मेरठ जेल में मुस्कान और रविता ने करवाचौथ के लिए चूड़ी-बिंदी मांगी। जानिए 37 महिला बंदियों के व्रत, पूजा की व्यवस्था और जेल प्रशासन के नियम।

मेरठ जिला जेल में बंद मुस्कान रस्तोगी और रविता एक बार फिर चर्चा में हैं। करवाचौथ से पहले दोनों ने लाल चूड़ियां, बिंदी और श्रृंगार का सामान मांगा है। संजीवनी महिला संस्था की ओर से महिला बंदियों को त्योहार के लिए पूजा सामग्री उपलब्ध कराई जा रही है। हालांकि, मुस्कान और रविता करवाचौथ का व्रत रखेंगी या नहीं, इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।
यह मामला इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि मुस्कान और रविता दोनों अलग-अलग चर्चित हत्या के मामलों में दोषी ठहराई जा चुकी हैं और उन्हें मौत की सजा सुनाई गई है। ऐसे में करवाचौथ के लिए उनकी मांग सामने आने के बाद लोगों की दिलचस्पी बढ़ गई है।
करवाचौथ से पहले संजीवनी महिला संस्था की टीम मेरठ जिला जेल पहुंची। संस्था की ओर से महिला बंदियों को पूजा के लिए मिट्टी के करवे और श्रृंगार की सामग्री उपलब्ध कराई जा रही है। इस दौरान बंदियों से उनकी जरूरतों के बारे में भी पूछा गया।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, संस्था की प्रतिनिधियों ने बताया कि मुस्कान और रविता ने चूड़ियां, बिंदी और श्रृंगार का सामान मांगा था। उनकी मांग के अनुसार सामग्री उपलब्ध कराई जा रही है।
हालांकि, संस्था ने यह स्पष्ट नहीं किया है कि दोनों महिलाएं वास्तव में करवाचौथ का व्रत रखेंगी या नहीं। उन्होंने यह भी पुष्टि नहीं की कि यदि वे पूजा करती हैं, तो किसके लिए करेंगी।
इसलिए फिलहाल उनकी ओर से श्रृंगार का सामान मांगे जाने और व्रत रखने के फैसले को अलग-अलग समझना जरूरी है।
जेल प्रशासन के मुताबिक, मेरठ जिला जेल में 37 महिला बंदियों ने करवाचौथ का व्रत रखने की इच्छा जताई है। जेल में बंद महिलाएं अपनी धार्मिक मान्यताओं और इच्छा के अनुसार त्योहार मना सकती हैं, बशर्ते वे जेल के नियमों का पालन करें।
महिला बंदियों को करवाचौथ के लिए पूजा सामग्री उपलब्ध कराने में संजीवनी महिला संस्था सहयोग कर रही है। संस्था त्योहारों के दौरान बंदियों को पूजा और श्रृंगार का सामान उपलब्ध कराती है, ताकि वे अपनी इच्छानुसार पर्व मना सकें।
यह व्यवस्था दिखाती है कि जेल में सजा काट रही महिलाओं को भी नियमों के दायरे में अपनी धार्मिक परंपराओं का पालन करने का अवसर दिया जाता है।
मेरठ जिला जेल के वरिष्ठ जेल अधीक्षक डॉ. वीरेश राज शर्मा के मुताबिक, महिला बंदियां अपनी इच्छा से करवाचौथ का व्रत रख सकती हैं। जेल मैनुअल के तहत उनके लिए पूजा और फलाहार की व्यवस्था की जाती है।
जेल प्रशासन के अनुसार, पति-पत्नी दोनों के जेल में बंद होने की स्थिति में करवाचौथ पर मुलाकात की व्यवस्था नियमों के तहत की जा सकती है। यदि किसी महिला बंदी का पति जेल से बाहर रहता है, तो उसके मिलने आने पर निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार मुलाकात कराई जा सकती है।
कुछ महिला बंदियों के पति दूसरे शहरों में रहते हैं। ऐसी स्थिति में महिलाएं पति की तस्वीर या उनकी किसी निशानी को सामने रखकर भी पूजा कर सकती हैं।
हालांकि, मुलाकात की अनुमति जेल के नियमों और संबंधित व्यक्तियों के बीच कानूनी रूप से मान्य रिश्ते सहित लागू शर्तों पर निर्भर करती है। केवल किसी के साथ संबंध होने के आधार पर मुलाकात की अनुमति नहीं दी जाती।
करवाचौथ के अलावा मेरठ जिला जेल में कुछ महिला बंदियों ने अहोई अष्टमी का व्रत रखने की इच्छा भी जताई है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, मुस्कान रस्तोगी, रविता और दामिनी समेत कई महिला बंदियां 1 नवंबर को बच्चों की सुख-समृद्धि और लंबी उम्र की कामना के लिए यह व्रत रखना चाहती हैं।
अहोई अष्टमी का त्योहार परंपरागत रूप से बच्चों की खुशहाली और लंबी उम्र की कामना से जुड़ा है। जेल में बंद महिलाओं की ओर से इस व्रत की इच्छा जताना भी त्योहारों के दौरान उनकी धार्मिक गतिविधियों को लेकर चर्चा का विषय बना हुआ है।
मुस्कान रस्तोगी का नाम मेरठ के चर्चित सौरभ राजपूत हत्याकांड से जुड़ा है। इस मामले को कथित तौर पर शव को नीले ड्रम में छिपाने की घटना के कारण भी जाना जाता है।
मुस्कान और उसके प्रेमी साहिल शुक्ला को इस मामले में मौत की सजा सुनाई जा चुकी है। हालिया मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, दोनों ने सजा को इलाहाबाद हाई कोर्ट में चुनौती दी है।
यह ध्यान रखना जरूरी है कि मौत की सजा सुनाए जाने और उसके अंतिम रूप से लागू होने के बीच कानूनी प्रक्रिया होती है। अपील पर अदालत का फैसला मामले की आगे की स्थिति तय करने में महत्वपूर्ण होगा।
रविता भी एक अलग हत्या के मामले में दोषी ठहराई जा चुकी है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, रविता और उसके प्रेमी अमरदीप को भी मौत की सजा सुनाई गई है।
मुस्कान-साहिल और रविता-अमरदीप के मामलों में संबंधित पुरुषों और महिलाओं के बीच पति-पत्नी का संबंध नहीं होने के कारण जेल प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि उन्हें करवाचौथ के नाम पर आपस में मुलाकात की अनुमति नहीं दी जा सकती।
यहां दोनों मामलों को अलग-अलग समझना जरूरी है। करवाचौथ पर पूजा करने की अनुमति का अर्थ यह नहीं है कि बंदियों को किसी भी व्यक्ति से मिलने की स्वतः अनुमति मिल जाती है।
संजीवनी महिला संस्था लंबे समय से मेरठ की महिला जेल में सामाजिक कार्य कर रही है। संस्था का उद्देश्य महिला बंदियों को कौशल प्रशिक्षण देकर आत्मनिर्भर बनने के अवसर उपलब्ध कराना है।
संस्था की गतिविधियों में महिला बंदियों को व्यावसायिक प्रशिक्षण देना, उनके बच्चों की पढ़ाई में सहयोग करना और उन्हें रोजगार से जुड़े कौशल सिखाना शामिल है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, मुस्कान जेल में ब्यूटीशियन का कोर्स सीख चुकी है और उसने राखियां बनाने का काम भी सीखा है। वह मोमबत्ती बनाने का प्रशिक्षण लेने के लिए नाम लिखवाने वाली महिलाओं में भी शामिल थी।
संस्था त्योहारों के दौरान पूजा और श्रृंगार की सामग्री भी उपलब्ध कराती है। इसका उद्देश्य बंदियों को अपनी धार्मिक परंपराओं का पालन करने का अवसर देने के साथ उन्हें सामाजिक और व्यावहारिक सहयोग उपलब्ध कराना है।
मुस्कान और रविता के मामलों को लेकर पहले से लोगों की दिलचस्पी रही है। ऐसे में करवाचौथ के लिए चूड़ियां और बिंदी मांगने की खबर सामने आने के बाद इस विषय पर चर्चा तेज होना स्वाभाविक है।
हालांकि, इस खबर में सबसे अहम अंतर यह है कि श्रृंगार का सामान मांगने की जानकारी सामने आई है, लेकिन दोनों के व्रत रखने की पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए यह दावा करना कि दोनों निश्चित रूप से करवाचौथ का व्रत रखेंगी या किसी विशेष व्यक्ति के लिए पूजा करेंगी, उपलब्ध जानकारी से आगे जाना होगा।
जेल प्रशासन का कहना है कि महिला बंदियों को नियमों के तहत व्रत और पूजा की अनुमति है। ऐसे में मुस्कान और रविता की व्यक्तिगत धार्मिक पसंद पर निष्कर्ष निकालने के बजाय पुष्टि किए गए तथ्यों पर ध्यान देना ज्यादा उचित है।
मेरठ जिला जेल में मुस्कान और रविता की ओर से चूड़ी-बिंदी और श्रृंगार का सामान मांगे जाने की खबर चर्चा में है। संजीवनी महिला संस्था महिला बंदियों को करवाचौथ के लिए सामग्री उपलब्ध करा रही है। जेल प्रशासन के मुताबिक, 37 महिला बंदियों ने व्रत रखने की इच्छा जताई है। हालांकि, मुस्कान और रविता के व्रत रखने की अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।