• Latest
  • Trending
  • All
china

चीन के अरुणाचल स्थित स्थानों के नाम बदलने पर कांग्रेस ने केंद्र को घेरा, कहा- PM की चुप्पी का परिणाम भुगत रहा देश

April 4, 2023
Kisan News

Kisan News: युद्ध के खतरे ने बढ़ा दी किसानों की चिंता, मध्य प्रदेश में डीज़ल खरीदने उमड़ पड़ी

March 8, 2026
Methi ke Fayde

Methi ke Fayde: सेहत के लिए किसी वरदान से काम नहीं है मेथी, जानें इसके फायदे

March 7, 2026
Dwidwadash Yog in march

Dwidwadash Yog: मार्च में सूर्य-मंगल के बीच बनेगा द्विद्वादश योग, तीन राशियों के जीवन में होगा उथल-पुथल

March 7, 2026
भारत में सोने की कीमतों में हल्की गिरावट, क्या यह खरीद का सही समय है?

भारत में सोने की कीमतों में हल्की गिरावट, क्या यह खरीद का सही समय है?

March 7, 2026
Shani Dev

Astro Tips: शनि है कमज़ोर तो काले-नीले रंग के कपड़ों से बना या दूरी, जानें क्यों?

March 7, 2026
Severe heat in MP

Severe heat: मप्र में इस बार प्रचंड गर्मी पड़ने के आसार, पारा अभी से 38 °C के पार

March 7, 2026
T20 वर्ल्ड कप 2026 फाइनल

T20 वर्ल्ड कप 2026 फाइनल: भारत vs न्यूज़ीलैंड – ये तीन मुकाबले तय करेंगे मैच का रुख

March 7, 2026
Indian Oil Dividend 2026: ₹2 प्रति शेयर इंटरिम डिविडेंड का ऐलान, रिकॉर्ड डेट और पेमेंट डिटेल जानें

Indian Oil Dividend 2026: ₹2 प्रति शेयर इंटरिम डिविडेंड का ऐलान, रिकॉर्ड डेट और पेमेंट डिटेल जानें

March 7, 2026
Cylinder Price in MP

Cylinder Price: मध्य प्रदेश में 11 महीने बाद घरेलू LPG सिलेंडर हुआ 60 रुपए महंगा, नर्मदापुरम में सबसे महंगा

March 7, 2026
Indore's Ger

Rang Panchami: इंदौर की गेर में मिसाइलों से बरसाएंगे रंग, टेसू के फूलों से बने गुलाल से बनेगा तिरंगा

March 7, 2026
Royal Enfield Guerrilla 450 का अपडेटेड मॉडल

Royal Enfield Guerrilla 450 का अपडेटेड मॉडल जल्द हो सकता है लॉन्च, नए फीचर्स और बेहतर राइड क्वालिटी मिलने की उम्मीद

March 7, 2026
PM Kisan Samman Nidhi Yojana की 22वीं किस्त

PM Kisan Samman Nidhi Yojana की 22वीं किस्त कब आएगी? ₹2000 ट्रांसफर को लेकर बड़ा अपडेट

March 7, 2026
Sunday, March 8, 2026
Latest Breaking News, Entertainment, Politics and World News
  • होम
  • टॉप न्यूज़
    • ऑटोमोबाइल
    • बिज़नेस
    • जॉब वेकेन्सीस
    • वायरल वीडियो
    • गैजेट
  • राज्य
    • मध्य प्रदेश
    • उत्तर प्रदेश
    • छत्तीसगढ़
    • बिहार
    • गुजरात
    • महाराष्ट्र
  • एग्रीकल्चर
    • फार्मर्स
  • स्पोर्ट्स
    • IPL 2024
    • IPL 2023
  • मनोरंजन
    • ‎बॉलीवुड
    • हॉलीवुड
  • अन्‍य
    • धार्मिक
    • ट्रेंडिंग
    • हैल्‍थ
    • इन्स्पिरेशन
    • गेमिंग
    • ट्रेवल
  • वेब स्टोरीज
  • इंग्लिश
No Result
View All Result
Latest Breaking News, Entertainment, Politics and World News
No Result
View All Result
Home Top News

चीन के अरुणाचल स्थित स्थानों के नाम बदलने पर कांग्रेस ने केंद्र को घेरा, कहा- PM की चुप्पी का परिणाम भुगत रहा देश

by Ashvani Pal
April 4, 2023
in Top News, Trending
china
0
SHARES
301
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter

Congress statement on China-Arunachal case: भारत ने हाल ही में सीमावर्ती राज्य अरुणचाल प्रदेश में जी20 कार्यक्रमों की श्रृंखला के तहत एक अहम बैठक आयोजित की थी। इसी कड़ी में चीन ने अपने नक्शे में अरुणाचल प्रदेश स्थित 11 जगहों के नाम बदल दिए हैं। इस पर कांग्रेस ने पीएम मोदी पर जोरदार हमला बोला है। कांग्रेस ने कहा कि चीन को प्रधानमंत्री मोदी द्वारा क्लीन चिट मिली हुई है। जिसका परिणाम पूरा देश भुगत रहा है।

China
credit: google

‘पीएम ने चीन को दी क्लीन चिट’

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने अपने ट्वीट में लिखा कि ‘तीसरी बार चीन ने हिमाकत की है कि वह अरुणाचल प्रदेश में हमारे इलाकों का नामकरण कर रहा है। 21 अप्रैल 2017 को छह जगहों, 30 दिसंबर 2021 को 15 जगहों और तीन अप्रैल 2023 को 11 जगहों के नाम रखे गए। अरुणाचल प्रदेश भारत का अभिन्न हिस्सा है और हमेशा रहेगा। गलवान घटना के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने जो चीन को क्लीन चिट दी, उसी का परिणाम देश भुगत रहा है।’

जयराम रमेश ने उठाए सवाल

कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने भी इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि ‘हाल ही में एक शीर्ष चीनी राजदूत ने दावा किया था कि भारत चीन सीमा पर स्थिति अब स्थिर है लेकिन चीन की आक्रामकता जारी है। अब उसने तीसरी बार अरुणाचल प्रदेश की जगहों के चीनी नाम जारी किए हैं। इससे पहले 2017 और 2021 में भी ऐसा किया गया था।’

जयराम रमेश ने कहा कि ‘पीएम मोदी की चीन को जून 2020 में दी गई क्लीन चिट और चीन की कार्रवाई पर पीएम की चुप्पी की कीमत देश चुका रहा है।’ जयराम रमेश ने कहा कि करीब तीन साल बाद चीन की सेना, भारतीय सैनिकों को रणनीतिक रूप से अहम देपसांग में पेट्रोलिंग नहीं करने दे रही है, जबकि पहले वहां पेट्रोलिंग होती थी। अब चीन अरुणाचल प्रदेश में यथास्थिति को बदलने की कोशिश कर रहा है।

china
credit: google

क्या है मामला

दरअसल, चीन ने कभी अरुणाचल प्रदेश को भारत के राज्य के तौर पर मान्यता नहीं दी। वो अरुणाचल को ‘दक्षिणी तिब्बत’ का हिस्सा बताता है। उसका आरोप है कि भारत ने उसके तिब्बती इलाके पर कब्जा करके उसे अरुणाचल प्रदेश बना दिया है। चीन के नागरिक मामलों के मंत्रालय ने रविवार को अरुणाचल प्रदेश के लिए 11 स्थानों के मानकीकृत नाम जारी किए।

ड्रैगन अरुणाचल प्रदेश को दक्षिणी चीन का हिस्सा बताता है और इसे जांगनान कहता है। सरकार के नियंत्रण वाले अखबार ग्लोबल टाइम्स ने सोमवार को खबर में कहा कि मंत्रालय ने रविवार को 11 स्थानों के ‘आधिकारिक’ नाम जारी किए हैं। इनमें दो भूमि क्षेत्र, दो रिहायशी इलाके, पांच पर्वत चोटियां और दो नदियां शामिल हैं। यहां तक कि सूची में अरुणाचल प्रदेश की राजधानी ईटानगर के करीब एक शहर भी शामिल है।

china
credit: google

पहले भी कर चुका है प्रयास

यह पहली बार नहीं है जब चीन ने भारतीय क्षेत्रों के नाम बदलकर इन्हें अपना बताने की कोशिश की हो। चीन के नागरिक मामलों के मंत्रालय द्वारा अरुणाचल प्रदेश के लिए जारी मानकीकृत भौगोलिक नामों की यह तीसरी सूची है। इससे पहले अरुणाचल में छह स्थानों के मानकीकृत नामों का पहला बैच 2017 में जारी किया गया था। यह घोषणा 2017 में दलाई लामा के अरुणाचल दौरे के कुछ दिनों बाद हुई थी। तब चीन ने तिब्बती आध्यात्मिक नेता की यात्रा पर भी आपत्ति जताई थी। वहीं, 15 स्थानों का दूसरा बैच 2021 में जारी किया गया था।

भारत की प्रतिक्रिया

भारत ने अरुणाचल प्रदेश में कुछ स्थानों के नाम बदलने के चीन के हालिया कदम को सिरे से खारिज कर दिया। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने एक बयान में कहा, ‘हमने ऐसी रिपोर्ट देखी हैं। यह पहली बार नहीं है, जब चीन ने इस तरह का प्रयास किया है। हम इसे सिरे से खारिज करते हैं।’ उन्होंने आगे कहा कि अरुणाचल प्रदेश भारत का अभिन्न अंग है और रहेगा। मनगढ़ंत नामों को बताने का प्रयास इस वास्तविकता को नहीं बदलेगा।

क्या है चीन का दावा?

2021 में चीन ने अरूणाचल प्रदेश की 15 जगहों के नाम बदले थे। इनमें से 8 रिहायशी इलाके थे, 4 पर्वत, 2 नदियां और एक पहाड़ों से निकलने वाला रास्ता था। चीन अरुणाचल के इलाकों के नाम क्यों बदलता है इसका अंदाजा वहां के एक रिसर्चर के बयान से लगाया जा सकता है।

2015 में चाइनीज एकेडमी ऑफ सोशल साइंस के रिसर्चर झांग योंगपान ने ग्लोबल टाइम्स को कहा था, ‘जिन जगहों के नाम बदले गए हैं वो कई सौ सालों से हैं। चीन का इन जगहों का नाम बदलना बिल्कुल जायज है। पुराने समय में जेंगनेन ( चीन में अरुणाचल को दिया नाम) के इलाकों के नाम केंद्रीय या स्थानीय सरकारें ही रखती थीं।

china
credit: google

इसके अलावा इलाके के जातीय समुदाय जैसे तिब्बती, लाहोबा, मोंबा भी अपने अनुसार जगहों के नाम बदलते रहते थे। जब जैंगनेम पर भारत ने गैर कानूनी तरीके से कब्जा जमाया तो वहां की सरकार ने गैर कानूनी तरीकों से जगहों के नाम भी बदल दिए।’

  • झांग ने ये भी कहा था कि अरुणाचल के इलाकों के नाम बदलने का हक केवल चीन को होना चाहिए।

सच में बदल जाएंगे नाम?

इसका जवाब है- नहीं। दरअसल, इसके लिए तय रूल्स और प्रॉसेस है। अगर किसी देश को, किसी जगह का नाम बदलना है तो उसे UN ग्लोबल जियोग्राफिक इन्फॉर्मेशन मैनेजमेंट को पहले से जानकारी देनी होती है। इसके बाद, UN के जियोग्राफिक एक्सपर्ट उस इलाके का दौरा करते हैं। इस दौरान प्रस्तावित नाम की जांच की जाती है। स्थानीय लोगों से बातचीत की जाती है। तथ्य सही होने पर नाम बदलने को मंजूरी दी जाती है और इसे रिकॉर्ड में शामिल किया जाता है।

अरुणाचल-अक्साई चिन पर विवाद

  • दोनों देशों में 3488 किलोमीटर लंबी LAC (लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल) को लेकर विवाद है। हालांकि चीन अरुणाचल प्रदेश वाले हिस्से को भी विवादित मानता है।
  • अरुणाचल प्रदेश की 1126 किलोमीटर लंबी सीमा चीन के साथ और 520 किलोमीटर लंबी सीमा के साथ मिलती है।
  • चीन का दावा है कि अरुणाचल पारंपरिक तौर पर दक्षिणी तिब्बत का हिस्सा है, वहीं भारत अक्साई चिन इलाके को अपना बताता है।
  • 1962 के युद्ध में चीन ने अक्साई चिन वाले हिस्से पर कब्जा कर लिया था।

दोनों देशों का रिश्ता

पिछले कुछ वर्षों में चीन और भारत के संबंध तनावपूर्ण रहे हैं। 2017 में भारत और चीन की सेनाओं के बीच डोकलाम को लेकर तनाव देखने को मिला था। पूर्वी लद्दाख में 2020 में गतिरोध देखने को मिला था। पिछले साल दिसंबर में अरुणाचल प्रदेश के तवांग सेक्टर में लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (एलएसी) पर भारत और चीन के सैनिकों के बीच खूनी झड़प हुई।

इसमें भारत के छह जवान घायल हुए, जबकि चीन के 19 से ज्यादा सैनिकों को गंभीर चोटें लगी। इसके अलावा व्यापार को लेकर भी चीन और भारत के बीच तनाव रहा है। भारत ने पिछले कई वर्षों में टिकटॉक समेत कई चीनी एप को बैन किया है।

भारत का बुनियदी ढांचों के विकास पर जोर 

हाल के वर्षों में चीन अक्सर उकसाने वाली कार्रवाई करता रहा है। भारत भी ड्रैगन को हर तरीके से पलटवार करता आया है। साथ ही भारत ने अरुणाचल प्रदेश में एलएसी से सटे इलाकों में, विशेष रूप से तवांग क्षेत्र में अग्रिम क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे को मजबूत किया है। वहीं, पूर्वी अरुणाचल में बुनियादी ढांचा तेजी से मजबूत कर रहा है।

china
credit: google

इस बुनियादी ढांचे के विकास में सड़कों से लेकर ग्रीन फील्ड एयरपोर्ट तक शामिल हैं, जिनसे देश की सीमा पर मौजूद इलाकों तक पहुंचना आसान हो जाएगा। चीन को भले ही यह खटक रहा हो, लेकिन भारत इस दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। इससे सीमा तक पहुंच में सुधार हो रहा है। इसका लाभ नागरिकों को मिलेगा ही, देश की सैन्य क्षमताएं भी बढ़ेंगी।
रक्षा मंत्रालय व सड़क परिवहन व राजमार्ग मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार, अरुणाचल फ्रंटियर हाईवे इन बड़े विकास कार्यों का अहम हिस्सा है।

इस पर साल 2022 में काम शुरू हुआ, इसे तेजी देने के लिए कई जगह भारी मशीनरी तैनात की गई। 2,000 किमी लंबी इस सड़क का निर्माण भूटान के निकट मार्गों से शुरू हुआ है। यह तवांग, ऊपरी सुबनसिरी, तूतिंग, मेचुका, ऊपरी सियांग, दिबांग घाटी, दसली, चगलागाम, किबिथू, डोंग से होती हुई म्यांमार सीमा के निकट विजयनगर पर पूरी होगी।

सेला टनल से घटेगी दूरी

अरुणाचल में सीमा सड़क संगठन द्वारा 13,700 फुट ऊंचाई पर बनाई जा रही सेला टनल जुलाई 2023 तक पूरी होने की उम्मीद है। प्रोजेक्ट के मुख्य इंजीनियर ब्रिगेडियर रमन कुमार ने बताया कि परियोजना में सिंगल-लेन सड़क डबल हो रही हैं, सेला बाईपास के लिए दो टनल और कई हेयरपिन-बैंड यानी तीखे मोड़ भी बन रहे हैं।

china
credit: google

475 मीटर और 1790 मीटर लंबी यह दो टनल तवांग से वेस्ट कामेंग को बांटने वाली सेला-चाब्रेला पर्वत पर बन रही हैं। इनसे दूरी नौ किमी घटेगी, जिससे करीब एक घंटे का समय भी बचेगा। पूरी होने पर सेला टनल विश्व की सबसे लंबी बाई-टनल कहलाएगी।

यह भी पढ़ें: चीन ने अरुणाचल के 11 जगहों के नाम बदले, जानिए क्या है सीमावर्ती राज्य का मसला

क्या है अरुणाचल का मसला?

भारत और चीन के बीच सीमा विवाद सालों से चलता आ रहा है। भारत के ऐसे कई इलाके हैं, जिन पर चीन अपना दावा करता है। इन्हीं में से एक है अरुणाचल प्रदेश, जो भारत का 24वां राज्य है और भौगोलिक दृष्टि से पूर्वोत्तर के राज्यों में यह सबसे बड़ा राज्य है।

अरुणाचल को बताया दक्षिणी तिब्बत

चीन कई सालों से इसके पीछे हाथ धोकर पड़ा है। असल में वो इसे अपना इलाका मानता है। चीन अरुणाचल प्रदेश को दक्षिणी तिब्बत बताता है। वैसे तो तिब्बत ने भी कई साल पहले खुद को स्वतंत्र राष्ट्र घोषित कर दिया था, लेकिन चीन इसको नहीं मानता और उस पर अपना अधिकार बताता है।

यह भी पढ़ें: See Why Russia Blamed the United States? Story of a Lie That Could Cause War!!

Tags: announcement on ArunachalArunachalArunachal newsArunachal PradeshChinaChina announcement on ArunachalChina-Arunachal issueCongress statement
ShareTweetPin
Ashvani Pal

Ashvani Pal

Recent Posts

  • Kisan News: युद्ध के खतरे ने बढ़ा दी किसानों की चिंता, मध्य प्रदेश में डीज़ल खरीदने उमड़ पड़ी
  • Methi ke Fayde: सेहत के लिए किसी वरदान से काम नहीं है मेथी, जानें इसके फायदे
  • Dwidwadash Yog: मार्च में सूर्य-मंगल के बीच बनेगा द्विद्वादश योग, तीन राशियों के जीवन में होगा उथल-पुथल
  • भारत में सोने की कीमतों में हल्की गिरावट, क्या यह खरीद का सही समय है?
  • Astro Tips: शनि है कमज़ोर तो काले-नीले रंग के कपड़ों से बना या दूरी, जानें क्यों?

Latest Breaking News, Entertainment, Politics and World News

Copyright © 2026 stackumbrella.

Navigate Site

  • About Us
  • Contact Us
  • RSS Feeds
  • Privacy Policy
  • Terms & Conditions

Follow Us

No Result
View All Result
  • होम
  • टॉप न्यूज़
    • ऑटोमोबाइल
    • बिज़नेस
    • जॉब वेकेन्सीस
    • वायरल वीडियो
    • गैजेट
  • राज्य
    • मध्य प्रदेश
    • उत्तर प्रदेश
    • छत्तीसगढ़
    • बिहार
    • गुजरात
    • महाराष्ट्र
  • एग्रीकल्चर
    • फार्मर्स
  • स्पोर्ट्स
    • IPL 2024
    • IPL 2023
  • मनोरंजन
    • ‎बॉलीवुड
    • हॉलीवुड
  • अन्‍य
    • धार्मिक
    • ट्रेंडिंग
    • हैल्‍थ
    • इन्स्पिरेशन
    • गेमिंग
    • ट्रेवल
  • वेब स्टोरीज
  • इंग्लिश

Copyright © 2026 stackumbrella.