जायद सीजन में करें मूंगफली की खेती, होगी बंपर पैदावार
Advice for farmers : किसानों के लिए अगर समय-समय पर सलाह दी जाए तो वो सही समय पर सफल की बोवनी करके उचित लाभ ले सकते हैं। इसीलिए देश के किसानों के लिए कृषि विभाग ने ग्रीष्मकालीन (जायद) फसलों को लेकर महत्वपूर्ण सलाह (Advice for farmers) जारी की है। विभाग के अनुसार जायद में पारंपरिक रूप से ली जाने वाली मूंग फसल की तुलना में मूंगफली और उड़द की खेती अधिक लाभकारी और उत्पादक साबित हो सकती है। कृषि विशेषज्ञों ने किसानों से 15 फरवरी से 15 मार्च के बीच इन दोनों फसलों की बुवाई सुनिश्चित करने का आह्वान किया है।
कृषि विभाग की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार उड़द की उन्नतशील किस्में जैसे IPU-10-26, IPU-11-02, IPU-13-1, पंत उड़द-8 और कोटा उड़द-3 (KPU-524-65) अपनाने से 10 से 12 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक उत्पादन लिया जा सकता है। ये किस्में पीला मोजेक (MYMV), पत्ती मरोड़ (ULCV) और पावडरी मिल्ड्यू जैसे प्रमुख रोगों के प्रति रोगरोधक हैं। उड़द की खेती में 15–18 किलोग्राम बीज प्रति हेक्टेयर की दर से बुवाई, बीज उपचार, संतुलित पोषण प्रबंधन एवं 10–12 दिन के अंतराल पर सिंचाई की सलाह दी गई है।
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जायद में मूंगफली (Groundnut) बेहतर विकल्प
वहीं मूंगफली को जायद का एक और लाभकारी विकल्प बताया गया है। गिरनार-4/5, GG-37/35, GJG-32, K-1812, TCGS-1157 (नित्य हरता) और TAG-73 जैसी किस्में रोग प्रतिरोधक होने के साथ 22–25 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक उत्पादन देने में सक्षम हैं। मूंगफली के लिए 100–120 किलोग्राम बीज प्रति हेक्टेयर, उचित बीज उपचार, NPK 20:80:20 पोषण प्रबंधन और 12–15 दिन के अंतराल पर सिंचाई की सिफारिश की गई है।

समय पर करें निराई-गुड़ाई
कृषि विभाग ने किसानों को खरपतवार नियंत्रण के लिए समय पर निराई-गुड़ाई, और कीट प्रबंधन के लिए लाइट ट्रैप, फेरोमोन ट्रैप और मित्र कीटों के उपयोग की सलाह दी है। अधिकारियों का कहना है कि इन सिफारिशों को अपनाकर किसान जायद सीजन में लागत घटाकर बेहतर मुनाफा कमा सकते हैं।
मौसम पर ध्यान रखें किसान
किसानों को मौसम के प्रति सावधान रहने की भी अपील की गई है। इस सीजन में तापमान और उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है। साथ ही, बारिश की संभावना भी बन रही है। इसे देखते हुए किसानों को सावधान रहने और फसलों पर ध्यान देने की अपील की गई है। कई फसलें पकने की स्थिति में हैं जिन पर खराब मौसम का प्रतिकूल प्रभाव देखा जा सकता है।
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जायद सीजन की प्रमुख फसलें
- फल: तरबूज, खरबूजा, ककड़ी।
- सब्जियां: खीरा, करेला, लौकी, तोरई, भिंडी, टमाटर, मिर्च।
- दालें/तिलहन: मूंग, उड़द, सूरजमुखी।
- चारा फसलें: चारा फसलें (जैसे सूडान घास)।
- अन्य: मक्का (ग्रीष्मकालीन), मूंगफली, और गन्ना (कुछ क्षेत्रों में)।
इनकी मुख्य विशेषताएं
- समय: फरवरी-मार्च में बुवाई और मई-जून तक कटाई।
- क्षेत्र: उत्तर भारत में प्रमुखता से उगाया जाता है, जहां सिंचाई के साधन उपलब्ध हों।
- लाभ: कम समय में तैयार होकर यह किसानों को एक्स्ट्रा इनकम (नगदी फसल के रूप में) प्रदान करती हैं।
मार्च से जून के बीच उगाई जाती हैं जायद फसलें
जायद की फसलें खरीफ और रबी मौसमों के बीच, यानी मार्च से जून के बीच उगाई जाती हैं। उन्हें एक महत्वपूर्ण विकास अवधि के रूप में गर्म, शुष्क मौसम की आवश्यकता होती है और फूलों के लिए दिन की लंबाई होती है। जायद की फसल किसानों के लिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह किसानों को तेजी से नकदी देता है और इसे दो मुख्य फसलों, खरीफ और रबी के बीच अंतर-भराव के रूप में भी जाना जाता है।
जायद फसलें : कद्दू, खरबूजा, तरबूज, लौकी, तोरई, मूँग, खीरा, मीर्च, टमाटर, सूरजमूखी, गन्ना, मूंगफली, दालें, करेला, ककड़ी आदि।

