सोचिए, आपकी smartwatch कभी चार्ज ही न करनी पड़े… सुनने में थोड़ा अजीब लगता है, लेकिन अब ये सच बनने के करीब है। हाल ही में आई रिसर्च के मुताबिक बिना बैटरी वाली smartwatch पर काम तेजी से चल रहा है, जो इंसान के शरीर की गर्मी से ही चल सकेगी।
सिओल नेशनल यूनिवर्सिटी और दूसरे रिसर्च इंस्टीट्यूट्स के वैज्ञानिक ऐसी टेक्नोलॉजी बना रहे हैं, जो body heat को बिजली में बदल सकती है। यानी अब चार्जर ढूंढने की झंझट खत्म हो सकती है।
बिना बैटरी वाली smartwatch कैसे काम करेगी?
यह टेक्नोलॉजी एक खास सिस्टम पर आधारित है, जिसे thermoelectric generator (थर्मोइलेक्ट्रिक जनरेटर) कहा जाता है।
आसान भाषा में समझें तो शरीर की गर्मी और बाहर के तापमान में फर्क होता है, और इसी फर्क को ऊर्जा में बदल दिया जाता है, जो smartwatch को चलाने में काम आती है, इसी पूरी प्रक्रिया को energy conversion (एनर्जी कन्वर्जन) कहा जाता है।
पहले दिक्कत यह थी कि heat (गर्मी) डिवाइस से निकलकर बर्बाद हो जाती थी, लेकिन अब वैज्ञानिकों ने इसका भी हल निकाल लिया है।
बिना बैटरी वाली smartwatch में नई टेक्नोलॉजी क्या खास है?
नई रिसर्च में जो सबसे बड़ा बदलाव आया है, वो है इसका डिजाइन और मटेरियल।
- इसमें 3D pillar structure (थ्री डायमेंशनल पिलर स्ट्रक्चर) की जगह फ्लैट डिजाइन दिया गया है
- silicon base (सिलिकॉन बेस) heat को बाहर निकलने से रोकता है
- copper nanoparticles (कॉपर नैनोपार्टिकल्स) heat को सही दिशा में भेजते हैं
इससे एक सही temperature gradient (टेम्परेचर ग्रेडिएंट) बनता है, जो बिजली पैदा करने के लिए जरूरी होता है।
रिसर्च के मुताबिक, इस नई टेक्नोलॉजी से heat loss करीब 70% तक कम हो गया है, जो अपने आप में बड़ा गेम-चेंजर है।
बिना बैटरी वाली smartwatch wearable devices का भविष्य कैसे बदल सकती है?
अगर यह टेक्नोलॉजी सफल होती है, तो wearable devices की दुनिया पूरी तरह बदल सकती है, क्योंकि इससे बार-बार चार्ज करने की जरूरत खत्म हो जाएगी, बैटरी खराब होने की चिंता नहीं रहेगी और डिवाइस की लाइफ लंबी होने के साथ maintenance भी कम होगा।
यानी जो लोग रोज smartwatch चार्ज करने से परेशान रहते हैं, उनके लिए यह एक बड़ी राहत होगी।
साथ ही, यह टेक्नोलॉजी flexible material (फ्लेक्सिबल मटेरियल) पर आधारित है, जिसे आसानी से अलग-अलग शेप और साइज में बनाया जा सकता है।
कब तक आएगी बिना बैटरी वाली Smartwatch?
फिलहाल यह टेक्नोलॉजी research stage (रिसर्च स्टेज) में है, यानी बाजार में आने में थोड़ा समय लग सकता है।
लेकिन अच्छी बात यह है कि इसे ink-based printing process (इंक बेस्ड प्रिंटिंग प्रोसेस) से बनाया जा सकता है, जिससे बड़े स्तर पर प्रोडक्शन आसान हो जाएगा।
मेरी नजर में, अगर कंपनियां इस टेक्नोलॉजी को सही तरीके से अपनाती हैं, तो आने वाले 2–3 साल में हम इसे मार्केट में देख सकते हैं।
यह सिर्फ टेक्नोलॉजी नहीं, एक बड़ा बदलाव है
सीधी बात कहूं तो, यह सिर्फ एक नई smartwatch नहीं है, यह सोच बदलने वाली टेक्नोलॉजी है।
आज हम हर चीज को चार्ज करते हैं, फोन, लैपटॉप, वॉच। लेकिन अगर डिवाइस खुद ही चलने लगे, तो टेक्नोलॉजी का मतलब ही बदल जाएगा।
हाँ, अभी इसे आम लोगों तक पहुंचने में समय लगेगा, लेकिन जिस तेजी से रिसर्च हो रही है, वह साफ इशारा करती है कि भविष्य self-powered devices (सेल्फ-पावर्ड डिवाइसेज) का ही है।
Final Take
बिना बैटरी वाली smartwatch अभी सपना लग सकती है, लेकिन सच यह है कि यह सपना अब हकीकत बनने के रास्ते पर है।
अगर यह टेक्नोलॉजी सफल होती है, तो आने वाले समय में “चार्जिंग” शब्द शायद हमारी जिंदगी से धीरे-धीरे गायब हो जाए।
और यह बदलाव जितना छोटा दिख रहा है, उतना है नहीं… यह पूरी टेक्नोलॉजी इंडस्ट्री को हिला सकता है।
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