केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Nirmla SitaRaman) ने 1 फरवरी को अपना लगातार नौवां बजट पेश किया। नौवें बजट का भाषण भाषण ‘लोकलुभावन के ऊपर लोक’ के मंत्र के साथ शुरू हुआ, जो किसी अलंकरण या आख्यान से मुक्त घोषणाओं पर केंद्रित रहा। सीतारमण ने 85 मिनट लंबा भाषण पूरी शांति के साथ पेश किया। केंद्रीय बजट 2026-27 (Budget 2026-27) में किसानों के लिए कई अहम योजनाओं का ऐलान किया गया है। मत्स्य पालन, पशुपालन, उच्च मूल्य वाली फसलें और भारत-विस्तार AI टूल से किसानों की आय और रोजगार बढ़ाने पर फोकस।
इस बजट में सरकार ने पारंपरिक खेती के साथ-साथ मत्स्य पालन, पशुपालन और उच्च मूल्य वाली फसलों के जरिए किसानों की आय दोगुनी करने और ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर पैदा करने पर विशेष ध्यान केंद्रित किया है।
उच्च मूल्य वाली कृषि: नारियल और चंदन की खेती को प्रोत्साहन
भारत दुनिया का सबसे बड़ा नारियल उत्पादक देश है, जिस पर लगभग 30 मिलियन लोगों की आजीविका निर्भर है। इसे और मजबूती देने के लिए सरकार ने “नारियल संवर्धन योजना” की घोषणा की है।
नारियल की नई किस्में
प्रमुख उत्पादक राज्यों में पुराने और कम उत्पादक पेड़ों की जगह आधुनिक और अधिक उपज देने वाले पौधे लगाए जाएंगे।
आत्मनिर्भरता: बजट में भारतीय काजू और कोको के प्रसंस्करण में आत्मनिर्भर बनने और इन्हें 2030 तक प्रीमियम वैश्विक ब्रांड बनाने का लक्ष्य रखा गया है।
विरासत का संरक्षण: चंदन की लकड़ी की खेती और कटाई के बाद के प्रसंस्करण को बढ़ावा देने के लिए केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर काम करेंगी।
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मत्स्य पालन को मिलेगा नया विस्तार
- सरकार ने मत्स्य क्षेत्र के समग्र विकास के लिए कई अहम पहलें शुरू करने की घोषणा की है।
- 500 जलाशयों और अमृत सरोवरों का एकीकृत विकास किया जाएगा।
- तटवर्ती क्षेत्रों में मत्स्य मूल्य शृंखला को मजबूत किया जाएगा।
- मत्स्य पालक किसान उत्पादक संगठनों (FPO), स्टार्टअप्स और महिला-प्रेरित समूहों को बाजार से जोड़ा जाएगा।
- इससे मछुआरों की आय बढ़ने के साथ-साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।
पशुपालन से बढ़ेगा रोजगार
पशुपालन क्षेत्र को ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के आसपास गुणवत्तापूर्ण रोजगार का साधन बनाने के लिए सरकार ने कई योजनाएं प्रस्तावित की हैं, जिनमें शामिल हैं…
- ऋण आधारित सब्सिडी कार्यक्रम
- पशुधन उद्यमों का आधुनिकीकरण
- डेयरी और मुर्गीपालन के लिए एकीकृत मूल्य शृंखला का निर्माण
- पशुधन किसान उत्पादक संगठनों को प्रोत्साहन
पर्वतीय और पूर्वोत्तर क्षेत्रों का विकास
पहाड़ी क्षेत्रों में अखरोट, बादाम और खुमानी के पुराने फलोद्यानों के संरक्षण के लिए सहायता दी जाएगी। वहीं, पूर्वोत्तर राज्यों में अगर के पेड़ों की खेती को प्रोत्साहित किया जाएगा ताकि वहां के किसानों को वैश्विक बाजार का लाभ मिल सके।
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क्रेडिट-लिंक्ड सब्सिडी
पशुपालक किसान उत्पादक संगठनों को क्रेडिट-लिंक्ड सब्सिडी से जोड़ा जा रहा है, ताकि वे नई तकनीक अपनाकर मूल्यवर्धन और विपणन में आगे बढ़ सकें।डेयरी क्षेत्र इसकी सबसे बड़ी मिसाल है। भारत आज दुनिया का सबसे बड़ा दूध उत्पादक देश है और वैश्विक दूध उत्पादन का करीब 25 प्रतिशत हिस्सा अकेले भारत में होता है।
वर्ष 2024-25 में प्रति व्यक्ति दूध की उपलब्धता 485 ग्राम प्रतिदिन रही, जो विश्व औसत 328 ग्राम से कहीं अधिक है। यह केवल उत्पादन की कहानी नहीं है, बल्कि गांवों में रोजागार, नियमित नकदी प्रवाह और पोषण सुरक्षा की भी गाथा है। दूध, अंडा, मांस, ऊन और बकरी के दूध जैसे उत्पादों ने ग्रामीणों की आय के कई रास्ते खोल दिए हैं।

