यशोदा कृष्ण सबसे महंगी पेंटिंग: जब भी भारतीय कला की बात होती है तो अपने आप कुछ विशेष कलाकारों का नाम सामने आ जाता है। उन्हीं में से एक हैं राजा रवि वर्मा, राजा रवि वर्मा वे कलाकार है जिन्होंने देवी देवताओं को पहली बार जीवंत और मानवीय रूप में उतारा। उनकी बनाई तस्वीर केवल रंग और कैनवस नहीं बल्कि भारतीय संस्कृति और आस्था का संगम है।
हाल ही में उनकी एक पेंटिंग 100 साल बाद भी 167 करोड रुपए में बिकी है। आखिर क्या है उनकी पेंटिंग की खासियत? क्या यह सिर्फ एक महंगी कला है या इसके पीछे कोई कहानी छुपी है? यशोदा कृष्ण सबसे महंगी पेंटिंग जिसने वर्ल्ड की सबसे महंगी पेंटिंग का रिकॉर्ड तोड़ दिया है, यह पेंटिंग भारतीय संस्कृति की गहराई को दिखाती है। दूसरी तरफ यह साबित करती है कि कला समय के साथ और भी ज्यादा कीमती हो जाती है।
हालांकि पेंटिंग की बिक्री के बाद सोशल मीडिया पर इससे जुड़ी कई पोस्ट वायरल हो रही हैं और हर कोई यह जानना चाहता है कि आखिर कौन थे वह कलाकार जिसने इस जादुई पेंटिंग को बनाया और क्यों यह पेंटिंग इतनी महंगी बिकी है?
यशोदा कृष्ण सबसे महंगी पेंटिंग के कलाकार राजा रवि वर्मा कौन थे?
राजा रवि वर्मा भारत के सबसे प्रसिद्ध और प्रभावशाली चित्रकारों में से एक गिने जाते हैं। इनका जन्म केरल राज्य के त्रवनकोर राजघराने में हुआ। इन्होंने भारतीय पौराणिक कथाओं को यूरोपियन पेंटिंग तकनीक के साथ जोड़कर एक नई शैली विकसित की। सबसे खास बात यह थी कि ये वही व्यक्ति हैं जिन्होंने देवी देवताओं को मानवीय रूप में चित्रित किया ताकि लोग उनसे जुड़ सकें।
राजा रवि वर्मा ही वह पहले व्यक्ति हैं जिन्होंने 1994 में प्रिंटिंग प्रेस शुरू की और पेंटिंग्स की कॉपियां घर-घर तक पहुंचने लगीं। राजा रवि वर्मा की कुछ प्रसिद्ध पेंटिंग शकुंतला, दमयंती, सरस्वती, नायर लेडी, गैलेक्सी ऑफ म्यूजिशियन आज भी सर्वश्रेष्ठ कला कृतियों में गिनी जाती हैं।

यशोदा-कृष्ण की पेंटिंग की क्या खासियत है?
यशोदा कृष्ण सबसे महंगी पेंटिंग 1890 के दशक में बनाई गई थी। यह वह समय था जब राजा रवि वर्मा का करियर अपने उच्चतम पर था। इस पेंटिंग में राजा रवि वर्मा ने कृष्ण और उनकी माता यशोदा के बीच भावनात्मक रिश्ता दिखाया है। यह पेंटिंग कृष्ण की मासूमियत को जीवंत करती हुई प्रतीत होती है और यशोदा के चेहरे पर भाव पूर्ण स्नेह के हैं। इस पेंटिंग में यूरोपीय तकनीक का इस्तेमाल किया गया है।
परफेक्ट कलर कॉन्बिनेशन, लाइट, शेड, डिटेलिंग काफी अद्भुत है। यह पेंटिंग केवल धार्मिक नहीं बल्कि मानवीय भावनाओं का चित्रण भी माना जाता है। भारत में इस पेंटिंग को भारतीय मोनालिसा पेंटिंग भी माना जाता है, क्योंकि पेंटिंग कई प्रकार के भावों का वर्णन करती है।

यशोदा कृष्ण सबसे महंगी पेंटिंग किसने खरीदी है?
यशोदा कृष्ण कि यह अनूठी पेंटिंग खरीदने वाली भारत के वैक्सीन उद्योगपति हैं। जी हां, यह पेंटिंग साइरस पूनावाला ने खरीदी है जो सिरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया के संस्थापक हैं। यह पेंटिंग 167.2 करोड रुपए में बिकी जो अब तक की सबसे महंगी भारतीय पेंटिंग बताई जाती है। साइरस पूनावाला ने इस पेंटिंग को खरीद कर इसे कोई निजी संपत्ति नहीं बनाया है बल्कि उन्होंने कहा है कि यह राष्ट्रीय धरोहर को सुरक्षित रखने की जिम्मेदारी है। वह अपने आर्ट म्यूजियम में इसे समय-समय पर जनता के लिए एग्जीबिशन में भी लगाएंगे ताकि लोग आकर देख सके।
यशोदा कृष्ण की पेंटिंग ने कैसे बनाया रिकॉर्ड ?
राजा रवि वर्मा द्वारा बनाई गई यशोदा कृष्ण सबसे महंगी पेंटिंग अब तक की सबसे महंगी भारतीय पेंटिंग बन चुकी है। इस पेंटिंग ने एम एफ हुसैन की पेंटिंग रिकॉर्ड को भी तोड़ दिया है। पेंटिंग में 167.1 करोड रुपए का मूल्य जीता है, जिसकी वजह से अब भारतीय कला को वैश्विक वैल्यू मिली है। इससे राजा रवि वर्मा की कलाकृतियां लाइमलाइट में आई हैं। यह घटना भारतीय कला के लिए काफी महत्वपूर्ण घटना मानी जा रही है क्योंकि आने वाले समय में भारतीय कलाकृतियों की मांग बढ़ेगी।
राजा रवि वर्मा की यशोदा कृष्ण सबसे महंगी पेंटिंग पेंटिंग केवल एक कला मात्र नहीं बल्कि यह भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिक भावनाओं का जीवंत चित्रण है। इस पेंटिंग की कीमत ने इसे सबसे चर्चित पेंटिंग जरूर बना दिया है परंतु इसकी असली कीमत इसके भाव और अध्यात्म है।
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