कोरोना का नया स्ट्रेन अब पहले से ज्यादा संक्रामक, ताकतवर और बहरूपिया हो गया है। यही कारण है कि भोपाल में रोजाना लोगों के संक्रमित होने के 1500 से ज्यादा केस सामने आ रहे हैं और बड़ी संख्या में लोगों की मौत भी हो रही है। नए मामलों में वायरस में म्यूटेशन के कारण 20 फीसदी से ज्यादा मरीजों में आरटीपीसीआर और एंटीजन की जांच रिपोर्ट नेगेटिव आ रही है। इसके बावजूद पेशेंट्स में सारे लक्षण कोरोना के नजर आ रहे हैं।
इस तरह के पेशेंट्स सीरियस होकर अस्पतालों में एडमिट भी हो रहे हैं। ऐसे लोगों की जांच जीन एक्सपर्ट और सीटी स्कैन के माध्यम से की जा रही है, लेकिन ऐसे में लापरवाही करने वाले लोगों के फेफड़े कोरोना संक्रमण के कारण बुरी तरह प्रभावित हो रहे हैं।लक्षण होने पर रिपोर्ट नेगेटिव आए तो भी करें कोरोना प्रोटोकॉल फॉलो : विशेषज्ञों की राय है कि यदि कोरोना के लक्षणों के बावजूद आरटीपीसीआर और एंटीजन रिपोर्ट नेगेटिव आए तो किसी भी तरह की लापरवाही करने से बचें। ऐसे मरीजों को कोरोना प्रोटोकॉल को फॉलो करते हुए अपना पूरा इलाज करना चाहिए। चेस्ट का सीटी स्कैन करवाना चाहिए और यदि जरा सी भी गड़बड़ लगे तो हॉस्पिटल में एडमिट हो जाना चाहिए।

डॉक्टर्स को भी ऐसे पेशेंट्स की अन्य जांचें करवाकर कोरोना की पुष्टि करनी चाहिए। और यदि मरीज को तकलीफ हो तो उन्हें अस्पताल में एडमिट कर मेडिकल सहायता देनी चाहिए।
आरटीपीसीआर रिपोर्ट नेगेटिव होने पर अस्पताल नहीं करते मरीज को भर्ती :
शहर में ऐसे कई मामले हैं, जिनमें पेशेंट ने कोरोना के लक्षण सामने आने के बाद आरटीपीसीआर टेस्ट करवाया, लेकिन रिपोर्ट नेगेटिव आई। लेकिन कुछ दिन बाद सांस फूलने और अन्य समस्याएं सामने आने के बाद चेस्ट में गंभीर इन्फेक्शन सामने आया। वहीं राजधानी के कोविड अस्पतालों में एडमिट होने के लिए आरटीपीसीआर और एंटीजन रिपोर्ट पॉजिटिव होना आवश्यक है।ऐसे में मरीजों को एडमिट होने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। विशेषज्ञों की मानें तो ऐसे मरीजों के परिजनों को पेशेंट को कोविड पीड़ित मान अस्पताल में एडमिट करवा देना चाहिए। वहीं अस्पतालों को भी ऐसे पेशेंट्स को एडमिट करने से मना नहीं करना चाहिए।
म्यूटेशन, सैंपल लेना, कलेक्शन इसकी बड़ी वजह :
इस पूरे मामले में टीबी चेस्ट विशेषज्ञ डॉ. देवेंद्र गोस्वामी का कहना है कि सर्दी, खांसी, बुखार, बदन दर्द, सर दर्द या कोई भी कोरोना से जुड़ा लक्षण नजर आने पर और आरटीपीसीआर नेगेटिव होने पर किसी भी तरह की लापरवाही न करें। भोपाल में ऐसे सैकड़ों मरीज हैं, जिनमें सीटी स्कैन से संक्रमण का पता चला रहा है। ऐसे लोगों की जांच रिपोर्ट नेगेटिव ही बनी रहती है।नेगेटिव रिपोर्ट वाले मरीज बड़ी संख्या में अस्पतालों में भर्ती हैं और वायरस म्यूटेशन इसकी बड़ी वजह है। वहीं जांच रिपोर्ट यदि नेगेटिव है तो इसमें सैंपल लेना, कलेक्शन और इसे सही तरह से लैब में पहुंचाने का भी बड़ा महत्व है। कई बार इन कारणों से भी रिपोर्ट नेगेटिव आ जाती है।
जीन एक्सपर्ट में सामने आती है सही जानकारी : वहीं एम्स भोपाल के निदेशक डॉ. सरमन सिंह की मानें तो वायरस में म्यूटेशन, सैंपलिंग और जांच की क्वालिटी ठीक न होने से कई लोगों की रिपोर्ट नेगेटिव आ रही है। लेकिन जीन एक्सपर्ट और आरटीपीसीआर में लोगों की रिपोर्ट पॉजिटिव आ रही है।

एम्स में कई ऐसे पेशेंट्स भर्ती हैं, जिनकी आरटीपीसीआर रिपोर्ट नेगेटिव थी। लेकिन सीटी स्कैन और अन्य जांचें करने पर उनके संक्रमित होने की जानकारी मिली। अब अस्पताल में उन सबका इलाज चल रहा है।