अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump का बीजिंग दौरा दुनिया भर में चर्चा का विषय बन गया है। 14 मई 2026 को चीन के राष्ट्रपति Xi Jinping ने ग्रेट हॉल ऑफ द पीपल में ट्रंप का भव्य स्वागत किया। रेड कार्पेट, सैन्य बैंड और बच्चों के हाथों में झंडों के बीच दोनों नेताओं की मुलाकात ने वैश्विक राजनीति में नया संदेश दिया।
ताइवान पर चीन की सख्त चेतावनी

बैठक में ताइवान सबसे संवेदनशील मुद्दा रहा। शी ने साफ कहा कि ताइवान के मामले में गलत कदम अमेरिका-चीन रिश्तों को खतरनाक स्थिति में डाल सकते हैं और टकराव की संभावना बढ़ सकती है। उन्होंने इस मुद्दे को दोनों देशों के रिश्तों का सबसे अहम मुद्दा बताया। वहीं ट्रंप ने शी को ‘महान नेता’ बताया और मजबूत ट्रेड रिश्तों की अहमियत दोहराई।
व्यापार और रेयर अर्थ पर बड़ी बातचीत
ट्रंप ने चीन से अमेरिकी कंपनियों के लिए बाजार खोलने की मांग की। उन्होंने संयुक्त व्यापार बोर्ड बनाने का प्रस्ताव भी रखा ताकि दोनों देशों के बीच व्यापारिक विवाद कम हो सकें। बैठक में रेयर अर्थ मिनरल्स भी बड़ा मुद्दा रहे। चीन इन मिनरल्स का सबसे बड़ा सप्लायर है, जिनका इस्तेमाल iPhone, AI चिप्स और F-35 फाइटर जेट्स में होता है।
एलन मस्क और टेक दिग्गज भी पहुंचे
इस हाई-प्रोफाइल मीटिंग में Elon Musk और Jensen Huang जैसे बड़े टेक लीडर्स भी शामिल हुए। इससे साफ संकेत मिला कि अमेरिका-चीन टेक और सेमीकंडक्टर सहयोग पर भी गंभीरता से काम कर रहे हैं।
ईरान युद्ध पर अमेरिका का बड़ा बयान
ट्रंप और उनके विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने ईरान युद्ध को वैश्विक अस्थिरता का बड़ा कारण बताया। उन्होंने बीजिंग में बताया कि यह चीन के हित में है कि ईरान विवाद का समाधान हो और अमेरिका की रणनीति के साथ सहयोग करे।
चीन लगातार खरीद रहा है सोना
बीजिंग दौरे के बीच यह भी ध्यान देने योग्य है कि चीन ने अप्रैल 2026 में अकेले 8 टन सोना खरीदा। पीपुल्स बैंक ऑफ़ चाइना के अनुसार, चीन के गोल्ड रिजर्व अब 7 करोड़ 28 लाख ट्रॉय औंस तक पहुंच गए हैं। विशेषज्ञ मानते हैं कि इसका उद्देश्य अमेरिकी डॉलर पर निर्भरता कम करना और आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
टेम्पल ऑफ हेवन का सांस्कृतिक दौरा
दोपहर में दोनों नेता टेम्पल ऑफ हेवन भी पहुंचे। यह यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज साइट प्राचीन समय में सम्राटों द्वारा फसल की समृद्धि के लिए पूजा का स्थल थी। इस दौरे को कूटनीतिक संबंधों के साथ सांस्कृतिक कनेक्ट मजबूत करने की कोशिश के तौर पर देखा गया।
ट्रंप का यह चीन दौरा सिर्फ एक औपचारिक मुलाकात नहीं बल्कि ताइवान, व्यापार, टेक्नोलॉजी, ईरान और वैश्विक अर्थव्यवस्था जैसे बड़े मुद्दों पर भविष्य की रणनीति तय करने वाला अहम कदम माना जा रहा है। आने वाले समय में अमेरिका-चीन संबंध दुनिया की राजनीति और अर्थव्यवस्था की दिशा तय कर सकते हैं।













