गोदी मीडिया क्या है, कौन- किसे और क्यों गोदी मीडिया कहता है?

चूंकि लंबे समय से मीडिया में एक नाम  बहुत प्रसिद्ध है, खासकर न्यूज चैनलों पर जहां एंकर आमतौर पर दूसरे न्यूज चैनलों पर गोदी मीडिया होने का आरोप लगाते हैं। लेकिन एंकर से ज्यादा राजनेता इस शब्द का इस्तेमाल करते हैं जो देखने में अच्छा नहीं लगता और स्लैंग जैसा ज्यादा होता है। आइए यहां जानते हैं कि गोदी मीडिया क्या है।

गोदी मीडिया क्या है, कौन- किसे और क्यों गोदी मीडिया कहता है?

चूंकि लंबे समय से मीडिया में एक नाम  बहुत प्रसिद्ध है, खासकर न्यूज चैनलों पर जहां एंकर आमतौर पर दूसरे न्यूज चैनलों पर गोदी मीडिया होने का आरोप लगाते हैं। लेकिन एंकर से ज्यादा राजनेता इस शब्द का इस्तेमाल करते हैं जो देखने में अच्छा नहीं लगता और स्लैंग जैसा ज्यादा होता है। आइए यहां जानते हैं कि गोदी मीडिया क्या है।

गोदी मीडिया का क्या मतलब है?

पहले आपको बता दें कि डिक्शनरी में ऐसा कोई शब्द नहीं है। ये शब्द एक लोकप्रिय समाचार एंकर रवीश कुमार द्वारा बनाया गया है। उनकी परिभाषा के अनुसार गोदी मीडिया केवल भाजपा सरकार के पक्ष में ही चुनिंदा खबरें दिखाता है। अब, जानते हैं कि ये मोदी के साथ क्यों तुकबंदी करता है।

‘गोदी मीडिया’ शब्द की उत्पत्ति कैसे हुई?

इस शब्द की उत्पत्ति प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सत्ता में आने के बाद हुई थी। जिसमें की उन्होंने ये दावा किया था की कुछ मीडिया चैनल हमेशा अपनी टीआरपी बढ़ाने के लिए मोदी सरकार के पक्ष में बात करते हैं।

गोदी मीडिया कौन हैं?

यदि आप शब्द को समझ गए हैं और नियमित रूप से समाचार देखते हैं, तो आप आसानी से उत्तर दे सकते हैं। टीवी चैनल जैसे सुदर्शन समाचार, रिपब्लिक भारत, आज तक, रिपब्लिक टीवी, इंडिया टीवी, आदि को गोदी मीडिया कहा जाता है।

गोदी मीडिया शब्द कैसे प्रसिद्ध हुआ?

इस शब्द को 2018 में बहुत लोकप्रियता मिली जब विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस के दिन कई पत्रकारों ने ऐसे चैनलों का विरोध किया। दिल्ली में "गोदी मीडिया हटाओ, लोकतंत्र बचाओ" का हवाला देते हुए एक विशाल प्रदर्शन आयोजित किया गया था। दूसरी बार ये किसान विरोध और नागरिकता संशोधन अधिनियम के विरोध के दौरान सुर्खियों में आया।

कई प्रसिद्ध एंकर और पत्रकार अपने प्रतिस्पर्धियों को नकली समाचार फैलाने और भाजपा सरकार की प्रशंसा करने वाली सामग्री दिखाने के लिए दोषी ठहराते हैं। वे केवल अपने फायदे के लिए अपनी खामियों को छिपाते हैं। राजदीप सरदेसाई ने कहा था कि पत्रकारिता अब एक गोद का कुत्ता बन गई है जब ये एक प्रहरी होने के लिए जिम्मेदार है।

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