श्रीलंका नामकरण और उत्पन्न ऐतिहासिक भ्रम: हम सीलोन देश का नाम श्रीलंका (Sri Lanka) 1978 में जानबूझकर पर्यटन को बढ़ाने के लिए रखे जाने से भ्रमित है। वर्तमान श्री लंका , पूर्व में सिंघल द्वीप फिर सीलोन और 1978 से श्री लंका नाम पड़ा।
भावनाएँ और ऐतिहासिक तथ्यों को समझने की आवश्यकता
हिन्दू लोग बहुत भावुक होते है उन्हें अपने इतिहास और गौरव के केंद्र परम ब्रह्म राम के संघर्ष और पराक्रम पर नाज है और होना भी चाहिए । लेकिन असत्य को सत्य क्यो मान रहे है।
ग्रंथों में ‘लंका’ और ‘श्रीलंका (Sri Lanka)’ का स्पष्ट अंतर

हमारे धार्मिक ग्रंथों पुराणों में लंका नाम है न कि श्री लंका।
सूर्य सिद्धांत में लंका और सिंघल द्वीप का अलग उल्लेख
सूर्य सिद्धान्त में 8 उप द्वीपो की चर्चा है जिसमे सिंघल द्वीप और लंका अलग अलग है। इनकी स्थित भी बतलाई गई है ।
इक्वेटर पर स्थित प्राचीन लंका
लंका निरक्ष रेखा पर थी अर्थात शून्य डिग्री अक्षांश अर्थात इक्वेटर पर थी।
सुमेरु पर्वत और उज्जैन की सीध में लंका का स्थान
सुमेरु पर्वत जो उत्तराखंड से लेकर तिब्बत तक फैला है में उत्तराखंड से सीध में रोहतक ,कुरुक्षेत्र , उज्जैन की सीधी रेखा में लंका थी। उज्जैन , पृथ्वी की नाभि अर्थात शून्य डिग्री देशांतर माना जाता है। यही से गणना होती है। अब अंग्रेजो के द्वारा ग्रीन विच लाइन से होती है जिसमे उज्जैन 73 डिग्री में है ।
मालद्वीव को लंका मानने का भूगोलिक कारण
मालद्वीव ही लंका है क्योंकि वह रामेश्वरम से 100 योजन अर्थात 1200 किलोमीटर से कुछ अधिक है किंतु 0 डिग्री अक्षांश और 73 डिग्री देशांतर के आस पास स्थित है।
रामचरितमानस में 100 योजन दूरी का वर्णन
राम चरित मानस में ही लिखा है जो नाघे सत योजन सागर करे सो राम काज मति नागर अर्थात जो 100 योजन समुद्र को जो उड़कर पार चला जाये वो ही राम का काम अर्थात सीता जी का पता लगा पायेगा।
वानरों की योजन क्षमता और लंका की दूरी का वास्तविक विश्लेषण
वाल्मीक रामायण और रामचरित मानस में जब वानरों के बल का वर्णन होता है तो हर वानर 10 योजन कूद सकता था। यह सबसे कम बल था। 90 योजन वाले भी थे । क्या ये श्री लंका 100 योजन दूर है ? नही है ये तो केवल 4 योजन दूर है । लंका , लंबाई में भी 100 योजन लंबी थी। ये श्री लंका 25 योजन से अधिक नही है।
गलत स्थल पर आस्था रखने का परिणाम
आस्था गलत स्थल पर रखना भी तो आपको अंधेरे में रख रहा है । इसलिए सत्य स्थल की जानकारी जरूरी है।
महाभारत में सहदेव और विभीषण का संदर्भ
महाभारत काल मे युधिष्ठिर के राजसूय यज्ञ में विश्व विजय जे लिए सहदेव को दक्षिण दिशा दी गई थी । उनको लंका से कर लेना था उस समय बिभीषन थे। तब उनको अपने मायावी भतीजे घटोत्कच को बुलाना पड़ा था । वो उड़कर गया था। और बिभीषन से कर लेकर आया था।
मालद्वीव में प्राचीन लंका के संकेत और जनश्रुतियाँ
अर्थात प्राचीन लंका वास्तव में मालद्वीव में थी। वहां पर जनश्रुति है कि एक डेविल किंग ने राजकुमारी का अपहरण किया था। मॉलद्वीव में अगस्त्य ऋषि का भी स्थान है जो लंका में था।
द्वारका डूबने के साथ मालदीव का डूबना
जब द्वारका डूबी तब मॉलदीव भी 150 मीटर से अधिक डूब गया।
सही लंका की पहचान का निवेदन
इज़लिये निवेदन है कि सही लंका को जाने।
रामसेतु: तैरता हुआ सेतु या प्राकृतिक संरचना?
फिर भगवान राम ने जो सेतु बनाया था वो तैरता हुआ था न कि जमीन के तल से बना कोई पुल था। आप जिसे राम सेतु कह रहे है वो प्राकृतिक संरचना है न कि राम द्वारा निर्मित। हाँ यह सत्य है कि राम सेतु रामेश्वरम से शुरू हुआ था और मॉलदीव तक 100 योजन था । लेकिन प्रभु राम ने लौटते वक्त तोड़ दिया था बिभीषन के कहने पर ।
राजनैतिक उपयोग और शास्त्रसम्मत चुनौती
सुब्रमण्यम स्वामी , राजनैतिक फायदे के लिए इशू बनाते रहते है । शास्त्र सम्मत यह सही नही है ।
मैं इसको चैलेंज करता हूँ ।
– डॉ राम गोपाल सोनी (Indian forest services
Officer)







