जहां एक तरफ कोरोना देश के लिए संकट का बिषय बना हुआ है वहीं दूसरी और प्राकृतिक आपदाएं भी देश पर बुरा प्रभाव डाल रही हैं। असम में बाढ़ की स्थिति बुधवार को भी गंभीर बनी रही और अब तक इस प्राकृतिक आपदा से लगभग 35 लाख से अधिक लोग प्रभावित हो चुके हैं। साथ ही इसमें मरने वालों की संख्‍या बढ़कर 66 हो गई है।

असम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एएसडीएमए) के अनुसार, राज्य के 33 जिलों में से 26 में 3,376 गांवों के 35.73 लाख से अधिक निवासी बाढ़ से प्रभावित हैं।

बुधवार को सोनितपुर, बारपेटा, गोलाघाट और मोरीगांव जिलों में डूबने से छह लोगों की मौत के साथ, इस बाढ़ में मरने वालों की संख्या 66 हो गई। भारी बारिश के कारण हुए भूस्खलन से राज्य में 26 की मौतें भी शामिल हैं।

प्रभावित 19 जिलों में से बाढ़ के कारण 36,000 से अधिक लोग अपना घर खो चुके हैं, इसी के चलते 629 राहत शिविरों का निर्माण किया गया जिसमें लोग अभी शरण में हैं। बाढ़ के पानी के कारण फंसे लगभग 4,000 लोगों को दिन के दौरान नावों द्वारा बचाया गया और सुरक्षा के लिए रवाना किया गया।

राज्य के सबसे ज्यादा प्रभावित जिले हैं हुजई, धेमाजी, लखीमपुर, बिश्वनाथ, सोनितपुर, उदलगुरी, दरंग, बक्सा, नालबारी, बारपेटा, चिरांग, बोंगाईगांव, कोकराझार, धुबरी, गोलपारा, कामरूप, नागांव, गोलाघाट, जोरहाट, मझौरा डिब्रूगढ़, तिनसुकिया और कार्बी आंगलोंग।

राज्य भर में बाढ़ और भूस्खलन में कई सड़कें, पुल, पुलिया और अन्य बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचा है। वन विभाग के अधिकारियों ने कहा कि काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान का 80 प्रतिशत हिस्सा बाढ़ की चपैट में है और दो गैंडों सहित 66 जंगली जानवरों की मौत हो चुकी है।

असम के मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने मंगलवार को धेमाजी में इलाकों का दौरा किया और बाढ़ की स्थिति की समीक्षा की। उन्होंने लखीमपुर और अपने गृह क्षेत्र माजुली में स्थिति का जायजा भी लिया। श्री सोनोवाल ने अधिकारियों को तटबंधों के मरम्मत कार्य में तेजी लाने के निर्देश दिए हैं।

यह भी जरूर पढ़े- कानून से तंग आकर आत्‍महत्‍या करने को मजबूर किसान और उसका परिवार, वीडियो में देखें पुलिस का बर्बरता