आज के समय में पूरी दुनिया में सस्टेनेबल ट्रांसपोर्ट यानी पर्यावरण के अनुकूल परिवहन को तेजी से बढ़ावा दिया जा रहा है। पेट्रोल और डीजल से होने वाले प्रदूषण को कम करने के लिए नई-नई तकनीकों पर काम हो रहा है। इसी दिशा में अब सूरज की रोशनी से चलने वाले सोलर ट्रेलर भी सामने आने लगे हैं, जो बिना ईंधन के काम कर सकते हैं। इससे न सिर्फ खर्च कम होता है बल्कि पर्यावरण को भी काफी फायदा मिलता है।
हाल ही में इस क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि सामने आई है। ऑस्ट्रेलिया की कंपनी Protran Solutions ने सोलर ऊर्जा से चलने वाले एक रेफ्रिजरेटेड ट्रेलर के साथ लंबी दूरी का सफल परीक्षण किया। इस ट्रेलर ने Sydney से Brisbane तक 1,671 किलोमीटर का सफर तय किया और खास बात यह रही कि इस पूरे सफर के दौरान सामान को ठंडा रखने के लिए पेट्रोल या डीजल का बिल्कुल भी इस्तेमाल नहीं किया गया।
बिना डीजल के 32 घंटे तक ठंडा रहा सामान

आमतौर पर ट्रकों के पीछे लगे रेफ्रिजरेटेड कंटेनर को चलाने के लिए डीजल इंजन का इस्तेमाल किया जाता है। यह इंजन कंटेनर के अंदर तापमान को बनाए रखने के लिए लगातार चलता है, जिससे काफी ईंधन खर्च होता है और प्रदूषण भी बढ़ता है। लेकिन इस परीक्षण में जिस सिस्टम का इस्तेमाल किया गया, वह था Sunswap Endurance यूनिट। यह पूरी तरह से ट्रेलर की छत पर लगे सोलर पैनल और बैटरी सिस्टम पर निर्भर करता है। यह ट्रेलर लगातार 32 घंटे तक चलता रहा और इस दौरान कंटेनर के अंदर रखे सामान के लिए जरूरी तापमान भी पूरी तरह स्थिर बना रहा। सबसे दिलचस्प बात यह रही कि पूरे सफर में ट्रक के इंजन या किसी बाहरी बिजली स्रोत की मदद नहीं ली गई।
सफर के दौरान कितनी बिजली इस्तेमाल हुई

इस पूरे सफर के दौरान कुल 85.9 kWh बिजली का इस्तेमाल हुआ। इसमें से 58.9 kWh बिजली सोलर पैनलों से यानी सूरज की रोशनी से बनी, जो कुल ऊर्जा का लगभग 68% हिस्सा था। बाकी की करीब 27 kWh बिजली बैटरी से ली गई। सफर के दौरान बारिश भी हुई और ट्रेलर को रात में भी चलना पड़ा, जब सूरज की रोशनी उपलब्ध नहीं होती। इसके बावजूद जब यह यात्रा पूरी हुई, तब भी बैटरी में करीब 62% चार्ज बचा हुआ था। यह दिखाता है कि सोलर और बैटरी का यह कॉम्बिनेशन लंबे सफर के लिए भी काफी प्रभावी हो सकता है।
पर्यावरण और खर्च दोनों के लिए फायदेमंद
इस एक यात्रा से यह साफ हो गया कि यह तकनीक न सिर्फ पर्यावरण के लिए बल्कि आर्थिक रूप से भी काफी फायदेमंद साबित हो सकती है। इस पूरे सफर के दौरान करीब 64 लीटर डीजल की बचत हुई। इससे ईंधन का खर्च कम हुआ और साथ ही 172 किलोग्राम कार्बन उत्सर्जन भी कम हुआ। कंपनी के अनुसार, पारंपरिक डीजल वाले रेफ्रिजरेटेड कंटेनर की तुलना में इस तकनीक से ऑपरेटिंग खर्च करीब 81% तक कम हो सकता है। यानी यह तकनीक पर्यावरण और जेब दोनों के लिए बेहतर साबित हो सकती है।
-25°C तक तापमान बनाए रखने की क्षमता

इस सोलर आधारित सिस्टम की एक और बड़ी खासियत यह है कि यह कंटेनर के अंदर तापमान को -25°C तक बनाए रखने में सक्षम है। इसका मतलब है कि कंटेनर के अंदर रखे खाने-पीने के सामान, फल-सब्जियां या दवाइयां खराब हुए बिना लंबी दूरी तक सुरक्षित पहुंचाई जा सकती हैं। खास तौर पर उन कंपनियों के लिए यह तकनीक बहुत उपयोगी हो सकती है जो एक शहर से दूसरे शहर कोल्ड-चेन लॉजिस्टिक्स के जरिए सामान भेजती हैं। इसमें तापमान पर सटीक नियंत्रण रहता है और डीजल खत्म होने जैसी चिंता भी नहीं रहती।
दुनिया में बढ़ रहा सोलर ट्रेलर का इस्तेमाल
इस तकनीक का इस्तेमाल पहले ही कई देशों में शुरू हो चुका है। Sunswap Endurance सिस्टम को ब्रिटेन, फ्रांस, बेल्जियम, चिली और नीदरलैंड्स जैसे देशों में इस्तेमाल किया जा रहा है। अब यह तकनीक ऑस्ट्रेलिया के बाजार में भी तेजी से जगह बना रही है। ऑस्ट्रेलिया में मिली इस सफलता के बाद इसे दुनिया के अन्य देशों में भी बड़े पैमाने पर अपनाने की तैयारी की जा रही है। अगर ऐसा होता है तो आने वाले समय में सोलर ऊर्जा से चलने वाले ट्रेलर सस्टेनेबल ट्रांसपोर्ट का अहम हिस्सा बन सकते हैं। कुल मिलाकर देखा जाए तो यह तकनीक भविष्य के ट्रांसपोर्ट सिस्टम की दिशा दिखाती है, जहां कम खर्च, कम प्रदूषण और बेहतर ऊर्जा उपयोग तीनों को साथ लेकर आगे बढ़ा जा सकता है।

