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धुरंधर 2 फिक्शन या हकीकत: हाईजैक से माफिया एनकाउंटर, PM मोदी से लेकर राम मंदिर का विवाद, फिल्म नहीं असली घटनाओं और रियल ऑपरेशन की झलक!!

धुरंधर 2 फिक्शन या हकीकत

धुरंधर 2 फिक्शन या हकीकत: धुरंधर-द रिवेंज सिर्फ एक एक्शन फिल्म नहीं है। यह एक ऐसी लेयर्ड कहानी है जिसमें रियल घटनाओं, पॉलिटिक्स, अंडरवर्ल्ड, नेशनल सिक्योरिटी को मिलाकर एक ऐसा दमदार नेरेटिव बुना गया है जिसने दर्शकों को सीट पर बैठकर सोचने को मजबूर कर दिया है। दर्शक जब फिल्म देखने बैठते हैं तब एंटरटेनमेंट की उम्मीद से बैठते हैं, लेकिन इस फिल्म ने एंटरटेनमेंट के साथ-साथ दर्शकों को कुछ ऐसे गहरे राज भी बताए हैं, जो शायद दुनियाभर की जनता को पता ही नहीं थे।

 बता दें, आदित्य धर ने इस फिल्म को बनाने के लिए गहरी रिसर्च की है। Raw से कई सारे फैक्ट इकट्ठा किए हैं। भारत में हुई हर एक घटना और उसके पीछे हुए विवाद को लेकर इस फिल्म की कहानी गढ़ी गई है। इसलिए फिल्म जितनी एंटरटेनिंग है उतनी ही विवादों में घिर गई है। इसकी असली वजह है इसका रियल घटनाओं से कनेक्टेड होना। इसी के चलते अब हर जगह सवाल है कि धुरंधर 2 फिक्शन या हकीकत है? जी हां, फिल्म की हर एक घटना किसी रियल घटना से प्रेरित है। हालांकि फिल्म फिक्शन कही जा रही है, परंतु फिक्शन की आड़ में फिल्म की हर परत असली घटना से जुड़ी हुई है।

धुरंधर 2 फिक्शन या हकीकत 2धुरंधर 2 फिक्शन या हकीकत आइये एक-एक परत से समझते हैं

हाईजैक से शुरू होता है पूरा गेम

फिल्म की शुरुआत ही IC 814 कंधार हाईजैकिंग से होती है, जो भारत के इतिहास की सबसे खौफनाक घटनाओं में से एक है। 1999 में एक विमान को आतंकियों ने हाईजैक कर लिया और यात्रियों को छुड़ाने के बदले आतंकियों को छोड़ना पड़ा। फिल्म में एक अधिकारी सीधे विमान में जाकर यात्रियों से बात करता है। इस दौरान उसके चेहरे पर ‘भारत माता की जय’ ना कह पा सकने का दर्द साफ दिखाई देता है और यहीं से रिवेंज का असली एंगल शुरू होता है।

अजीत डोभाल और RAW ऑपरेशन

फिल्म का सबसे मजबूत किरदार अजय सान्याल है जो सीधे तौर पर अजीत डोभाल के किरदार से इंस्पायर है। फिल्म में दिखाया गया है कि कैसे अजय सान्याल सरकार की कमजोर नीतियों से नाराज हैं और वह चाहते हैं कि कोई ऐसा नेता आए जो दुश्मन के घर में घुसकर जवाब देने की परमिशन दे दे। अजीत डोभाल भारत के ऐसे ही बड़े खुफिया दिमाग में से एक गिने जाते हैं। इन्होंने कई अंडरकवर ऑपरेशन सफलतापूर्वक पूरे किए हैं। फ़िल्म भी यही पुराना भारत VS नया भारत का मैसेज देती है।

मोदी और नया भारत का कनेक्शन

फिल्म में कई ऐसे डायलॉग है जो सीधे तौर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नई भारत की सोच को दिखाते हैं। कई ऐसे सीन आते हैं जो सीधा नरेंद्र मोदी के द्वारा लिए गए एक्शन की ओर इशारा करते हैं। डिमॉनेटाइजेशन से लेकर घर में घुसकर मारेंगे जैसे नॉरेटिव सीधा राजनीतिक भाषण से लिए गए हैं। मतलब साफ है कि यह फिल्म पॉलिटिकल अंडरटोन लेकर चल रही है।

राम मंदिर और आईडियोलॉजी की एक और लेयर

फिल्म में सीधे तौर पर राम मंदिर नहीं दिखाया गया है लेकिन किसी सांस्कृतिक धरोहर को लेकर ऐतिहासिक फैसला, धार्मिक पहचान, संस्कृति जैसे शब्दों को इस्तेमाल किया गया है। इससे साफ पता चलता है कि यह राम मंदिर और सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले की ओर इशारा कर रही है। इसे इमोशनल नेशनलिस्ट नेरेटिव भी कहा जा सकता है।

अतीक अहमद जैसे माफिया का अंत

फिल्म में सबसे शॉकिंग हिस्सा है अज्ञात लोगों द्वारा माफिया को खत्म किया जाना और यहीं दर्शक इसे अतीक अहमद के केस से जोड़कर देखते हैं। यूपी का बाहुबली अतीक अहमद जो रंगदारी, किडनैपिंग स्मगलिंग जैसे केसेस से जुड़ा था। जिसे गिरफ्तार कर लिया गया और सार्वजनिक रूप से गोली मारकर हत्या की गई। फिल्म में भी यही सब दिखाया गया है। जहां दिखाया जाता हैं कि सिस्टम के बाद एक अदृश्य ताकत काम कर रही है। मतलब न्याय कोर्ट में नहीं अब सड़कों पर भी होगा।

कराची गैंग वार और आतंकवाद

फिल्म का एक बहुत बड़ा हिस्सा पाकिस्तान के कराची और उसके अंडरवर्ल्ड पर आधारित है। यह कहानी ल्यारी गैंग, आतंक नेटवर्क और इंटरनेशनल कनेक्शन को जोड़ती है। असल में फिल्म की कहानी कई रियल घटनाओं पर बुनी गई है। संसद हमला, मुंबई अटैक, गैंग वॉर यह सब असली घटनाएं हैं। इसलिए एक्सपर्ट का कहना है कि इस फिल्म में असली घटनाओं को ड्रामा का रूप दे दिया गया है।

सच, प्रोपेगेंडा या मास्टर स्टोरी ? मतलब धुरंधर 2 फिक्शन या हकीकत

धुरंधर 2 असल में सच पर आधारित कहानी है, जिसमें कई सारे प्रोपेगेंडा को उजागर किया गया है। आदित्य धर की यह मास्टर स्टोरी लोगों को खासा पसंद आ रही है। हाईजैक, अजीत डोभाल का किरदार,PM मोदी का नया भारत, माफिया किलिंग सब कुछ मिलाकर एक मसालेदार ड्रामा स्टोरी तैयार की करने की कोशिश की गई है। परंतु इस ड्रामे में भी भी दर्शक असली कनेक्शन खोद कर निकाल रहे हैं।

धुरंधर 2 साधारण फिल्म नहीं है। असल में यह एक ऐसी फिल्म है जो दर्शकों को सोचने पर मजबूर कर देती है कि क्या वाकई में हमें जो दिखता वही सच है? या सच कुछ और है?धुरंधर 2 फिक्शन या हकीकत का जवाब यही है कि यह फिल्म सच दिखाती जरूर है पर पूरा सच बात बताएं बिना।

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