ऑनलाइन गेमिंग का खौफनाक असर: उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में तीन नाबालिग बहनों की कथित आत्महत्या ने पूरे देश में सदमे की लहर दौड़ा दी है। इस दुखद घटना ने सोशल मीडिया, ऑनलाइन कंटेंट, पारिवारिक रिश्तों और नाबालिगों के मानसिक स्वास्थ्य पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। अधिकारी कई एंगल से जांच कर रहे हैं, जिसमें एक ऑनलाइन टास्क-बेस्ड गेम से संभावित लिंक और लड़कियों का कोरियन संस्कृति के प्रति आकर्षण शामिल है।

यह दिल दहला देने वाली घटना 4 फरवरी को सुबह करीब 2:15 बजे गाजियाबाद के लोनी इलाके में, टीला मोड़ पुलिस स्टेशन के अधिकार क्षेत्र में हुई। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, तीनों बहनों ने अपनी रिहायशी इमारत की नौवीं मंजिल से छलांग लगा दी और अस्पताल पहुंचने पर उन्हें मृत घोषित कर दिया गया।

ऑनलाइन गेमिंग का खौफनाक असर: वे तीन बहनें कौन थीं?

मृत लड़कियों की पहचान इस प्रकार की गई है:

  • निशिका (16 साल)
  • प्राची (14 साल)
  • पाखी (12 साल)

ऑनलाइन गेमिंग का खौफनाक असर

वे गाजियाबाद के रहने वाले चेतन कुमार की बेटियां थीं। रिपोर्ट्स के अनुसार, परिवार की संरचना जटिल थी, पिता की कई शादियां हुई थीं। सबसे बड़ी बेटी और एक बेटा उनकी पहली शादी से थे, जबकि अन्य दो बेटियां उनकी दूसरी शादी से थीं। पिता की तीसरी शादी भी कथित तौर पर जांच का हिस्सा है।

सुसाइड नोट और कोरियन संस्कृति का प्रभाव

मामले का सबसे चौंकाने वाला पहलू लड़कियों के घर से आठ पन्नों का सुसाइड नोट मिलना है। पुलिस और मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, नोट से पता चला कि बहनें कोरियन संस्कृति से बहुत प्रभावित थीं और कोरिया, चीन, थाईलैंड और जापान जैसे पूर्वी एशियाई देशों में गहरी दिलचस्पी रखती थीं।

पुलिस उपायुक्त (ट्रांस-हिंडन), निमिश पाटिल ने पुष्टि की कि सुसाइड नोट में कोरियन संस्कृति के प्रति उनके आकर्षण का जिक्र था। हालांकि, नोट में किसी खास ऑनलाइन गेम या एप्लिकेशन का नाम नहीं था, लेकिन शुरुआती जांच से पता चला है कि लड़कियां एक ऑनलाइन टास्क-बेस्ड गेम खेल रही थीं।

रिपोर्ट्स के अनुसार, नोट में कहा गया था कि लड़कियों को लगता था कि उनका परिवार उन्हें समझता नहीं है, खासकर कोरियन संस्कृति के प्रति उनके प्यार के बारे में। उन्होंने इस बात पर भी निराशा जताई कि वे उन देशों में नहीं रह सकतीं जिनकी वे तारीफ करती थीं।

ऑनलाइन गेमिंग एंगल की जांच जारी

ऑनलाइन गेमिंग का खौफनाक असर

पुलिस सूत्रों ने शुरू में संकेत दिया था कि लड़कियां एक ऑनलाइन टास्क-बेस्ड गेम से प्रभावित हो सकती हैं, हालांकि अभी तक किसी खास गेम के नाम की पुष्टि नहीं हुई है। अधिकारी इस बात की जांच कर रहे हैं कि उनके द्वारा इस्तेमाल किए गए ऑनलाइन कंटेंट ने उनकी मानसिक स्थिति और फैसले लेने में कोई भूमिका निभाई या नहीं।

ऑनलाइन गेमिंग के एंगल ने नाबालिगों द्वारा बिना निगरानी के इंटरनेट इस्तेमाल के खतरों और इमर्सिव डिजिटल कंटेंट के मनोवैज्ञानिक असर पर बहस छेड़ दी है। विशेषज्ञों का मानना ​​है कि सही गाइडेंस के बिना, बच्चे और किशोर ऑनलाइन चुनौतियों, वर्चुअल कम्युनिटी और एक्सट्रीम फैंडम के प्रति कमजोर हो सकते हैं।

घटना का चश्मदीद गवाह का बयान

एक चश्मदीद गवाह, अरुण कुमार ने भयानक मंजर का वर्णन करते हुए बताया कि उसने लड़कियों को बिल्डिंग से कूदते देखा और यह घटना बहुत अचानक हुई।

उन्होंने न्यूज़ एजेंसी ANI को बताया कि ऐसा लगा कि एक लड़की ने कूदने की योजना बनाई थी, जबकि दूसरी उसे रोकने की कोशिश कर रही थी। उनके बयान के अनुसार, घटना के समय लड़कियां बालकनी की रेलिंग पर बैठी थीं। उन्होंने तुरंत पुलिस और एम्बुलेंस को बुलाया, लेकिन त्रासदी इतनी जल्दी हुई कि दखल देना नामुमकिन था।

पारिवारिक पृष्ठभूमि और सामाजिक अलगाव

ऑनलाइन गेमिंग का खौफनाक असर

रिपोर्ट्स से पता चलता है कि बहनों की सामाजिक ज़िंदगी बहुत सीमित थी और उन्होंने 2020 के आसपास स्कूल जाना बंद कर दिया था। बताया जाता है कि उनका अपने पड़ोसियों से बहुत कम मेलजोल था और इलाके में उनके कोई करीबी दोस्त नहीं थे।

बताया जाता है कि लड़कियां एक ही मोबाइल फोन इस्तेमाल करती थीं, जिसका इस्तेमाल वे शो देखने और सोशल मीडिया चलाने के लिए करती थीं। Reports के अनुसार, उन्होंने कोरियन नामों से एक सोशल मीडिया अकाउंट बनाया था और काफी फॉलोअर्स जमा कर लिए थे। हालांकि, जब उनके पिता को इस बारे में पता चला, तो उन्होंने कथित तौर पर अकाउंट डिलीट कर दिया, फोन जब्त कर लिया और बाद में उसे बेच दिया।

सुसाइड नोट से एक और परेशान करने वाली बात यह है कि लड़कियों ने अपने पिता पर आरोप लगाया कि वह उन्हें भारतीय पुरुषों से जबरन शादी करने की धमकी दे रहे थे, जबकि दोनों को कोरियन संस्कृति से प्यार था। जांचकर्ता इन दावों और परिवार के अंदरूनी रिश्तों की जांच कर रहे हैं।

पुलिस जांच और मौजूदा स्थिति

गाजियाबाद पुलिस ने मामले में व्यापक जांच शुरू कर दी है। अधिकारी निम्नलिखित की जांच कर रहे हैं:

  • सुसाइड नोट
  • लड़कियों की डिजिटल हिस्ट्री और ऑनलाइन एक्टिविटी
  • पारिवारिक रिश्ते और घर का माहौल
  • मानसिक स्वास्थ्य कारक और सामाजिक अलगाव
  • कथित ऑनलाइन गेम का एंगल

पुलिस अधिकारियों ने कहा है कि मामला जटिल है और इसमें कई मनोवैज्ञानिक और सामाजिक कारक शामिल हैं। उन्होंने जनता से अपील की है कि जांच पूरी होने तक किसी नतीजे पर न पहुंचें।

नाबालिगों पर ऑनलाइन कल्चर के असर को लेकर बढ़ती चिंताएँ

इस दुखद घटना ने नाबालिगों पर ऑनलाइन कल्चर, फैनडम और डिजिटल प्लेटफॉर्म के असर को लेकर चिंताओं को फिर से जगा दिया है। कोरियन पॉप कल्चर, ड्रामा और ऑनलाइन कम्युनिटी के दुनिया भर में, खासकर टीनएजर्स के बीच, बहुत ज़्यादा फॉलोअर्स हैं। हालांकि किसी कल्चर की तारीफ़ करना नॉर्मल है, लेकिन एक्सपर्ट्स चेतावनी देते हैं कि बहुत ज़्यादा जुनून, सोशल आइसोलेशन और इमोशनल परेशानी के साथ मिलकर गंभीर मनोवैज्ञानिक नतीजे दे सकता है।

माता-पिता और अभिभावकों को सलाह दी जा रही है कि वे अपने बच्चों की ऑनलाइन एक्टिविटीज़ पर नज़र रखें, उनसे खुलकर बात करें, और अगर उन्हें व्यवहार में कोई बदलाव या डिप्रेशन के लक्षण दिखें तो प्रोफेशनल मदद लें।

Read More: Amrita Pandey Suicide: ‘डिप्रेशन’ का शिकार हुईं अमृता पांडेय? सुसाइड से पहले WhatsApp पर लिखी थी ‘दिल की बात’