विपक्ष ने किया सदन का वॉकआउट, कार्यवाही दो बार स्थगित हुई
भोपाल। विधानसभा के बजट सत्र (MP Budget Session) के नौंवे दिन गुरुवार को भी जमकर हंगामा हुआ। प्रश्नकाल के दौरान विपक्ष के नेता उमंग सिंघार ने सिंगरौली जिले के धीरौली में अडानी के कोल ब्लॉक का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि कोल ब्लॉक के लिए आठ गांवों की जमीन एक्वायर की जा रही है, और कलेक्टर की लिस्ट के अनुसार, 12,998 परिवार प्रभावित हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रभावित आदिवासी परिवारों को पूरा मुआवजा नहीं मिला है। विपक्ष के नेता ने कहा कि मुआवजा बाहरी लोगों को भी दिया गया है।
उन्होंने सदन में आरोप लगाया कि पुलिस स्टेशन ऑफिसर जितेंद्र भदौरिया की पत्नी को 15,94,990 रुपये और ट्रैफिक ऑफिसर दीपेंद्र सिंह कुशवाहा की पत्नी स्वाति सिंह को 14,42,482 रुपये का मुआवजा दिया गया। उन्होंने मामले की विधानसभा कमेटी से जांच कराने की मांग की। कांग्रेस MLA मामले की जांच के लिए असेंबली कमेटी बनाने की मांग पर अड़े रहे। स्पीकर के आश्वासन के बावजूद, कांग्रेस MLA नहीं माने और अपना विरोध जारी रखा। इसके बाद, उन्होंने विरोध में वॉकआउट किया। इस दौरान सदन की कार्यवाही दो बार स्थगित की गई।
मालवा में बढ़ रहा नशे का कारोबार
इस बीच, जावरा से BJP MLA राजेंद्र पांडे ने कहा कि मालवा क्षेत्र हमेशा से शांत रहा है, लेकिन अवैध नशे का कारोबार लगातार बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि गांजा, अफीम और डोडा चूरा के बाद अब MD ड्रग्स बनाए जा रहे हैं। नशे की आड़ में अवैध हथियारों की भी तस्करी की जा रही है। उन्होंने सरकार और प्रशासन से इसके खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की मांग की।
MLA अभिजीत शाह ने हेल्थ डिपार्टमेंट के कामकाज पर सवाल उठाए। हेल्थ डिपार्टमेंट के कामकाज पर कटाक्ष करते हुए MLA अभिजीत शाह ने कहा कि स्थिति ऐसी है जैसे शरीर तो है लेकिन आत्मा गायब है। हॉस्पिटल की बिल्डिंग तो बन गई हैं, लेकिन उनमें स्टाफ की कमी है।

प्रेग्नेंसी में मोबाइल फोन के इस्तेमाल पर BJP MLA ने चिंता जताई
MLA अभिलाष पांडे ने कहा कि आजकल 10 से 12 साल के बच्चों में कम उम्र में चश्मा लगने की समस्या तेज़ी से बढ़ रही है। इस मुद्दे पर डॉक्टरों की राय का हवाला देते हुए उन्होंने इसे महाभारत से जोड़कर समझाया। उन्होंने कहा कि जैसे सुभद्रा ने प्रेग्नेंसी में चक्रव्यूह तोड़ने की कहानी सुनी थी और अभिमन्यु ने उसे गर्भ में ही आत्मसात कर लिया था। वैसे ही आज प्रेग्नेंट महिलाओं के मोबाइल फोन के ज़्यादा इस्तेमाल का असर गर्भ में पल रहे बच्चे पर पड़ता है। जब तक प्रेग्नेंट महिलाएं मोबाइल फोन का इस्तेमाल कम नहीं करेंगी, बच्चों में मोबाइल फोन की लत और आंखों से जुड़ी समस्याएं बढ़ती रहेंगी।
प्राइवेट बिल में 15-25 लाख का कवरेज पेश किया गया
अमरपाटन से कांग्रेस MLA डॉ. राजेंद्र कुमार सिंह ने सदन को बताया कि उनके प्राइवेट बिल में सभी कैटेगरी के लिए 15 लाख तक का हेल्थ कवरेज और गंभीर बीमारियों के लिए 25 लाख तक का कवरेज देने का प्रस्ताव है।
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आयुष्मान स्कीम में सुधार की ज़रूरत है
उन्होंने कहा कि आयुष्मान स्कीम में अभी ₹5 लाख तक का इलाज कवर होता है, जो कई बीमारियों के लिए काफी नहीं है। उनका प्रपोज़ल सभी को फ्री हेल्थकेयर देना है।
सीनियर सिटिज़न और दूसरे राज्यों के उदाहरण
MLA ने बताया कि पंजाब सरकार ने ₹10 लाख तक का कवरेज शुरू किया है और उनका बिल सीनियर सिटिज़न सहित सभी के लिए कवरेज पक्का करता है। कांग्रेस विधायक ने कहा कि कुत्तों पर दो घंटे की बहस होती है, लेकिन इंसानों की हेल्थ के मुद्दों पर कोई चर्चा नहीं होती है। पोहरी से कांग्रेस विधायक कैलाश कुशवाह ने कहा कि अगर असेंबली में कुत्तों पर दो घंटे की बहस हो सकती है, तो क्या हम इंसानों की हेल्थ के मुद्दों पर भी अपने विचार नहीं रख सकते?
उन्होंने कहा कि COVID-19 महामारी के दौरान दी जाने वाली वैक्सीन से युवाओं में हार्ट अटैक और समय से पहले मौत जैसी बीमारियां बढ़ रही हैं। इसकी जांच ज़रूरी है। कुशवाहा ने दवाओं की बढ़ती कीमतों पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जो दवा MR डॉक्टरों को ₹10 में देते हैं, वही बाज़ार में ₹130 में बिकती है। उन्होंने पूछा कि यह स्थिति क्यों बनी है और इसकी भी जांच होनी चाहिए।
दवाओं की खरीद के लिए सरकार ज़िम्मेदार : ओमकार सिंह
कांग्रेस MLA ओमकार सिंह मरकाम ने कहा कि मध्य प्रदेश सरकार दवाइयों की खरीद के लिए ज़िम्मेदार है। ज़हरीले सिरप की बिक्री और छिंदवाड़ा में बच्चों की मौत के लिए सरकार ज़िम्मेदार है। वहीं डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ला ने कहा कि यह दवा सरकार ने खरीदी नहीं थी। विधायक मरकाम ने कहा कि सरकार के पास ड्रग इंस्पेक्टर हैं, और कोई भी दवा बिक्री सरकार की ज़िम्मेदारी है। मंत्री अपनी ड्यूटी से बच नहीं सकते। मरकाम ने पब्लिक हेल्थ कॉर्पोरेशन के ज़रिए दवाओं की खरीद में 20 से 30 परसेंट करप्शन का आरोप लगाया।उन्होंने कहा कि आयुष्मान योजना में कोई सुविधा नहीं है।
अस्पतालों में एम्बुलेंस तो हैं, लेकिन ड्राइवर नहीं हैं : शेखावत
कांग्रेस MLA भंवर सिंह शेखावत ने यह भी कहा कि अस्पतालों में एम्बुलेंस तो हैं, लेकिन उन्हें चलाने के लिए ड्राइवर नहीं हैं, और कई जगहों पर तो डीज़ल के लिए भी पैसे नहीं हैं। उन्होंने कहा कि सरकार को यह नियम बनाना चाहिए कि कोई भी MBBS की डिग्री तभी ले सकता है जब उसने कम से कम दो साल ग्रामीण इलाकों में काम किया हो।
शेखावत ने आयुष्मान कार्ड के तहत मिलने वाले इलाज पर सवाल उठाते हुए कहा कि अस्पताल आने वाले मरीज़ों से पहले पैसे जमा करने को कहा जाता है और बाद में आयुष्मान कार्ड मिलने पर पैसे वापस करने का वादा किया जाता है। उन्होंने कहा कि पांच साल का ऑडिट करने पर पूरी स्थिति सामने आ जाएगी।
कफ सिरप से होने वाली मौतों का मुद्दा उठाते हुए शेखावत ने सवाल किया कि गैर-कानूनी दवाएं क्यों बेची जा रही हैं और इस तरह की घटनाओं को क्यों नहीं रोका जा रहा है। उन्होंने कहा कि मंत्री का इस्तीफा मांगना शायद ठीक न हो, लेकिन इसे रोकना और ऐसी घटनाओं को रोकना सरकार की ज़िम्मेदारी है।
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कांग्रेस विधायक बोले- सरकार पता करे डॉक्टर सरकारी अस्पतालों में क्यों नहीं रुकना चाहते
कांग्रेस विधायक भंवर सिंह शेखावत ने कहा कि सरकार को यह पता लगाना चाहिए कि डॉक्टर सरकारी अस्पतालों में क्यों नहीं रुकना चाहते हैं। डिप्टी CM राजेंद्र शुक्ला सिस्टम को बेहतर बनाने के लिए काम कर रहे हैं, लेकिन जो माफिया एक्टिव है, उस पर रोक लगाना भी ज़रूरी है। सरकार मेडिकल कॉलेज की बिल्डिंग बना रही है, लेकिन डिप्टी CM को यह समझना चाहिए कि सिर्फ़ बिल्डिंग बनाने से अस्पताल नहीं बनता।
उन्होंने कहा कि पिछले 12 साल का रिकॉर्ड देखने पर न सिर्फ़ डॉक्टरों की हालत, बल्कि पैरामेडिकल और नर्सिंग स्टाफ़ की हालत भी पता चल जाएगी। नर्सिंग स्कैम पहले ही हो चुका है, और आज भी आधे से ज़्यादा नर्सिंग कॉलेज कोर्ट के अंडर हैं। शेखावत ने कहा कि सरकार डॉक्टरों की सैलरी नहीं दे पा रही है। अस्पतालों में मशीनें तो हैं, लेकिन उन्हें चलाने के लिए ऑपरेटर नहीं हैं। 6 करोड़ रुपये की मशीन छह साल तक जंग खा गई क्योंकि ऑपरेटर नहीं था।

