8वां वेतन आयोग 2026: सरकारी कर्मचारी, दुगनी सैलरी, 3% की जगह 7% इंक्रीमेंट और रिटायरमेंट के बाद पेंशन में उछाल। जी हां, सुनने में यह सब कुछ सपने जैसा लगता है लेकिन 8वें वेतन आयोग में इसी पर बहुत बड़ा निर्णय होने वाला है। लाखों कर्मचारियों और पेंशनर्स को फिलहाल जिस विषय की सबसे ज्यादा चिंता है वह है 8 वें वेतन आयोग का लागू होना।
कर्मचारी संगठन अगले 10 वर्षों तक इसी 8वें वेतन आयोग के अंतर्गत वेतन प्राप्त करेंगे। जिसके चलते उन्होंने स्पष्ट रूप से सरकार के सामने अपनी मांगे रख दी हैं। जैसे कि,
- मल्टी लेवल फिटमेंट फैक्टर 3 से 3.5 तक
- 3% नहीं बल्कि 7% वार्षिक वेतन वृद्धि
- और केवल बेसिक सैलरी नहीं बल्कि HRA, TA DA और पेंशन में भी वृद्धि
यदि यह फैसला पारित होता है तो अगले 10 सालों में केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर की सैलरी में रिकॉर्ड तोड़ उछाल देखने को मिलेगा। 50 लाख से ज्यादा कर्मचारी और 70 लाख पेंशनर्स इस फैसले से सीधे तौर ज्यादा सैलरी और पेंशन पाएंगे।
8 वां वेतन आयोग कब से लागू होगा?
8 वां वेतन आयोग को असल में 1 जनवरी 2026 से लागू हो जाना चाहिए था। परंतु सरकार की ढिलाई और तकनीकी कारणों की वजह से वर्तमान में 8वें वेतन आयोग पर केवल प्रस्ताव ही संशोधित किये जा रहे हैं। उम्मीद की जा रही है कि 8 वां वेतन आयोग 2027 जनवरी-जून के बीच मे लागू कर दिया जाएगा। लेकिन इतना स्पष्ट है कि 8 वां वेतन आयोग लागू होने के बाद सरकार पिछली तारीख से लागू एरियर का भुगतान कर्मचारियों और पेंशनर्स को कर देगी। मतलब 8वां वेतन आयोग 1 जनवरी 2026 से ही प्रभावी माना जाएगा।
क्या है मल्टीलेवल फिटमेंट फैक्टर की मांग ?

- कर्मचारी संगठन चाहता है की 8 वें वेतन आयोग में मल्टी लेवल फिटमेंट फैक्टर तय किया जाए। मतलब लेवल 1 से 5 तक का फिटमेंट फैक्टर 3 हो।
- लेवल 6 से 12 का फिटमेंट फैक्टर 3.5 से 3.10 किया जाए।
- और वरिष्ठ अधिकारियों का फिटमेंट फैक्टर 3.2 से 3.25 के बीच कर दिया जाए।
8 वें वेतन आयोग से कर्मचारियों की उम्मीदें
- 8 वें वेतन आयोग से कर्मचारियों की सबसे बड़ी मांग है फिटमेंट फैक्टर बढ़ाने की।
- 7 वें वेतन आयोग में यह फिटमेंट फैक्टर 2.57 था। अब कर्मचारी चाहते हैं कि यह न्यूनतम 3 और उच्चतम 3.5 तक बढ़ाया जाए।
- फिटमेंट फैक्टर बढ़ाते ही बेसिक सैलरी तो बढ़ेगी HRA, DA, और पेंशन भी बढ़ेगा।
- कर्मचारी 8 वें वेतन आयोग में 3% की वृद्धि नहीं बल्कि 7% की प्रति वर्ष वृद्धि की मांग कर रहे हैं ताकि महंगाई से मुकाबला किया जा सके।
- और अगले 10 साल में कर्मचारियों की क्रय शक्ति स्थिर हो सके।
- 8 वें वेतन आयोग से कर्मचारियों की बेसिक सैलरी 18000 से सीधा 30000 करने की मांग है। जिससे निचले स्तर के कर्मचारियों को फायदा मिलेगा।
- वही वेतन गणना में परिवार यूनिट को 3 से बढ़कर 5 करने की भी मांग की जा रही है ताकि वेतन न्यूनतम रूप से ऊंचा हो सके।
- वही 8वें वेतन आयोग में कर्मचारियों की मांग है कि फिक्स्ड मेडिकल अलाउंस बढ़ाया जाए। CGHS सेवाओं में सुधार लाया जाए।
- लीव ट्रैवल कंसेशन को कॅश ऑप्शन के रूप में दिया जाए और लीव एनकैशमेंट की सीमा 300 दिनों से बढ़कर 400 दिन तक किया जाए।
8वें वेतन आयोग पर सरकार का रुख
8वे वेतन आयोग पर सरकार कोई आपत्ति नहीं दर्ज कर रही है। सरकारी इसे 1 जनवरी 2026 से ही लागू मानेगी। लेकिन फिलहाल ड्राफ्ट संशोधित हो रहे हैं पर अंतिम मंजूरी बाकी है। सरकार ने अभी तक कर्मचारियों की 3 से 3.25 फिटमेंट फैक्टर और 7% वार्षिक वृद्धि की मांग पर ना इनकार किया है और ना ही सहमति जताई है।
सरकार यह भी कह रही है कि वे कर्मचारियों और पेंशनर्स के हितों की पूरी रक्षा करेगी। लेकिन किसी भी प्रकार की बढ़ोतरी को करने से पहले सरकार को वेतन संशोधन, आर्थिक स्थिति और राजकोषीय भार सभी को ध्यान में रखना होगा। ऐसे में फिलहाल सरकार सभी प्रस्तावों पर विचाराधीन का लेबल लगा चुकी है। फिलहाल ना किसी प्रस्ताव से इनकार किया है और ना ही कोई प्रस्ताव मंजूर हुआ है।
कुल मिलाकर कर्मचारी संगठनों की 7% इंक्रीमेंट और 3 से 3:25% की फिटमेंट फैक्टर की मांग पर क्या निर्णय आएगा इसके बारे में कुछ भी कहना मुमकिन नहीं। लेकिन इतना तय है की 8 वां वेतन आयोग कर्मचारी और पेंशनर्स के लिए ऐतिहासिक साबित होने वाला है। क्योंकि इस के बाद अगले 10 सालों तक कर्मचारियों का सैलरी स्ट्रक्चर पूरी तरह से बदल जाएगा।
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