देश में पेट्रोल की कीमतें एक बार फिर बढ़ गई हैं। सरकार द्वारा ₹3.25 प्रति लीटर की बढ़ोतरी के बाद, कई शहरों में पेट्रोल की कीमतें अब ₹100 के पार चली गई हैं। इस मूल्य वृद्धि का सीधा असर आम लोगों की जेब पर पड़ रहा है। आइए, नई कीमतों, इस बढ़ोतरी के पीछे के कारणों और इसके समग्र प्रभाव पर एक नज़र डालते हैं।
प्रमुख शहरों में पेट्रोल की नई कीमतें
कीमतों में बढ़ोतरी के बाद, विभिन्न शहरों में पेट्रोल की दरें इस प्रकार हैं:

- नई दिल्ली: ₹97.77 प्रति लीटर
- मुंबई: ₹106.68 प्रति लीटर
- कोलकाता: ₹108.74 प्रति लीटर
- चेन्नई: ₹103.67 प्रति लीटर
- बेंगलुरु: ₹106.21 प्रति लीटर
- हैदराबाद: ₹110.89 प्रति लीटर
- पटना: ₹108.55 प्रति लीटर
- त्रिवेंद्रम: ₹110.58 प्रति लीटर
कुछ राज्यों—जैसे तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और केरल—में पेट्रोल की कीमतें ₹110 के आंकड़े को भी पार कर गई हैं।
एक पूरा टैंक भरवाने में कितना खर्च आएगा?
यदि आपकी छोटी कार में 35-लीटर का फ्यूल टैंक है, तो दिल्ली में इसे पूरी तरह भरवाने में लगभग ₹3,422 का खर्च आएगा। मुंबई में यह खर्च लगभग ₹3,733 होगा, जबकि कोलकाता में यह बढ़कर लगभग ₹3,806 तक पहुँच सकता है। 50-लीटर के टैंक वाली SUV के लिए, दिल्ली में खर्च लगभग ₹4,889 और मुंबई में ₹5,334 तक हो सकता है। वहीं, 12-लीटर की मोटरसाइकिल का टैंक भरवाने में दिल्ली में लगभग ₹1,173 और मुंबई में लगभग ₹1,280 का खर्च आएगा। यह स्पष्ट है कि हर शहर में वाहन मालिकों का मासिक फ्यूल बजट बढ़ गया है।
पेट्रोल की कीमतें क्यों बढ़ रही हैं?

भारत अपनी कच्चे तेल की ज़रूरतों का एक बड़ा हिस्सा विदेशों से आयात करता है। अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव, रुपये का अवमूल्यन और मौजूदा कर ढांचा—ये सभी पेट्रोल की कीमतों को प्रभावित करते हैं। केंद्र और राज्य, दोनों सरकारों द्वारा लगाए गए कर भी अंतिम खुदरा मूल्य तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। यही वजह है कि अलग-अलग राज्यों में पेट्रोल की कीमतें अलग-अलग होती हैं।
आम लोगों पर इसका क्या असर होगा?
पेट्रोल की बढ़ती कीमतों का असर सिर्फ़ गाड़ी मालिकों पर ही नहीं पड़ता; बल्कि, ट्रांसपोर्टेशन का खर्च बढ़ने से सब्ज़ियों, दूध और रोज़मर्रा की दूसरी ज़रूरी चीज़ों की कीमतें भी बढ़ सकती हैं। दफ़्तर जाने वालों का महीने का खर्च बढ़ सकता है, और ऑटो-रिक्शा या कैब का किराया भी महंगा हो सकता है। नतीजतन, लोग अब कारपूलिंग, पब्लिक ट्रांसपोर्ट और ईंधन बचाने के उपायों की तरफ़ ध्यान दे रहे हैं।













