OPD में मरीजों का इलाज करेंगे और न ही कोई रूटीन ऑपरेशन करेंगे
भोपाल। मध्य प्रदेश के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में काम करने वाले रेजिडेंट डॉक्टर (Doctors strike) स्टाइपेंड रिवीजन का विरोध कर रहे हैं। इस वजह जूनियर डॉक्टर स्टाइपेंड रिवीजन को लेकर सोमवार सुबह 9 बजे से हड़ताल पर चले गए हैं। जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन (JDA) का कहना है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं हो जातीं, वे OPD में सर्विस नहीं देंगे। नतीजतन, OPD में आने वाले मरीजों को इलाज के लिए लंबा इंतजार करना पड़ सकता है।
JDA ने यह भी साफ किया कि वे सिर्फ गंभीर रूप से बीमार मरीजों के लिए ऑपरेटिंग थिएटर (OT) में सर्विस देंगे। इसका मतलब है कि राज्य भर के मेडिकल कॉलेजों में हर्निया और रॉड इंप्लांट जैसे रूटीन ऑपरेशन टाले जा सकते हैं। इसका सीधा असर इन बीमारियों से पीड़ित मरीजों पर पड़ेगा।
नया स्टाइपेंड अप्रैल 2025 से मिलना था
नया स्टाइपेंड अप्रैल 2025 से मिलना था, जो अभी भी पेंडिंग है। जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन (JDA) के मुताबिक, सरकारी आदेश के मुताबिक CPI-आधारित स्टाइपेंड रिवीजन 1 अप्रैल, 2025 से लागू होना था। इसे अभी तक लागू नहीं किया गया है। बार-बार कहने के बाद भी इस दिशा में कोई ठोस फैसला नहीं लिया गया है। इससे डॉक्टरों में गुस्सा बढ़ रहा है।
JDA की लीडरशिप में करीब 8,000 रेजिडेंट डॉक्टर, सीनियर रेजिडेंट और इंटर्न इस हड़ताल में हिस्सा ले रहे हैं। एक्सपर्ट्स का मानना है कि ये डॉक्टर किसी भी मेडिकल कॉलेज की रीढ़ माने जाते हैं। ये न सिर्फ मेडिकल कॉलेज का 70 परसेंट काम का बोझ उठाते हैं, बल्कि मरीजों के इलाज से लेकर उनकी मॉनिटरिंग तक की जिम्मेदारियां भी संभालते हैं। प्रदर्शन कर रहे डॉक्टरों ने सरकार से जल्द फैसला लेने की मांग की है।
ऑर्डर के बावजूद कोई बदलाव नहीं
JDA के डॉ. बृजेंद्र ने बताया कि मध्य प्रदेश सरकार के 7 जून, 2021 के ऑर्डर के मुताबिक, CPI-बेस्ड स्टाइपेंड रिविजन 1 अप्रैल, 2025 से लागू होना था। इसके बावजूद न तो बदला हुआ स्टाइपेंड लागू किया गया है और न ही अप्रैल 2025 से मिलने वाला एरियर दिया गया है। डॉक्टरों का कहना है कि इस बारे में सरकार और संबंधित डिपार्टमेंट को कई बार बताया जा चुका है, लेकिन अभी तक इस मसले का हल नहीं निकला है।
JDA के डॉ. बृजेंद्र ने बताया कि राज्य के सभी मेडिकल कॉलेजों के डीन और हेड ऑफ़ डिपार्टमेंट को एक मेमोरेंडम दिया गया है। इसमें साफ़ तौर पर लिखा है कि सभी रेजिडेंट डॉक्टर, सीनियर रेजिडेंट और इंटर्न सुबह 9 बजे से हड़ताल पर चले जाएँगे। इमरजेंसी सर्विस हमेशा की तरह चलती रहेंगी ताकि गंभीर मरीज़ों को कोई परेशानी न हो। इसके अलावा, वे आउटपेशेंट डिपार्टमेंट (OPD) समेत सभी इलेक्टिव सर्विस का बॉयकॉट करेंगे।

तीन दिन तक काली पट्टी बांधकर प्रोटेस्ट
जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन की लीडरशिप में डॉक्टरों ने शुक्रवार को राज्य भर के मेडिकल कॉलेजों में शांतिपूर्ण प्रोटेस्ट शुरू किया। वे पिछले तीन दिनों से काली पट्टी बांधकर काम कर रहे हैं। डॉक्टरों का कहना है कि उनका मकसद इस समस्या की ओर इंचार्जों का ध्यान खींचना है।
ऑर्डर लागू करने की मांग
जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन का कहना है कि उनका प्रोटेस्ट सिर्फ़ सरकार के पहले जारी ऑर्डर को लागू करने और पेंडिंग एरियर के पेमेंट के लिए है। अगर सरकार जल्द ही कोई फ़ैसला लेती है, तो हड़ताल खत्म कर दी जाएगी, लेकिन अगर उनकी मांगों को नज़रअंदाज़ किया गया, तो प्रोटेस्ट और तेज़ हो सकता है।
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दो साल पहले दो घंटे की हड़ताल, ऑर्डर जारी, लेकिन फायदे अभी भी बाकी
राज्य भर के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में जूनियर और रेजिडेंट डॉक्टरों का स्टाइपेंड बढ़ाने के लिए दो साल पहले नए ऑर्डर जारी किए गए थे। 13 मार्च, 2024 को जारी ऑर्डर के मुताबिक, जूनियर डॉक्टरों का स्टाइपेंड 3,000 रुपये तक और सीनियर रेजिडेंट डॉक्टरों का स्टाइपेंड 4,000 रुपये तक बढ़ाया गया था।
यह ऑर्डर पब्लिक हेल्थ एंड मेडिकल एजुकेशन डिपार्टमेंट ने जारी किया था। फायदे 1 अप्रैल, 2023 से लागू होने थे।
इससे पहले, जूनियर डॉक्टरों ने स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग को लेकर दो घंटे की सिंबॉलिक हड़ताल की थी। इस दौरान जूनियर डॉक्टरों ने काम बंद रखा था।
नवंबर 2022 में स्टाइपेंड बढ़ाया गया
सरकारी मेडिकल कॉलेजों से पोस्टग्रेजुएट डिग्री कर रहे मेडिकल स्टूडेंट्स (जूनियर डॉक्टरों) का स्टाइपेंड आखिरी बार नवंबर 2022 में बढ़ाया गया था। गौरतलब है कि जून 2021 में राज्य सरकार ने कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (CPI) के आधार पर हर साल जूनियर डॉक्टरों का स्टाइपेंड बढ़ाने का प्रावधान किया था।
जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन का कहना है कि स्टाइपेंड बढ़ाने का प्रावधान होने के बावजूद, अप्रैल 2022 के बजाय नवंबर 2022 में बढ़ोतरी की गई। इसके बाद नवंबर 2022 के बाद अप्रैल 2023 में कोई बढ़ोतरी नहीं की गई।













