Justice UU Lalit: भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश एनवी रमन्ना के 26 अगस्त को रिटायर होने के अगले दिन ही 27 अगस्त को भारत के नए मुख्य न्यायाधीश के रुप में उदय उमेश ललित को राष्ट्रपति भवन में शपथ दिलाई गयी है। यह भारत के मुख्य न्यायाधीश के पद पर केवल 74 दिन ही काम करेंगे।
#WATCH | President Droupadi Murmu administers the oath of Office of the Chief Justice of India to Justice Uday Umesh Lalit at Rashtrapati Bhavan pic.twitter.com/HqayMJDwBB
— ANI (@ANI) August 27, 2022
इनका परिवार लगभग 100 साल से वकालत का विशेषज्ञ रहा है इनके दादा रंगनाथ ललित भी महाराष्ट्र के सेलापुर जिले के नामी वकीलों में से एक थे। इनके पिता यू. आर. ललित बॉम्बे हाई कोर्ट में अतिरिक्त जज रह चुके है और देश के बड़े वकीलों में गिनती होती है।
74 दिन का कार्यकाल होगा
क्राइम लॉ में माहिर है भारत के नए चीफ जस्टिस उदय उमेश ललित, जो की 8 नवंबर तक भारत के चीफ जस्टिस के पद पर रहेंगे। यह भारत के दूसरे ऐसे चीफ जस्टिस हैं जो सीधे वकील के पद से मुख्य न्यायाधीश बने है। इनसे पहले मरहूम एस एम सीकरी ने साल 1971 में यह उपलब्धि अपने नाम की थी।
मुख्य न्यायाधीश की विशेषता

चीफ जस्टिस उदय उमेश ललित ने ऐसे कई मुकदमें लड़े है जिनकी वजह से इनकी एक अलग पहचान बन गयी है। इन्हें सोम्य स्वभाव के लिए भी जाना जाता है।
चीफ जस्टिस कॉन्फ्लिक्ट ऑफ इंटरेस्ट के लिए मुख्य तौर पर जाना जाता है, यानि की मुकदमे की एक पार्टी से कोई पुराना सरोकार होना। ऐसे कई मुकदमे है जिनसे चीफ जस्टिस अलग हो गए थे।
इनमें अयोध्या विवाद, मुंबई ब्लास्ट केस, मृत्युदंड की सज़ा को चुनौती देने वाली याकूब मेनन की पुनर्विचार याचिका, शिक्षक भर्ती घोटाले में ओम प्रकाश चौटाला की याचिका और सूर्यानेल्ली रेप केस की अपील याचिका पर सुनवाई जैसे मामले शामिल हैं।
हाईकोर्ट में वकालत

चीफ जस्टिस वकील के रुप में आपराधिक मामलों के विशेषज्ञ रहे है और राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण, नालासा का कार्यकारी अध्यक्ष भी बनाया गया था।
चीफ जस्टिस उदय उमेश ललित ने 1983 से लेकर 1985 तक बॉम्बे हाई कोर्ट से अपनी वकालत की शुरुआत की थी।
1986 से लेकर 1992 तक उन्होंने पूर्व सॉलिसिटर जनरल सोली सोराबजी के साथ काम किया।
साल 2004 में उन्हें सुप्रीम कोर्ट का सीनियर एडवोकेट नियुक्त किया गया।
2 जी घोटाले के सभी मामलों में केंद्रीय जांच ब्यूरो की मदद से सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें पब्लिक प्रॉसीक्यूटर नियुक्त किया गया था।















