बीजिंग से लौटने से पहले अमेरिकी राष्ट्रपति ने ऐसा बयान दे दिया, जिसने पूरी दुनिया की राजनीति में नई बहस छेड़ दी। डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया कि चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने अमेरिका को “गिरता हुआ देश” बताया था लेकिन निशाना ट्रंप नहीं, बल्कि जो बाइडेन थे। अमेरिका-चीन रिश्तों को लेकर चल रही तनातनी के बीच यह बयान सिर्फ राजनीतिक तंज नहीं माना जा रहा, बल्कि इसके पीछे बड़ी कूटनीतिक रणनीति भी देखी जा रही है। ट्रंप ने अपनी सोशल मीडिया पोस्ट में साफ कहा कि अगर अमेरिका कमजोर हुआ था, तो उसकी वजह बाइडेन प्रशासन की नीतियां थीं। वहीं चीन ने पूरी तस्वीर कुछ अलग अंदाज में पेश की है। ऐसे में सवाल उठ रहा है आखिर बीजिंग में बंद कमरों के अंदर क्या बातचीत हुई?
Trump Xi Meeting में आखिर हुआ क्या?
Donald Trump अपने बीजिंग दौरे के आखिरी दिन काफी आक्रामक अंदाज में नजर आए। उन्होंने कहा कि Xi Jinping ने अमेरिका के “Declining Nation” बनने की बात कही थी, लेकिन उसका इशारा सीधे तौर पर Joe Biden की सरकार की तरफ था। ट्रंप ने दावा किया कि बाइडेन के कार्यकाल में अमेरिका ने ओपन बॉर्डर, खराब ट्रेड डील्स, बढ़ते अपराध और आर्थिक दबाव जैसी समस्याएं झेली। उन्होंने यहां तक कहा कि “देश को अपार नुकसान हुआ।” दिलचस्प बात यह रही कि ट्रंप ने शी जिनपिंग की बात से सहमति भी जताई और कहा कि “दो साल पहले अमेरिका सच में गिरावट में था।”
चीन ने Thucydides Trap का जिक्र क्यों किया?

बीजिंग में हुई बातचीत के दौरान शी जिनपिंग ने एक अहम शब्द इस्तेमाल किया Thucydides Trapयह अंतरराष्ट्रीय राजनीति की वह थ्योरी है जिसमें कहा जाता है कि जब कोई नई ताकत तेजी से उभरती है और पुरानी महाशक्ति खुद को खतरे में महसूस करती है, तो टकराव लगभग तय हो जाता है। China का इशारा साफ था अगर अमेरिका और चीन अपने मतभेद सही तरीके से नहीं संभालते, तो दुनिया दो महाशक्तियों के बड़े संघर्ष की तरफ बढ़ सकती है।
ट्रंप ने क्यों गिनाईं अपनी सफलताएं?
ट्रंप ने अपने बयान में सिर्फ बाइडेन पर हमला नहीं किया, बल्कि अपनी सरकार की उपलब्धियां भी जमकर गिनाईं। उन्होंने कहा कि उनके 16 महीनों के कार्यकाल में अमेरिका ने रिकॉर्ड स्टॉक मार्केट, मजबूत नौकरी बाजार और भारी विदेशी निवेश देखा। ट्रंप ने यह भी दावा किया कि अमेरिका फिर से दुनिया की सबसे मजबूत आर्थिक ताकत बन रहा है। उनकी पोस्ट का बड़ा हिस्सा घरेलू राजनीति को ध्यान में रखकर लिखा गया दिखा। खासकर इमिग्रेशन, DEI policies और जेंडर मुद्दों पर उन्होंने बाइडेन प्रशासन को सीधे घेरा। यानी बीजिंग यात्रा सिर्फ विदेश नीति नहीं, अमेरिकी चुनावी राजनीति का मंच भी बन गई।
Taiwan और Iran पर अब भी टकराव कायम
भले ही ट्रंप ने अमेरिका-चीन रिश्तों को बेहतर होता हुआ बताया हो, लेकिन असलियत इतनी आसान नहीं दिखती। Taiwan को लेकर दोनों देशों के बीच तनाव अभी भी सबसे बड़ा मुद्दा बना हुआ है। चीनी अधिकारियों के मुताबिक शी जिनपिंग ने निजी बातचीत में चेतावनी दी कि अगर ताइवान मुद्दे को सही तरीके से नहीं संभाला गया, तो हालात “संघर्ष और टकराव” तक पहुंच सकते हैं। दूसरी तरफ Iran संकट पर भी दोनों देशों की सोच अलग नजर आई। अमेरिका चाहता है कि चीन ज्यादा सक्रिय भूमिका निभाए, लेकिन बीजिंग फिलहाल बहुत सतर्क दिखाई दे रहा है।
अमेरिका चीन रिश्तों की असली तस्वीर क्या है?
ऊपर से दोनों देश रिश्ते सुधारने की बातें कर रहे हैं, लेकिन अंदरखाने अविश्वास अब भी साफ नजर आता है। अमेरिका चीन पर फेंटेनिल केमिकल्स रोकने का दबाव बना रहा है, जबकि चीन अमेरिका की इंडो-पैसिफिक रणनीति और ताइवान समर्थन को लेकर असहज है। यानी कैमरों के सामने मुस्कान जरूर दिख रही है, लेकिन दुनिया की दो सबसे बड़ी ताकतों के बीच खींचतान अभी खत्म नहीं हुई।














