बेंगलुरु की सड़कों पर जब ज्यादातर लोग नींद में होते हैं, तब शहर के बीचों-बीच कुछ ऐसा हुआ जिसने हर किसी को सोचने पर मजबूर कर दिया। एमजी रोड के अनिल कुंबले सर्कल पर रात करीब 2 से 3 बजे के बीच एक लग्ज़री लेम्बोर्गिनी कार ने जिस तरह से ड्रिफ्ट और डोनट्स किए, वो सिर्फ एक शो ऑफ नहीं था बल्कि खुलेआम कानून को चुनौती देने जैसा था। सुनसान रात को चुना गया, लेकिन जगह ऐसी थी जहां कभी भी कोई भी गुजर सकता था।
बेंगलुरु लेम्बोर्गिनी स्टंट वायरल वीडियो ने खोली पूरी कहानी
इस पूरी घटना का वीडियो जैसे ही सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, लोगों का गुस्सा फूट पड़ा। वीडियो में साफ दिख रहा था कि कार KA 05 NR 0009 नंबर प्लेट के साथ बार-बार स्टंट कर रही है। एक जागरूक नागरिक ने बिना देर किए इसे बेंगलुरु पुलिस तक पहुंचाया और बताया कि ये सब एक पब्लिक जंक्शन पर हो रहा था, जहां दूसरे वाहन भी मौजूद थे।
Video from last night in Bengaluru. Lamborghini KA 05 NR 0009 seen repeatedly doing donuts at a public junction under a flyover while other vehicles were present, posing a safety risk.@blrcitytraffic @BlrCityPolice please look into this and take action if required. pic.twitter.com/UuOHXljE5i
— CitizenReportIN (@CitizenReprt) March 21, 2026
पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए तुरंत जवाब दिया और डिटेल्स मांगीं। लेकिन इसी बीच एक और बड़ा सवाल उठ गया कुछ लोगों ने mParivahan पर चेक करके दावा किया कि शायद ये गाड़ी रजिस्टर्ड ही नहीं है। अगर ये सच है, तो मामला सिर्फ लापरवाही का नहीं, बल्कि सीधा कानून तोड़ने का बन जाता है।
FIR दर्ज, लेकिन क्या इतना काफी है?
मामले ने तूल तब पकड़ा जब एक पत्रकार ने पुष्टि की कि इस पर FIR दर्ज हो चुकी है। उन्होंने एक लाइन में पूरी बहस का निचोड़ दे दिया—“पैसा सुपरकार खरीद सकता है, लेकिन कानून से छूट नहीं।”
लेकिन असली सवाल यहीं से शुरू होता है क्या सिर्फ FIR दर्ज होना काफी है? या फिर ऐसे मामलों में कड़ी सजा और उदाहरण पेश करना जरूरी है ताकि कोई दोबारा ऐसी हरकत करने की हिम्मत न करे?
सोशल मीडिया पर गुस्सा और निराशा दोनों
इस घटना के बाद सोशल मीडिया पर लोगों की मिली-जुली प्रतिक्रिया देखने को मिली। कई लोगों ने इसे सीधा-सीधा क्रिमिनल एक्ट बताया। उनका कहना था कि पब्लिक रोड कोई रेस ट्रैक नहीं होती और ऐसे स्टंट किसी की जान भी ले सकते हैं। उन्होंने भारी जुर्माना, लाइसेंस सस्पेंशन और सख्त कार्रवाई की मांग की।
वहीं कुछ लोग सिस्टम पर ही सवाल उठाते नजर आए। उनका कहना था कि जब मामला अमीरों और महंगी गाड़ियों का होता है, तो अक्सर कानून का रवैया नरम हो जाता है। कुछ यूज़र्स ने तो ये तक कह दिया कि “सबको पता है, आखिर में कुछ खास नहीं होने वाला।”
पैसा क्लास नहीं खरीद सकता
कुछ कमेंट्स बेहद सीधे और सटीक थे। एक यूज़र ने सिर्फ इतना लिखा“पैसा क्लास नहीं खरीद सकता।” वहीं एक और ने शक जताया कि ड्राइवर किसी बड़े रसूख वाले परिवार से हो सकता है शायद कोई बिल्डर या नेता का बेटा।
हालांकि एक अलग राय भी सामने आई, जहां एक व्यक्ति ने कहा कि अगर किसी को नुकसान नहीं हुआ तो इतना हंगामा क्यों? लेकिन यही सोच सबसे ज्यादा खतरनाक मानी जाती है, क्योंकि हादसे पहले नहीं बताते—वो अचानक होते हैं।
जब लग्ज़री कार बनी मौत की वजह
भारत में ये पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी कई बार महंगी गाड़ियों की लापरवाही ने लोगों की जान ली है। दिल्ली का BMW केस हो, अहमदाबाद का जैगुआर हादसा या फिर पुणे का चर्चित पोर्शे केस हर बार एक जैसी कहानी सामने आती है: तेज रफ्तार, लापरवाही और उसके बाद ढीली कार्रवाई।
नोएडा, मुंबई, कानपुर और जयपुर जैसे शहरों में भी हाल के सालों में ऐसे हादसे सामने आए हैं, जहां लग्ज़री कारें सड़क पर कहर बन गईं।
आखिर कब बदलेगा सिस्टम?
बेंगलुरु की इस घटना ने एक बार फिर वही पुराना लेकिन जरूरी सवाल खड़ा कर दिया है क्या कानून सबके लिए बराबर है? या फिर पैसे और रसूख के आगे नियम सिर्फ कागजों तक सीमित रह जाते हैं?
अगर ऐसे मामलों में समय रहते सख्ती नहीं दिखाई गई, तो ये “स्टंट” किसी दिन बड़ी त्रासदी में बदल सकते हैं। जरूरत सिर्फ FIR की नहीं, बल्कि ऐसे एक्शन की है जो साफ संदेश दे सड़क पर कानून सबसे ऊपर है, चाहे गाड़ी कितनी भी महंगी क्यों न हो।
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