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चांदी की कीमतें पहली बार ₹2 लाख प्रति किलोग्राम के पार: इस तेज़ी की वजह क्या है?

चांदी की कीमतें

चांदी की कीमतें  पहली बार फ्यूचर्स ट्रेड में ₹2 लाख प्रति किलोग्राम का आंकड़ा पार कर गईं। इसे निवेशकों की मज़बूत झुकाव, ग्लोबल सप्लाई की कमी और इंडस्ट्रियल मेटल्स में मज़बूती का सपोर्ट मिला।

मज़बूत मांग, कम सप्लाई और सोलर एनर्जी, इलेक्ट्रिक वाहनों और क्लीन-एनर्जी सेक्टर में इंडस्ट्रियल इस्तेमाल की वजह से चांदी की कीमत ₹2 लाख प्रति किलोग्राम और $64.74 प्रति औंस के रिकॉर्ड हाई पर पहुंच गई।

इंटरनेशनल मार्केट में भी रिकॉर्ड तेजी

इंटरनेशनल मार्केट में COMEX( Commodity Exchange) सिल्वर फ्यूचर्स $64.74 प्रति औंस के नए ऑल-टाइम हाई पर पहुंच गया है। इससे यह साफ है कि 2025 में सिल्वर का बुलिश ट्रेंड लगातार मजबूत बना हुआ है। विश्लेषकों का मानना है कि यह तेजी केवल सट्टेबाज़ी नहीं, बल्कि मजबूत फंडामेंटल्स पर आधारित है।

  • नया शिखर: ₹2,00,000+ (MCX)
  • ग्लोबल हाई: $64.74 (COMEX)
  • प्रमुख ट्रिगर: सोलर पैनल, इलेक्ट्रिक वाहन और सेमीकंडक्टर।
  • भविष्यवाणी (2026): ₹2.50 लाख तक जाने का अनुमान।

एक्सिस म्यूचुअल फंड के गोल्ड और सिल्वर आउटलुक के अनुसार, सिल्वर 2025 में सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाली कमोडिटी में से एक रही है, जिसे सोलर एनर्जी, इलेक्ट्रिक वाहनों, सेमीकंडक्टर और अन्य क्लीन-एनर्जी टेक्नोलॉजी जैसे सेक्टर से बढ़ती डिमांड का फायदा मिला है।

2025 में बेस्ट परफॉर्मिंग कमोडिटी में शामिल

एक्सिस म्यूचुअल फंड के गोल्ड और सिल्वर आउटलुक के मुताबिक, सिल्वर 2025 की सबसे बेहतर प्रदर्शन करने वाली कमोडिटीज़ में शामिल रही है। सोलर एनर्जी, इलेक्ट्रिक वाहन, सेमीकंडक्टर और अन्य क्लीन-एनर्जी टेक्नोलॉजी से जुड़ी मांग ने सिल्वर को मजबूत सपोर्ट दिया है।

रिपोर्ट में बताया गया है कि इंडस्ट्रियल खपत लगातार माइन सप्लाई से अधिक बनी हुई है, जिससे स्ट्रक्चरल सप्लाई शॉर्टेज पैदा हो गया है। इस वजह से इन्वेंट्री घट रही है और कीमतों पर ऊपर की ओर दबाव बना हुआ है।

  • ऐतिहासिक उछाल
  • चांदी की चमक बेमिसाल: 2025 में निवेशकों को दिया सबसे तगड़ा रिटर्न।
  • महंगी हुई चांदी
  • सिल्वर रिकॉर्ड: $64 के पार पहुंची अंतरराष्ट्रीय कीमतें, सोलर और EV सेक्टर बना बड़ी वजह।

आज का भाव 

चांदी की कीमतें लगभग ₹2,25,100 प्रति किलोग्राम है।
  • 10 ग्राम- ₹2,251
  • 1 किलोग्राम – ₹2,25,100

रिपोर्ट में बताया गया है कि इंडस्ट्रियल खपत माइन सप्लाई से ज़्यादा बनी हुई है, जिससे एक स्ट्रक्चरल कमी पैदा हुई है जिसने इन्वेंट्री को कम कर दिया है और कीमतों को बढ़ाया है। कमोडिटी में निवेशकों के रुझान और अन्य धातुओं में मज़बूती ने भी सेंटिमेंट को ऊपर उठाया है।

चांदी की मुख्य कारण 

  • मज़बूत औद्योगिक मांग
  • आपूर्ति में कमी
  • निवेशकों की झुकाव
  • कमज़ोर डॉलर और भू-राजनीतिक अनिश्चितता

बाजार विशेषज्ञों ने कहा कि सिल्वर में तेज़ी उन कारकों पर भी आधारित है जिन्होंने इस साल सोने को सपोर्ट किया है, जिसमें कमज़ोर डॉलर, आगे अमेरिकी ब्याज दरों में कटौती की उम्मीदें और बढ़ी हुई भू-राजनीतिक अनिश्चितता शामिल हैं। हालांकि, एक कीमती और इंडस्ट्रियल धातु के रूप में अपनी दोहरी भूमिका के कारण सिल्वर ने सोने से बेहतर प्रदर्शन किया।

  • सिल्वर रैली (Silver Rally)
  • ऑल-टाइम हाई (All-time High)
  • औद्योगिक खपत (Industrial Consumption)
  • सप्लाई शॉर्टेज (Supply Shortage)
  • क्लीन-एनर्जी बूम (Clean Energy Boom)

चांदी की भविष्य संभावनाएँ

नज़दीकी भविष्य के लिए चांदी का आउटलुक पॉजिटिव बना हुआ है, जिसमें विश्लेषकों का अनुमान है कि 2026 में MCX चांदी ₹2.40 लाख से ₹2.50 लाख प्रति किलोग्राम तक पहुँच सकती है। हालांकि, कुछ विश्लेषकों ने चेतावनी दी है कि 2026 में वास्तविक यील्ड में सुधार या मुद्रास्फीति में कमी से कीमतों की गति धीमी हो सकती है।

हालांकि नज़दीकी भविष्य का आउटलुक पॉजिटिव बना हुआ है, लेकिन एनालिस्टों ने चेतावनी दी है कि 2026 में रियल यील्ड में सुधार या महंगाई में कमी से कीमतों की गति धीमी हो सकती है। फिलहाल, यह धातु टाइट सप्लाई की स्थिति और इंडस्ट्रियल यूज़र्स और निवेशकों दोनों की व्यापक झुकाव से फायदा उठा रही है।

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