मध्य प्रदेश में जैसे जैसे कोरोना संक्रमण अपने पैर पसार रहा है। वैसे वैसे ऑक्सीजन की जरूरत भी बढ़ती जा रही है। प्रदेश में ऑक्सीजन की कमी न होने के सरकार जो भी दावे करे लेकिन असलियत में सरकार के सारे दावे झूठे हैं। बीते दस दिनों में संक्रमण बढ़ने के साथ ही प्रदेश में ऑक्सीजन की खपत भी बड़ी है। यदि आंकड़ों पर गौर करें तो पिछले 10 दिनों में 200 टन ऑक्सीजन की खपत बढ़ गई है।
हालांकि सरकार ने काफी हद तक ऑक्सीजन की आपूर्ति की है, लेकिन अस्पतालों में ऑक्सीजन की जितनी डिमांड है। उतनी ऑक्सीजन की आपूर्ति नहीं हो पा रही है। वहीं पिछले 10 दिनों में ऑक्सीजन की समय पर आपूर्ति न होने से 56 से ज्यादा लोगों की मौत भी हो गई है। ऑक्सीजन की कमी से प्रदेश में हालात बदतर होते जा रहे हैं। वहीं अब कुछ अस्पतालों ने ऑक्सीजन की कमी का हवाला देते हुए नए कोरोना संक्रमित मरीजों को भर्ती करने से इंकार कर दिया है।
मांग से 65 टन कम हो रही ऑक्सीजन की आपूर्ति :
दरअसल वर्तमान परिस्थितियों में प्रदेश को 441 से 450 टन ऑक्सीजन की जरूरत है। जबकि प्रदेश में 385 टन की ही आपूर्ति हो रही है। जो कि मांग से 50 से 65 टन कम है। वहीं पिछले 10 दिनों में प्रदेश में170 टन ऑक्सीजन की अतिरिक्त खपत बढ़ गई है।

हालांकि इस दौरान केंद्र के सहयोग से छत्तीसगढ़, गुजरात और अन्य राज्यों से ऑक्सीजन की आपूर्ति भी करवाई गई है, लेकिन ये अस्पतालों से आ रही मांग की तुलना में बहुत कम है।
इस तरह थमती गईं बिना ऑक्सीजन के मरीजों की सांसें :
19 अप्रैल को ऑक्सीजन की कमी से भानपुर स्थित पीपुल्स हॉस्पिटल में 10 मरीजों की मौत हो गई थी। उसके एक दिन पहले शहडोल मेडिकल कॉलेज में भी 12 मरीजों की मौत ऑक्सीजन की कमी के कारण हुई थी। इसके अलावा 12 अप्रैल को एम पी नगर स्थित सिटी हॉस्पिटल में 5 मरीजों की मौत ऑक्सीजन की कमी के कारण हुई थी। 15 अप्रैल को जबलपुर में 5 मरीजों की मौत ऑक्सीजन की कमी के कारण हुई थी।
इसके अलावा खंडवा में भी 15 अप्रैल की रात 11 मरीजों की मौत ऑक्सीजन की कमी के कारण हुई थी। इन घटनाओं के बाद प्रदेश के अस्पतालों में भय का माहौल बना हुआ है। हालात ये हैं कि दमोह में ऑक्सीजन के सिलेंडर से भरी गाड़ी अस्पताल पहुंचने के बाद मरीजों के परिजनों ने गाड़ी को लूट लिया। इसके बाद मेडिकल स्टाफ ने सख्ती करते हुए इलाज बंद करने की धमकी दी। तब जाकर लूटपाट थमी और अफरा तफरी का माहौल शांत हुआ था।
ऑक्सीजन की कमी पर हाई कोर्ट सख्त, कांग्रेस सरकार पर हमलावर :
ऑक्सीजन की कमी को लेकर मध्य प्रदेश हाई कोर्ट तक को सरकार के काम में दखल देना पड़ा था और हाई कोर्ट ने सरकार की कार्यप्रणाली को देखते हुए सख्त चेतावनी भी जारी करनी पड़ी थी। कोरोना संक्रमण के बीच इलाज की बदइंतजामी पर सरकार को कड़ी फटकार भी लगाई थी। साथ ही सरकार को ऑक्सीजन और रेमडेसिविर इंजेक्शन की आपूर्ति को सुलभ करने की भी कहा था।

इसके अलावा कांग्रेस विधायक पीसी शर्मा, जीतू पटवारी और कुणाल चौधरी मिंटो हॉल स्थित गांधी प्रतिमा के समक्ष धरने पर भी बैठ चुके हैं। इसके अलावा पीसी शर्मा अपने निज निवास पर भी 24 घंटे का उपवास कर चुके हैं।
इस तरह बढ़ती गई प्रदेश में ऑक्सीजन की मांग :
11 अप्रैल : 213 टन
12 अप्रैल : 251 टन
13 अप्रैल : 262 टन
14 अप्रैल : 300 टन
15 अप्रैल : 305 टन
16 अप्रैल : 335 टन
17 अप्रैल : 347 टन
18 अप्रैल : 374 टन
19 अप्रैल : 375 टन
20 अप्रैल : 382 टन















