कोरोना ने पूरे देश में हाहाकार मचा रखा है। ऐसे में देश की विभिन्न यूनिवर्सिटी में चल रहे शोध उत्साह बढ़ाने वाले हैं। जोधपुर स्थित डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन राजस्थान आयुर्वेदिक विवि में चल रहे एक शोध के मुताबिक आयुर्वेद में अमृत मानी जाने वाली गिलोय कोरोना के नए स्ट्रेन को बेअसर करने में पूरी तरह कारगर है। यूनिवर्सिटी में महामारी की पहली लहर के दौरान भी शोध किए गए थे, जिसमें गिलोय ने उत्साह जनक नतीजे दिए थे।
यूनिवर्सिटी में हुए ताजा शोध के मुताबिक गिलोय कोरोना के नए स्ट्रेन को भी बेअसर करने में पूरी तरह कारगर है। गिलोय को सीधे लेने या इसकी बनी गोलियों के सेवन से रोग प्रतिरोधक क्षमता में अद्भुत तरीके से इजाफा होता है। यूनिवर्सिटी के कुलपति प्रो. अभिमन्यु कुमार सिंह की मानें तो गिलोय की 500 मिलीग्राम की टैबलेट सुबह-शाम लेने पर कोरोना संक्रमितों की इम्यूनिटी में गजब का इजाफा हुआ। वायरस फेफड़ों में पहुंचने से पहले ही नाक और मुंह में ही बेअसर हो गया। 5 दिनों में ही रिपोर्ट नेगेटिव :
प्रो. अभिमन्यु कुमार सिंह ने बताया कि गिलोय की 500 मिलिग्राम की टैबलेट सुबह-शाम लेने का प्रोटोकॉल है। ये गोली कोई भी ले सकता है। प्रो. सिंह के मुताबिक आयुर्वेद विवि ने गत वर्ष बोरनाडा कोविड सेंटर में 40 मरीजों पर ये परीक्षण किया था। ये सभी कोरोना के बहुत कम लक्षणों वाले या बिना लक्षणों वाले पेशेंट थे।

गिलोय टेबलेट लेने के बाद इन सभी की कोरोना रिपोर्ट नेगेटिव हो गई। इस रिसर्च की मानें तो गिलोय ने मरीजों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाकर वायरस को फेफड़ों तक पहुंचने से पहले ही निष्क्रिय कर दिया।
नए स्ट्रेन में आरटीपीसीआर रिपोर्ट आ रही नेगेटिव :
नए स्ट्रेन ने लोगों की चिंता इसलिए भी बड़ा दी है, क्योंकि वायरस सीधे फेफड़ों पर हमला कर रहा है। पेशेंट सीधे सांस में दिक्कत होने की शिकायत लेकर डॉक्टर के पास पहुंच रहे हैं। ऐसे में आरटीपीसीआर रिपोर्ट से वायरस पकड़ में नहीं आ रहा क्योंकि वायरस सीधे नाक या मुंह से होते हुए फेफड़ों पर हमला कर रहा है।इससे मरीज को फेफड़े डेमेज होने पर खुद के संक्रमित होने की जानकारी मिल रही। वहीं डॉक्टर भी ऐसे मरीजों को सीटी स्कैन और अन्य रिपोर्टों के आधार पर ही डायग्नोस कर रहे हैं। वहीं यदि इम्यूनिटी अच्छी हो तो भी ये कहीं न कहीं वायरस को खत्म करने में मदद करेगी।
अन्य मरीजों पर नई दवाओं का रिसर्च करने की तैयारी :
प्रोफेसर सिंह की मानें तो कोरोना वायरस सहित किसी भी बीमारी से बचने के लिए व्यक्ति को अपनी रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत रखना चाहिए। वर्तमान में आयुर्वेदिक विवि में कोविड सेंटर बनने के बाद कुछ ऐसी दवाओं का परीक्षण किया जा सकेगा जो पहले दौर में भी कारगर रही थीं।

वर्तमान में लोग बहुत तनाव में हैं अत्यधिक तनाव भी लोगों की रोग प्रतिरोधक क्षमता को कमजोर करता है, जो वायरस को पनपने का मौका देता है। ऐसे में योग, प्राणायाम, ध्यान और कुछ आयुर्वेदिक दवाएं मन को शांत कर बीमारी से लड़ने की शक्ति देती हैं।
हल्के लक्षण होने पर भी तुरंत इलाज लें, वरना फाइब्रोसिस का खतरा :
कोविड का नया स्ट्रेन सीधे फेफड़ों पर हमला कर रहा है। बनावट में फेफड़े स्पंज की तरह होते हैं। इनके फैलने व सिकुड़ने से शरीर में ऑक्सीजन की सप्लाई होती है। कोरोना फेफड़ों पर आक्रमण कर फाइब्रोसिस की स्थिति पैदा करता है। इससे फेफड़े कठोर हो जाते हैं।कठोर फेफड़ों में वेंटीलेटर सपोर्ट होने के बाद भी ऑक्सीजन फेफड़े में नहीं जा सकती, जिसके कारण मौत हो जाती है। इसलिए चिकित्सक वायरस को फेफड़े में पहुंचने से पहले या पहुंचने के बाद काम सक्रिय अवस्था में ही खत्म करने की सलाह दे रहे हैं।