मध्य प्रदेश में शहरों के बाद अब कोरोना ग्रामीण क्षेत्रों में भी हाहाकार मचा रहा है। दरअसल ग्रामीण क्षेत्रों में लॉक डाउन के दौरान बड़ी संख्या में शहरों से लोगों के पलायन के कारण कोरोना संक्रमण तेजी से बड़ा है। वहीं ग्रामों में कोरोना के प्रति जागरूकता न होने के कारण अक्सर लोग केस ज्यादा बिगड़कर गंभीर हालत में अस्पताल पहुंच रहे हैं। राजधानी भोपाल, रायसेन, विदिशा और होशंगाबाद सहित प्रदेश के दूर-दराज स्थित ग्रामीण क्षेत्रों में भी हालात गंभीर होते जा रहे हैं।
वहीं पहली बार सरकार ने भी माना है कि शहरों के साथ कोरोना ने ग्रामीण क्षेत्रों में भी अपनी पकड़ बना ली है। चिकित्सा शिक्षा मंत्री विश्वास कैलाश सारंग की मानें तो शहरों में पॉजिटिविटी दर बढ़ने का एक कारण ग्रामीण क्षेत्रों में कोरोना पेशेंट का बढ़ना है। इसलिए अब सरकार गांवों में भी जागरूकता कार्यक्रम चलाने की योजना बना रही है। इसके लिए ग्रामीणों की सहमति लेकर गांवों में भी कोरोना कर्फ्यू लगाया जाएगा। इसको लेकर जल्दी ही एक प्लान तैयार किया जाएगा।
सर्दी जुकाम होने पर नहीं दिखाते डॉ. को, गांव में 90 प्रतिशत लोग नहीं लगाते मास्क :
पर्यावरणविद आनंद पटेल की मानें तो कोरोना को लेकर ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता नहीं है। शादियों के कारण वैसे ही गांवों में चहल पहल थी। उस पर कोरोना संक्रमण और शहर से गांव लौटे कई लोगों ने इस संक्रमण को हर गांव तक पहुंचा दिया है। उसके बावजूद सरकार ने ग्रामों के लिए कोई जागरूकता कार्यक्रम नहीं चलाए हैं।

जिसके कारण बुखार, खांसी, सर्दी जुकाम और कोविड के अन्य लक्षण होने के बाद भी ग्रामवासी पास के चिकित्सालय में जांच के लिए नहीं जा रहे हैं। जब संक्रमण फेफड़ों तक अपनी पहुंच बना रहा है, उसके बाद ग्रामीण अस्पताल पहुंचते हैं। कई बार संक्रमण ज्यादा बढ़ने के कारण लोगों की हालत गंभीर भी हो रही है और कुछ केसेस में पेशेंट की मौत भी हो रही है। यदि पिछले 15 दिनों पर नजर डालें तो कई युवाओं ने जिनकी उम्र 25 साल या उससे कम थी, उन्होंने भी अपनी जान गवां दी है।
लापरवाही ने उजाड़ दिए पूरे परिवार, कई जगहों पर युवाओं की भी मौत:
रायसेन की बरेली तहसील स्थित महेश्वर ग्राम में इसी सप्ताह 13 लोगों की मौत कोविड संक्रमण के कारण हुई है। पुरैना ग्राम में भी एक ही परिवार में 5 लोगों की मौत कोविड के कारण हुई है। यहां भी जागरूकता की कमी के कारण पूरा परिवार काल के गाल में समां गया। साथ ही पिपरिया के सेमरी तला और सांडिया में भी कोविड के कारण मौतों की खबरें है। इन जगहों पर तो 25 साल से कम उम्र के युवा भी असमय मौत का शिकार हुए हैं।

वहीं छिंदवाड़ा के पास जुन्नारदेव में भी संक्रमण ने तेज़ी से अपने पांव पसारे हैं। सिवनी में ग्रामीण क्षेत्रों में बड़े स्तर पर बैरिकेडिंग कर दी गई है। गांव के अलावा बाहर का कोई भी व्यक्ति गांव में प्रवेश नहीं कर पा रहा है। पंचा मदी, पिपरिया मेहरा, पंचा खिखरिया सहित दर्जनों गांवों में प्रशासन के कहने पर बैरिकेडिंग कर दी गई है। वहीं पिपरिया के एक पास पछुआ गांव के निवासी एक सज्जन पिछले 15 दिनों से बुखार होने के बाद भी डॉक्टर को दिखाने नहीं गए।
गत दिनों उनकी भी मौत हो गई। बड़वानी, खरगौन, मुरैना, बड़वाह, खंडवा, अलीराजपुर में भी कुछ इसी तरह के हालात बन रहे हैं। वहीं इंदौर के पास रहने वाले सामाजिक कार्यकर्ता हेमंत पटेल ने बताया कि इंदौर आसपास के कई शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों में भी हालात तेजी से बिगड़ चुके हैं। अब लोगों को जागरूक करने की जरूरत है।
पहले चलाए जाने थे जागरूकता कार्यक्रम, अब पानी सर के ऊपर :
समाजसेवी प्रशांत वर्मा की मानें तो राजगढ़ और उसके आसपास भी हालात बहुत खराब हैं। प्रशांत की मानें तो ग्रामीण आज भी सरकार की हर गाइडलाइन का सख्ती से पालन करते हैं। ऐसे में लोगों को कोविड के प्रति जागरूक करने में सरकार ने खासी देर कर दी है। इसके कारण हजारों लोग असमय ही मरेंगे।
जब बीमारी पूरी तरह से प्रदेश पर हावी हो गई है। तब जागरूकता कार्यक्रम चलाने का उद्देश्य अपने आप में सवालों के घेरे में है। पिछले 6 माह में यदि जागरूकता कार्यक्रम अच्छे से चलाए जाते तो बीमारी से होने वाली मौतों को काफी हद तक कम किया जा सकता था।















