भारत ने मिडिल ईस्ट संकट और होर्मुज स्ट्रेट और रेड सी में एनर्जी सप्लाई और समुद्री स्थिरता पर इसके असर पर गहरी चिंता जताई है। साथ ही, ईरान और यूनाइटेड अरब अमीरात UAE समेत BRICS देशों से अभूतपूर्व जियोपॉलिटिकल और आर्थिक अनिश्चितता, साथ ही “एकतरफा दबाव वाले” प्रतिबंधों से निपटने के लिए “प्रैक्टिकल तरीके” बनाने की अपील की है।
BRICS देशों के विदेश मंत्रियों, ईरानी काउंटरपार्ट सैयद अब्बास अराघची और UAE के विदेश राज्य मंत्री खलीफा शाहीन अल मरार (Khalifa Shaheen Al Marar) को संबोधित करते हुए, विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा, “स्थिरता चुनिंदा नहीं हो सकती, और शांति टुकड़ों में नहीं हो सकती।”
Jaishankar ने इस बात पर ज़ोर दिया कि “होर्मुज स्ट्रेट और रेड सी समेत इंटरनेशनल जलमार्गों से सुरक्षित और बिना रुकावट वाला समुद्री बहाव, ग्लोबल आर्थिक भलाई के लिए ज़रूरी है”। किसी भी देश का नाम लिए बिना, मंत्री ने कहा कि संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान इंटरनेशनल संबंधों का आधार होना चाहिए, और कहा कि “बातचीत और डिप्लोमेसी” ही संघर्ष को सुलझाने का एकमात्र टिकाऊ रास्ता है।
उन्होंने कहा कि भारत तनाव कम करने की कोशिशों में अच्छा योगदान देने और स्थिरता वापस लाने के मकसद से शुरू की गई कोशिशों को सपोर्ट करने के लिए तैयार है।
साथ ही, उन्होंने यह भी कहा कि शांति “इंटरनेशनल कानून को बनाए रखने, आम लोगों की सुरक्षा करने और पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाने से बचने के लिए ज़रूरी है।”
विदेश मंत्री (Foreign Minister) ने नए सदस्यों के लिए अलग-अलग ज़रूरी मुद्दों पर BRICS के आम सहमति वाले सिस्टम की “पूरी तरह” तारीफ़ करने और उसे मानने की अहमियत पर भी ज़ोर दिया। यह बात मिडिल ईस्ट विवाद को लेकर UAE और ईरान के बीच तीखे मतभेदों के बीच आई है।

BRICS सम्मेलन के दौरान विदेश मंत्री एस जयशंकर ने पश्चिम एशिया के मौजूदा संकट को लेकर और भी कई अहम मुद्दे उठाए। उन्होंने कहा कि मिडिल ईस्ट में जारी तनाव सिर्फ ऊर्जा सप्लाई और समुद्री व्यापार तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका असर मानवीय स्थिति और वैश्विक सुरक्षा पर भी पड़ रहा है।
जयशंकर ने गाजा की स्थिति पर गंभीर चिंता जताते हुए कहा कि वहां का संघर्ष “grave humanitarian implications” पैदा कर रहा है। उन्होंने स्थायी युद्धविराम, मानवीय सहायता की निर्बाध पहुंच और शांतिपूर्ण समाधान की जरूरत पर जोर दिया। भारत ने फिलिस्तीन मुद्दे पर अपने पुराने रुख को दोहराते हुए Two-State Solution का समर्थन भी किया।
इसके अलावा भारत ने आतंकवाद पर भी सख्त संदेश दिया। बिना किसी देश का नाम लिए जयशंकर ने कहा कि cross-border terrorism अंतरराष्ट्रीय संबंधों के मूल सिद्धांतों का उल्लंघन करता है और आतंकवाद के खिलाफ “Zero Tolerance” पूरी दुनिया के लिए समान मानक होना चाहिए।
उन्होंने लेबनान, सीरिया, सूडान, यमन और लीबिया जैसे देशों की स्थिति पर भी चिंता जताई और कहा कि इन संकटों को हल करने के लिए sustained diplomatic engagement जरूरी है।
BRICS देशों को संबोधित करते हुए जयशंकर ने “unilateral coercive sanctions” यानी एकतरफा प्रतिबंधों पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि ऐसे प्रतिबंध विकासशील देशों को असमान रूप से प्रभावित करते हैं और बातचीत की जगह दबाव नहीं ले सकता।
विदेश मंत्री ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में सुधार की मांग भी दोहराई। उन्होंने कहा कि मौजूदा वैश्विक चुनौतियों के बीच multilateral system कमजोर पड़ रहा है और Security Council reform में लगातार देरी अब दुनिया के लिए महंगी साबित हो सकती है।
भारत ने साफ किया कि वह तनाव कम करने और क्षेत्रीय स्थिरता बहाल करने की हर रचनात्मक कोशिश में योगदान देने के लिए तैयार है।













