IAS टीना डाबी कंट्रोवर्सी: भारत का राष्ट्रीय ध्वज केवल तीन रंगों का प्रतिनिधित्व नहीं करता। यह प्रतिनिधित्व करता है भारत की आत्मा का, स्वतंत्रता संग्राम के बलिदान का और संवैधानिक मूल्यों का। यही कारण है कि तिरंगे से जुड़े कुछ विशेष नियम और प्रोटोकॉल बनाए गए हैं और इसको लेकर देश और देश की जनता बेहद ही संवेदनशील रही है। चाहे वह ध्वज फहराने का तरीका हो या सलामी देने का तरीका। यहां तक की राष्ट्रीय प्रतीकों के उपयोग के लिए संविधान में फ्लैग कोड आफ इंडिया के अंतर्गत स्पष्ट दिशा निर्देश दिए गए हैं। इन सभी के बावजूद 26 जनवरी 2026 के दिन IAS टीना डाबी ने गणतंत्र दिवस के दौरान कुछ ऐसा कर दिया जिसकी वजह से वह विवादों में घिर गई हैं।
बता दें, सोशल मीडिया पर IAS अधिकारी टीना डाबी का एक वीडियो वायरल हो रहा है। इसमें वे गणतंत्र दिवस समारोह में सलामी के दौरान गलत दिशा में मुड़ती हुई दिखाई दे रही हैं। हालांकि उन्होंने समय रहते ही अपनी स्थिति में सुधार कर लिया। लेकिन इसके बावजूद भी एक IAS ऑफिसर से इस प्रकार की गलती होना यह आलोचना का विषय बन गया है। इसी वजह से एक बार फिर से फ्लैग कोड ऑफ़ इंडिया और प्रोटोकॉल पर चर्चा छिड़ गई है। क्योंकि यह पहली बार नहीं है कि किसी IAS अधिकारी या राजनेता ने इसकी इस प्रकार की गलती की है। इससे पहले भी सेलिब्रिटीज और राजनेता ऐसे प्रोटोकॉल विवादों में फंसे हैं।
जब राजनेताओं से हुई तिरंगे या प्रोटोकॉल से जुड़ी गलतियां
2019 में JDU के विधायक शरफुद्दीन का एक वीडियो वायरल हुआ था जिसमें स्वतंत्रता दिवस के समारोह के दौरान उन्होंने तिरंगे को सलामी नहीं दी। जबकि मंच पर खड़े अन्य लोगों ने सलामी दी जिसके चलते इसे राष्ट्रीय ध्वज का अपमान बताया गया।
इसके बाद तमिलनाडु के भाजपा कार्यकर्ता से वी शेखर का एक मामला सामने आया जिसमें उन्होंने राष्ट्रीय ध्वज पर कुछ विशेष टिप्पणी की थी जिसे नेशनल ऑनर एक्ट के अंतर्गत दर्ज भी किया गया था।
2015 में एक कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी तिरंगे पर हस्ताक्षर करते हुए दिखाई दिए। हालांकि पहले इसे फ्लैग कोड का उल्लंघन जरूर बताया गया परंतु बाद में स्पष्ट कर दिया गया कि वह राष्ट्रीय ध्वज नहीं था बल्कि एक प्रतीकात्मक कलाकृति थी।
राजनेता ही नहीं बॉलीवुड सेलिब्रिटीज भी रहे विवादों में
फ्लैग कोड और नेशनल प्रोटोकॉल के चलते बॉलीवुड सेलिब्रिटीज और खेल जगत से जुड़ी हस्तियां भी विवादों में रह चुकी हैं। 2011 में क्रिकेट वर्ल्ड कप के दौरान शाहरुख खान ने तिरंगा उल्टा पकड़ा था जिसकी वजह से सोशल मीडिया पर उनकी भारी भरकम ट्रोलिंग हुई। ऐसा ही एक मामला T20 वर्ल्ड कप की जीत के बाद आया जब रोहित शर्मा ने तिरंगा जमीन पर लगाया, इसके बाद भी यह मामला गर्म होता हुआ दिखाई दिया। ऐसी ही एक वाकिया सानिया मिर्जा के साथ हुआ जब एक तस्वीर में उनके पैरों के नीचे टेबल पर रखा तिरंगा दिखाई दिया जिसे लोगों ने तिरंगे का अपमान बताया। वही बॉक्सर विजेंद्र सिंह ने अपने शॉर्ट्स में तिरंगे की आकृति का उपयोग किया था जिसकी वजह से कुछ समूह ने इस पर भी आपत्ति जताई।
IAS टीना डाबी वाला मामला चर्चा का विषय क्यों बन गया है
इस टीना डाबी वाला मामला चर्चा का विषय इसलिए बन गया है कि क्योंकि टीना डाबी खुद एक एडमिनिस्ट्रेटिव ऑफिसर हैं जो भारत के प्रतीकों और राष्ट्रीय संवेदनाओं से जुड़े हर प्रोटोकॉल से वाकिफ हैं। ऐसे में गणतंत्र दिवस के मौके पर ऐसा व्यवहार उनसे अपेक्षित नहीं था। वहीं जब बात हो सोशल मीडिया की तो सोशल मीडिया पर एक छोटी सी घटना को बड़ा रूप दे दिया जाता है और यह वीडियो भी तेजी से वायरल हो रहा है। इसलिए सोशल मीडिया पर IAS टीना डाबी की ट्रोलिंग शुरू हो चुकी है। हालांकि जानकारों की माने तो यह जानबूझकर किया गया उल्लंघन नहीं था, बल्कि एक मानवीय त्रुटि थी जिसे सोशल मीडिया पर काफी बढ़ा चढ़ा कर दिखाया जा रहा है।
क्या है फ्लैग कोड ऑफ़ इंडिया और सैल्यूट प्रोटोकॉल
फ्लैग कोड ऑफ़ इंडिया और सेल्यूट प्रोटोकॉल असल में ऐसे नियम है जो यह बताते हैं कि तिरंगा कैसे फहराया जाना चाहिए? इसका उपयोग कहां किया जाना चाहिए? कौन सलामी देगा और किस प्रकार सलामी देनी चाहिए ? सिविलियन के लिए सलामी की मुद्रा, वर्दी धारी के लिए सलामी की मुद्रा अलग-अलग होती है और यदि कोई जानबूझकर ऐसा नहीं करता तो उसके लिए प्रिवेंशन ऑफ इंसल्ट टू नेशनल ऑनर एक्ट 1971 के अंतर्गत जुर्माना या जेल का भी प्रावधान है।
ऐसे में प्रत्येक प्रशासनिक अधिकारी को यह सारे प्रश्न परीक्षा में ही पूछे जाते हैं, जिसके चलते यह स्पष्ट हो जाता है कि IAS तिरंगा टीना डाबी को इस बारे में गहरी जानकारी होनी चाहिए। परंतु टीना डाबी से लेकर राजनेताओं और सेलिब्रिटीज के उदाहरण यह स्पष्ट दिखाते हैं कि ऐसी छोटी-मोटी त्रुटियां इससे पहले भी हुई हैं। सोशल मीडिया के चलते यह छोटी-मोटी मुद्दे बड़े विवाद का रूप ले लेते हैं।
हालांकि भारतीय होने के नाते हम सभी का फर्ज बनता है कि तिरंगे के लिए सम्मान की भावना रखें और विवादों से बचने के लिए जागरूकता का रास्ता अपनाएं।












