1990 के समय में कौन था देश का प्रधानमंत्री जिन्‍होनें नहीं की कश्‍मीरी पंडितो की मदद

विवेक अग्निहोत्री की नई फिल्म "द कश्मीर फाइल्स (The Kashmir Files)" इन दिनों पूरी दुनिया में चर्चा का विषय बनी हुई है इसकी वजह है कश्‍मारी पंडितो पर हुए अत्‍याचार की सच्‍ची कहानी। यह फिल्‍म लोगों को 1990 के समय हुए कश्‍मीरी पंडितो पर हुए अत्‍याचार के बारे में बताती है। इसके अलावा एक और बात है जिस पर यह फिल्‍म नजर डालती है वह है 1990 के समय देश की सरकार जिसने उस समय कश्‍मीर में पंडितो को बिना कोई मदद करे उन्‍हें मरने के लिए छोड दिया।

1990 के समय में कौन था देश का प्रधानमंत्री जिन्‍होनें नहीं की कश्‍मीरी पंडितो की मदद
कश्‍मीरी पंडितो

विवेक अग्निहोत्री की नई फिल्म "द कश्मीर फाइल्स (The Kashmir Files)" इन दिनों पूरी दुनिया में चर्चा का विषय बनी हुई है इसकी वजह है कश्‍मारी पंडितो पर हुए अत्‍याचार की सच्‍ची कहानी। यह फिल्‍म लोगों को 1990 के समय हुए कश्‍मीरी पंडितो पर हुए अत्‍याचार के बारे में बताती है। इसके अलावा एक और बात है जिस पर यह फिल्‍म नजर डालती है वह है 1990 के समय देश की सरकार जिसने उस समय कश्‍मीर में पंडितो को बिना कोई मदद करे उन्‍हें मरने के लिए छोड दिया।

फिल्‍म के अनुसार ऐसा माना जा रहा है कि उस समय कश्‍मीरी पंडितो पर जो अत्‍याचार हुए उसके ना सिर्फ कश्‍मीरी पंडित जिम्‍मेदार थे बल्कि भारत के प्रधानमंत्री और उस समय की सरकार भी उतनी ही जिम्‍मेदार थी। आइए जानते हैं कौन थे उस समय के प्रधानमंत्री और क्‍यों उन्‍होनें कश्‍मीरी पंडितों मदद नहीं की।

कौन थे उस समय के प्रधानमंत्री

जब कश्‍मीरी जेनोसाइड हुआ उस समय देश की गद्दी प्रधानमंत्री पी वी नरसिंहा राव संभाल रहे थे। नेशनल फ्रंट (NF) जनता दल के राजनीतिक दलों का एक गठबंधन था, जिसने 1989 और 1990 के बीच N. T. रामा राव के नेतृत्व में भारत की सरकार बनाई, जिन्हें NTR के नाम से जाना जाता है, जो राष्ट्रीय मोर्चे के अध्यक्ष और V. P. सिंह के संयोजक के रूप में जाने जाते हैं। गठबंधन के प्रधान मंत्री वी. पी. सिंह उस समय भारत की सत्‍ता संभाल रहे थे।

सरकार की रही ये गलती

कश्‍मीरी पंडितो के हत्‍याकांड के समय उस समय की सरकार को अगर दोषी ठहराया जाए तो यह बुरा नहीं होगा। कांग्रेस सरकार का उस समय के कश्‍मीरी कमांडर बिट्टा कराटे का समर्थन करना ही देशद्रोह के बराबर कहा जा सकता है। कश्मीर में सत्ता में आने के लिए उसका सरकारों को गिराना, फिर टाईअप करके चुनावों में धांधली करके जीतना, 19 जनवरी के कांड के लिए जिम्मेदारा बिट्टा कराटे का नेशनल टीवी पर इंटरव्यू में खुलेआम 20 हत्याओं को कुबूलना, फिर भी छुट्टा घूमना, यासीन मलिक का मकबूल बट को फांसी देने वाले जज नीलकंठ गंजू की हत्या का बीबीसी के शो हार्ड टॉक में कुबूलनामे के बावजूद मनमोहन सिंह का उसे मिलने बुलाना, राजीव गांधी की भुट्टो से दोस्ती के चलते नजीबुद्दौला की चेतावनियों को नजरअंदाज करना और अब केरला कांग्रेस का कश्मीरी पंडितों से ज्यादा मुस्लिमों के मरने वाले ट्वीट से आप कांग्रेस का गुनाह समझ सकते हैं।

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