देशभर के लाखों पेंशनर्स एक बार फिर अपनी न्यूनतम पेंशन बढ़ाने की मांग को लेकर सड़कों पर उतर आए हैं। कर्मचारी पेंशन योजना 1995 (EPS-95) से जुड़े पेंशनर्स का कहना है कि मौजूदा ₹1000 मासिक पेंशन में गुजारा करना लगभग नामुमकिन हो गया है। इसी मांग को लेकर पेंशनर्स ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर तीन दिन का बड़ा प्रदर्शन शुरू किया है, जिसमें अलग-अलग राज्यों से बड़ी संख्या में लोग शामिल हो रहे हैं।
EPS-95 नेशनल एगिटेशन कमेटी के मुताबिक 9, 10 और 11 मार्च को जंतर-मंतर पर “करो या मरो” आंदोलन किया जा रहा है। इस प्रदर्शन में देशभर से आए पेंशनर्स अपनी न्यूनतम मासिक पेंशन को ₹1000 से बढ़ाकर ₹7500 करने की मांग उठा रहे हैं। आंदोलन में कई राजनीतिक दलों के सांसदों के समर्थन की भी उम्मीद जताई जा रही है।
क्यों बढ़ रही है ₹7500 पेंशन की मांग
पेंशनर्स का कहना है कि वर्तमान में EPS-95 के तहत मिलने वाली न्यूनतम पेंशन ₹1000 प्रति माह है, जिसे साल 2014 में तय किया गया था। लेकिन पिछले एक दशक में महंगाई काफी बढ़ चुकी है और इस रकम में रोजमर्रा का खर्च चलाना बेहद मुश्किल हो गया है।
पेंशनर्स का दावा है कि लाखों कर्मचारियों ने 30 से 35 साल तक EPFO में योगदान दिया है, लेकिन उन्हें औसतन करीब ₹1171 मासिक पेंशन ही मिलती है। उनका कहना है कि इतनी कम पेंशन में दवाइयां, खाने-पीने का खर्च और अन्य जरूरतें पूरी करना मुश्किल हो जाता है।
कमेटी का यह भी कहना है कि कई सरकारी योजनाओं में बिना योगदान के भी लोगों को पेंशन मिल जाती है, जबकि EPS-95 के तहत वर्षों तक योगदान देने के बावजूद कर्मचारियों को बहुत कम पेंशन दी जा रही है।
पेंशनर्स की मुख्य मांगें क्या हैं
जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे पेंशनर्स की मुख्य मांग है कि न्यूनतम मासिक पेंशन को बढ़ाकर ₹7500 किया जाए। इसके साथ ही पेंशनर्स महंगाई भत्ता (DA), परिवार पेंशन और पेंशनर तथा उनके जीवनसाथी के लिए मुफ्त चिकित्सा सुविधा की भी मांग कर रहे हैं।
इसके अलावा एक बड़ी मांग यह भी है कि सुप्रीम कोर्ट के 4 नवंबर 2022 के फैसले के अनुसार सभी पात्र कर्मचारियों को उच्च पेंशन का लाभ दिया जाए। पेंशनर्स का कहना है कि कोर्ट के फैसले के बावजूद अभी तक कई कर्मचारियों को इसका पूरा फायदा नहीं मिल पाया है।
नौ साल से चल रही है पेंशन बढ़ाने की मांग

EPS-95 नेशनल एगिटेशन कमेटी के अनुसार करीब 81 लाख पेंशनर्स पिछले नौ साल से न्यूनतम पेंशन बढ़ाने की मांग कर रहे हैं। इन पेंशनर्स में केंद्र और राज्य सरकार के सार्वजनिक उपक्रमों, सहकारी संस्थाओं, निजी क्षेत्र, मीडिया संस्थानों और मिलों में काम कर चुके पूर्व कर्मचारी शामिल हैं।
उनका कहना है कि उम्र के इस पड़ाव में बढ़ती महंगाई और स्वास्थ्य खर्च के कारण वर्तमान पेंशन से जीवन यापन करना बेहद कठिन हो गया है।
सरकार ने क्यों नहीं बढ़ाई पेंशन
पिछले साल दिसंबर में लोकसभा में भी EPS-95 पेंशन बढ़ाने को लेकर सवाल उठाए गए थे। इस पर श्रम मंत्रालय ने बताया कि कर्मचारी पेंशन योजना मुख्य रूप से नियोक्ता और सरकार के योगदान से चलती है। पेंशन का भुगतान इसी फंड से किया जाता है।
सरकार के मुताबिक फिलहाल इस पेंशन फंड में एक तरह की वित्तीय कमी यानी एक्ट्यूरियल डेफिसिट मौजूद है। इसी वजह से न्यूनतम पेंशन को ₹7500 तक बढ़ाना फिलहाल मुश्किल बताया जा रहा है।
केंद्र सरकार का यह भी कहना है कि ₹1000 की न्यूनतम पेंशन बनाए रखने के लिए पहले से ही अतिरिक्त बजटीय सहायता दी जा रही है।
क्या EPS-95 पेंशनर्स को मिल सकती है ₹7500 पेंशन
हालांकि पेंशनर्स लगातार सरकार पर दबाव बना रहे हैं और उनका आंदोलन भी तेज होता जा रहा है, लेकिन अभी तक न्यूनतम पेंशन बढ़ाने को लेकर कोई आधिकारिक मंजूरी नहीं दी गई है।
अब सबकी नजर सरकार के अगले फैसले पर टिकी है। अगर पेंशनर्स की मांगों पर सकारात्मक फैसला होता है तो देशभर के लाखों बुजुर्गों को बड़ी राहत मिल सकती है।
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