अनिरुद्धाचार्य का बयान वायरल: महिलाओं के दंडवत प्रणाम पर कही गई बात से सोशल मीडिया पर बहस छिड़ी। जानिए विवाद, पंचांग प्रणाम का संदर्भ और प्रतिक्रियाएं।

धार्मिक आस्था और परंपराओं की बात जब महिलाओं के सम्मान से जुड़ती है, तो सवाल उठना स्वाभाविक है। कथावाचक अनिरुद्धाचार्य का एक पुराना वीडियो इन दिनों सोशल मीडिया पर फिर चर्चा में है। इसमें वह महिलाओं के दंडवत प्रणाम करने को लेकर ऐसी टिप्पणी करते सुनाई दे रहे हैं, जिसने इंटरनेट पर नई बहस छेड़ दी है।
वायरल वीडियो में अनिरुद्धाचार्य कथित तौर पर कहते हैं कि महिलाओं को जमीन पर पूरी तरह लेटकर दंडवत प्रणाम नहीं करना चाहिए, क्योंकि उनके स्तनों के वजन से धरती कांपने लगती है। इस टिप्पणी के साथ उन्होंने कथित तौर पर धार्मिक ग्रंथ धर्मसिंधु का भी हवाला दिया।
उनके इस बयान पर सोशल मीडिया यूजर्स और महिला अधिकारों से जुड़े लोगों ने सवाल उठाए हैं। कई लोगों ने इसे महिलाओं के प्रति अपमानजनक और पुरानी सोच को बढ़ावा देने वाली टिप्पणी बताया है। वहीं, कुछ समर्थकों का कहना है कि वह पारंपरिक धार्मिक मान्यताओं और पूजा-पद्धतियों के बारे में बात कर रहे थे।
सोशल मीडिया पर वायरल हो रही क्लिप में अनिरुद्धाचार्य महिलाओं के दंडवत प्रणाम करने के तरीके पर अपनी बात रखते नजर आते हैं।
उनके कथित बयान के अनुसार, महिलाओं को पुरुषों की तरह पूरे शरीर को जमीन पर फैलाकर दंडवत प्रणाम नहीं करना चाहिए। उन्होंने इसकी वजह बताते हुए महिलाओं के स्तनों के वजन से धरती के कांपने जैसी बात कही।
इस टिप्पणी ने लोगों का ध्यान इसलिए भी खींचा क्योंकि धार्मिक परंपराओं की व्याख्या करते समय महिलाओं के शरीर को लेकर इस तरह की भाषा का इस्तेमाल किया गया।
वीडियो में वह कथित तौर पर धर्मसिंधु का संदर्भ देते हुए महिलाओं के लिए एक अलग प्रणाम पद्धति की बात भी करते हैं।
हालांकि, वायरल क्लिप का पूरा मूल संदर्भ, प्रवचन की तारीख और संबंधित शास्त्रीय उद्धरण स्वतंत्र रूप से स्पष्ट नहीं हैं। इसलिए इस बयान को किसी धार्मिक ग्रंथ का प्रमाणित नियम मानने से पहले मूल पाठ और पूरे प्रवचन की जांच जरूरी है।

इस विवाद में दो शब्द लगातार चर्चा में हैं- दंडवत प्रणाम और पंचांग प्रणाम।
दंडवत प्रणाम: यह प्रणाम करने की ऐसी पारंपरिक मुद्रा है, जिसमें व्यक्ति जमीन पर लेटकर अपना शरीर सीधा फैलाता है और श्रद्धा के साथ प्रणाम करता है। इसे कई धार्मिक परंपराओं में पूर्ण समर्पण और विनम्रता का प्रतीक माना जाता है।
पंचांग प्रणाम: इसमें व्यक्ति घुटनों के बल बैठकर शरीर के पांच अंगों या हिस्सों को जमीन से स्पर्श कराते हुए प्रणाम करता है। अलग-अलग परंपराओं में इसकी विधि और अंगों की व्याख्या में अंतर हो सकता है।
वायरल वीडियो में अनिरुद्धाचार्य महिलाओं के लिए पंचांग प्रणाम को उपयुक्त बताते हुए नजर आते हैं।
हालांकि, अलग-अलग धार्मिक संप्रदायों और परंपराओं में प्रणाम करने के तरीके अलग हो सकते हैं। किसी एक कथन को सभी हिंदू धार्मिक परंपराओं का सार्वभौमिक नियम मानना सही नहीं होगा।
अनिरुद्धाचार्य की यह टिप्पणी सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों की प्रतिक्रियाएं बंट गई हैं।
कई यूजर्स ने सवाल उठाया कि आखिर महिलाओं के शरीर को लेकर ऐसी टिप्पणी करने की जरूरत क्या थी? आलोचकों का कहना है कि धार्मिक उपदेशों में महिलाओं के सम्मान और गरिमा का ध्यान रखा जाना चाहिए।
कुछ लोगों ने इस कथित तर्क को अवैज्ञानिक बताते हुए कहा कि किसी व्यक्ति के शरीर के वजन से धरती के कांपने जैसी बात का कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है।
दूसरी तरफ, कुछ समर्थकों का मानना है कि धार्मिक प्रवचन में कही गई बातों को समझने के लिए उनका पूरा संदर्भ देखना चाहिए। उनके अनुसार, अनिरुद्धाचार्य पारंपरिक पूजा-पद्धति की व्याख्या कर रहे थे।
लेकिन इस बहस के बीच एक बड़ा सवाल यह भी है कि क्या धार्मिक परंपराओं की व्याख्या महिलाओं की गरिमा और सम्मान बनाए रखते हुए नहीं की जा सकती?
यह पहली बार नहीं है जब अनिरुद्धाचार्य की महिलाओं से जुड़ी टिप्पणी को लेकर सोशल मीडिया पर आलोचना हुई हो।
जुलाई 2025 में भी उनका एक वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें उन्होंने 25 साल की उम्र में शादी करने वाली महिलाओं और उनके रिश्तों को लेकर विवादित टिप्पणी की थी।
इस बयान के बाद मथुरा और अन्य जगहों पर विरोध देखने को मिला था। महिला अधिकारों से जुड़े लोगों और संगठनों ने भी उनकी टिप्पणी पर आपत्ति जताई थी।
विवाद बढ़ने के बाद अनिरुद्धाचार्य ने सफाई देते हुए कहा था कि उनकी बात को अधूरे वीडियो के जरिए पेश किया गया। उन्होंने दावा किया था कि उनकी टिप्पणी सभी महिलाओं के लिए नहीं, बल्कि कुछ विशेष परिस्थितियों के संदर्भ में थी। साथ ही, किसी को ठेस पहुंचने पर माफी भी मांगी थी।
दिसंबर 2025 में इस मामले को लेकर मथुरा की अदालत में शिकायत स्वीकार किए जाने की खबर भी सामने आई थी।
इससे साफ है कि महिलाओं से जुड़े उनके बयानों पर पहले भी सार्वजनिक बहस और कानूनी शिकायतों की स्थिति बन चुकी है।
धर्म और आस्था करोड़ों लोगों के जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। धार्मिक परंपराओं का पालन करना हर व्यक्ति का निजी विश्वास है। लेकिन जब किसी परंपरा की व्याख्या की जाती है, तो भाषा और उसके पीछे दिए जाने वाले तर्क भी उतने ही महत्वपूर्ण हो जाते हैं।
दंडवत प्रणाम करना है या पंचांग प्रणाम, यह व्यक्ति की धार्मिक मान्यता और परंपरा पर निर्भर कर सकता है। लेकिन महिलाओं के शरीर को लेकर अपमानजनक या असामान्य तर्क देना निश्चित रूप से सवाल खड़े करता है।
फिलहाल अनिरुद्धाचार्य का यह पुराना वीडियो सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है। इस पूरे मामले में मूल प्रवचन और धार्मिक ग्रंथ के वास्तविक संदर्भ को सामने रखना भी जरूरी है, ताकि वायरल क्लिप के आधार पर किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से बचा जा सके।
Disclaimer: यह खबर सोशल मीडिया पर प्रसारित वीडियो और उपलब्ध रिपोर्टों के आधार पर तैयार की गई है। वायरल क्लिप का पूरा संदर्भ स्वतंत्र रूप से सत्यापित नहीं है। इसमें व्यक्त विचार संबंधित लोगों के कथनों और प्रतिक्रियाओं पर आधारित हैं।