
जबलपुर, मध्य प्रदेश: मध्य प्रदेश के जबलपुर जिले से स्वास्थ्य व्यवस्था से जुड़ा एक गंभीर मामला सामने आया है। बेलखाड़ू क्षेत्र में स्थित अश्वनी अस्पताल की जांच के दौरान एक्सपायरी दवाएं मिलने से मरीजों की सुरक्षा को लेकर सवाल उठने लगे हैं। एक युवक की मौत के बाद अस्पताल को सील किया गया था। इसके बाद 13 अक्टूबर को अधिकारियों की टीम ने अस्पताल में दवाओं की जांच की, जिसमें कई तरह की दवाएं मिलीं।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, औषधि निरीक्षक, पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की टीम ने अस्पताल में जांच की। इस दौरान 23 प्रकार की एलोपैथिक दवाएं और ग्लूकोज की ड्रिप मिली। इनमें कुछ दवाएं एक्सपायरी डेट पार कर चुकी थीं। अधिकारियों ने करीब 12 हजार रुपये की दवाएं जब्त कीं और जरूरी दस्तावेजी कार्रवाई की।
जांच में यह भी सामने आया कि अस्पताल में दवाएं रखने के लिए जरूरी ड्रग लाइसेंस और अस्पताल के पंजीकरण को लेकर सवाल हैं। अधिकारियों ने दवाओं को जब्त करने के बाद अस्पताल को दोबारा सील कर दिया।
यह मामला उस समय सामने आया, जब अश्वनी अस्पताल में इलाज कराने पहुंचे युवक की मौत हो गई। रिपोर्ट्स के अनुसार, युवक को पेट में दर्द की शिकायत के बाद अस्पताल ले जाया गया था। इलाज के दौरान उसे ड्रिप और इंजेक्शन दिए गए थे।
परिजनों ने आरोप लगाया कि युवक को जो ग्लूकोज की ड्रिप दी गई थी, उसकी एक्सपायरी डेट नवंबर 2025 थी। घटना के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू की और इलाज में इस्तेमाल हुई ड्रिप, इंजेक्शन से जुड़ी सामग्री और अन्य चीजें जब्त कीं।
हालांकि, युवक की मौत का वास्तविक चिकित्सकीय कारण अभी जांच का विषय है। केवल एक्सपायरी दवा मिलने के आधार पर यह कहना सही नहीं होगा कि मौत उसी के कारण हुई।
जांच के दौरान अस्पताल के पंजीकरण और इलाज करने वाले व्यक्ति की योग्यता को लेकर भी सवाल उठे हैं। मीडिया रिपोर्ट्स में बताया गया है कि अस्पताल के संचालन और वहां एलोपैथिक इलाज किए जाने से जुड़े दस्तावेजों की जांच की जा रही है।
ऐसे मामलों में यह पता लगाना जरूरी है कि मरीजों का इलाज किसकी देखरेख में किया जा रहा था, दवाएं कहां से लाई गई थीं और एक्सपायरी दवाएं अस्पताल में कैसे रखी हुई थीं। इन सवालों के जवाब जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेंगे।
अस्पताल में इलाज कराने वाले मरीज और उनके परिवार डॉक्टरों पर भरोसा करके पहुंचते हैं। ऐसे में दवाओं की एक्सपायरी डेट, उनकी सही स्टोरेज और इलाज करने वाले व्यक्ति की योग्यता का ध्यान रखना बेहद जरूरी है।
यह मामला एक बार फिर बताता है कि अस्पतालों में दवाओं की नियमित जांच और स्वास्थ्य विभाग की निगरानी कितनी महत्वपूर्ण है। खासकर छोटे शहरों और ग्रामीण इलाकों में मरीजों को इलाज देने वाली स्वास्थ्य सुविधाओं में जरूरी नियमों का पालन होना चाहिए।
इस मामले में आगे की जांच के दौरान दवाओं के स्रोत, अस्पताल के जरूरी दस्तावेजों और युवक को दिए गए इलाज की जानकारी महत्वपूर्ण होगी। साथ ही यह भी स्पष्ट करना होगा कि अस्पताल में मिली एक्सपायरी दवाओं और युवक की मौत के बीच कोई चिकित्सकीय संबंध था या नहीं।
फिलहाल, मामले में जांच जारी है। अधिकारियों की जांच और संबंधित रिपोर्ट सामने आने के बाद ही पूरे मामले की स्थिति स्पष्ट हो पाएगी।