीच ईरान को लेकर लंबी बातचीत हुई। ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिका और चीन दोनों नहीं चाहते कि ईरान परमाणु ताकत बने। साथ ही स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खुला रहे, इस पर भी सहमति बनी। हालांकि दिलचस्प बात यह रही कि कुछ दिनों पहले तक ट्रंप चीन से मदद मांगते दिख रहे थे, लेकिन अब उन्होंने कहा कि अमेरिका को चीन की जरूरत नहीं है और वह “एक या दूसरे तरीके से” जीत जाएगा।
क्या ईरान का न्यूक्लियर प्रोग्राम सच में कमजोर पड़ा?
ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिकी हमलों के बाद ईरान अपने परमाणु ईंधन को हटाने की स्थिति में नहीं है। उनके मुताबिक ईरानी अधिकारियों ने खुद माना कि उनके पास न पर्याप्त तकनीक है और न ही तैयारी। हालांकि इन दावों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। लेकिन इतना जरूर है कि ट्रंप के बयान ने दुनिया का ध्यान फिर से ईरान के परमाणु कार्यक्रम की तरफ खींच लिया है। मिडिल ईस्ट पहले ही तनाव से भरा हुआ है और ऐसे बयान हालात को और संवेदनशील बना सकते हैं।
सोशल मीडिया पर क्यों वायरल हो रहा है यह बयान?
भारत, पाकिस्तान और अमेरिका तीनों देशों में लोग इस बयान पर जमकर प्रतिक्रिया दे रहे हैं। कुछ लोग इसे पाकिस्तान की बड़ी कूटनीतिक जीत बता रहे हैं, जबकि कई लोग इसे ट्रंप की राजनीतिक स्टाइल का हिस्सा मान रहे हैं। दिलचस्प बात यह है कि ट्रंप ने जिस अंदाज़ में favour to Pakistan कहा, वही लाइन अब इंटरनेट पर मीम्स, डिबेट्स और राजनीतिक चर्चाओं का हिस्सा बन चुकी है।













