वंदे मातरम् पर सरकार का ऑर्डर: बुधवार 11 फरवरी 2026 को केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्# के गायन और वादन के लिए बहुत जरूरी आदेश जारी किए हैं। एक लंबे समय से यह कदम उठाए जाने पर विचार किया जा रहा था। आखिरकार अब ‘वंदे मातरम् गीत के 150 साल पूरे होने पर इस कदम पर अमल किया जा रहा है। हम बात कर रहे हैं राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम् को अब राष्ट्रीय प्रोटोकॉल बनाये जाने की। जी हां, ‘वंदे मातरम’ राष्ट्रीय गीत को अब उत्सव या कार्यक्रमों में नहीं बल्कि सरकारी, शैक्षणिक और सार्वजनिक अवसरों पर राष्ट्रीय गीत के रूप में सम्मान के साथ गाया और बजाया जाएगा।
सबसे बड़ा बदलाव इस पूरी कड़ी में यह रहा की ‘वंदे मातरम् के सभी 6 चांद गाना अनिवार्य कर दिया गया है। मतलब अब 3 मिनट 10 सेकंड का वंदे मातरम् गाया और बजाया जाएगा। सभी सरकारी कार्यक्रमों और निर्धारित आयोजनों में इसे बजाना अनिवार्य है। इससे पहले अक्सर वंदे मातरम् के 3 छंद गए जाते थे लेकिन अब सरकारी आदेशों के बाद गीत को 6 छंदों के साथ गया जाएगा। वंदे मातरम् को राष्ट्रीय प्रोटोकॉल बनाने के साथ-साथ सरकार ने इस पर जरूरी दिशा निर्देश भी जारी किए हैं जिसके बारे में जानना सभी के लिए जरूरी है।
वंदे मातरम् पर सरकार का ऑर्डर क्या है? क्या है प्रोटोकॉल?
- पहली बार राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम् के लिए औपचारिक प्रोटोकॉल जारी किया गया है।
- मतलब अब सरकारी आयोजनों, सार्वजनिक आयोजनों, स्कूल-कॉलेज में इसे बजाना अनिवार्य कर दिया गया है।
- वंदे मातरम् और जन गण मन जब एक साथ बजेंगे तो वंदे मातरम् गायन के साथ ही कार्यक्रम की शुरुआत होगी।
- राष्ट्रीय गीत के सम्मान में सभी के लिए खड़ा होना जरूरी है।
- वंदे मातरम् का अब 3 छंद वाला नहीं बल्कि 6 छंद वाला संस्करण बजेगा।
- तिरंगा फहराने की रस्म हो, सरकारी बैठक हो, परेड हो वंदे मातरम् बजाना अनिवार्य है।
- राष्ट्रपति और राज्यपाल के कार्यक्रम, सिविलियन पुरस्कार समारोह, स्कूल और शैक्षणिक संस्थानों में राष्ट्रीय गीत बजाया जाएगा।
- राष्ट्रीय गीत जब-जब बजेगा तब-तब इसके सम्मान में सभी को सावधान की मुद्रा में खड़े रहना अनिवार्य है।
- हालांकि सिनेमा हॉल, डॉक्यूमेंट्री और न्यूज़ के दौरान वंदे मातरम् बजाने पर खड़े होने की आवश्यकता नहीं है।
सिनेमा हॉल डॉक्यूमेंट्री के लिए वंदे मातरम् पर सरकार का ऑर्डर अलग क्यों ?
बता दें सिनेमा हॉल में यदि वंदे मातरम् फिल्म के हिस्से के तौर पर बजता है तो दर्शकों के लिए खड़े होना अनिवार्य नहीं। वही फिल्म शुरू होने से पहले राष्ट्रगान ही बजाया जाएगा। जिसके सम्मान में सभी का खड़े होना अनिवार्य है। इसी तरह न्यूज रील और डॉक्यूमेंट्री के दौरान भी राष्ट्रगीत बजने पर खड़े रहने की कोई आवश्यकता नहीं है।
राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम के 6 छंदों वाला स्वरूप
वन्दे मातरम्।
सुजलां सुफलां मलयजशीतलाम्
शस्यश्यामलां मातरम्।
वन्दे मातरम्॥
2.
शुभ्रज्योत्स्ना पुलकितयामिनीम्,
फुल्लकुसुमित द्रुमदलशोभिनीम्,
सुहासिनीं सुमधुर भाषिणीम्,
सुखदां वरदां मातरम्।
वन्दे मातरम्॥
3.
सप्तकोटिकण्ठ कलकलनिनाद कराले,
द्विसप्तकोटिभुजैर्धृतखरकरवाले।
के बोले मा तुमि अबले?
बहुबलधारिणीं नमामि तारिणीं,
रिपुदलवारिणीं मातरम्।
वन्दे मातरम्॥
4.
तुमि विद्या, तुमि धर्म,
तुमि हृदि, तुमि मर्म,
त्वं हि प्राणा शरीरे।
बाहुते तुमि मा शक्ति,
हृदये तुमि मा भक्ति,
तोमारइ प्रतिमा गढ़ि मन्दिरे-मन्दिरे।
वन्दे मातरम्॥
5.
त्वं हि दुर्गा दशप्रहरणधारिणी,
कमला कमलदलविहारिणी,
वाणी विद्यादायिनी नमामि त्वाम्।
नमामि कमलाम्, अमलाम्, अतुलाम्,
सुजलां सुफलां मातरम्।
वन्दे मातरम्॥
6.
श्यामलां सरलां सुस्मितां भूषिताम्,
धरणीं भरणीं मातरम्।
वन्दे मातरम्॥
कुल मिलाकर वंदे मातरम् पर सरकार का ऑर्डर वंदे मातरम् को सिर्फ एक गीत से बढ़कर सम्मानजनक दर्जा देने की कोशिश है। अब वंदे मातरम् केवल कार्यक्रमों का हिस्सा नहीं रहेगा। बल्कि राष्ट्रगीत को उसका सम्मान मिलेगा। अब इसे एक रस्म में बनाया जाएगा। सरकार का मानना है कि इससे देशभक्ति की भावना , एकता और सांस्कृतिक पहचान को मजबूती मिलेगी। इस तरह भारत सरकार ने वंदे मातरम् गीत के 150 वर्ष पूरे होने के ऐतिहासिक अवसर पर आखिरकार वंदे मातरम् गीत से जुड़ा राष्ट्र प्रस्ताव पारित कर दिया जिसे अब एक नेशनल प्रोटोकॉल माना जाएगा।
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