मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से जुड़े ट्विशा शर्मा मामले में सुप्रीम कोर्ट ने अहम कदम उठाया है। शुक्रवार को शीर्ष अदालत ने मामले की जांच और सुनवाई को भोपाल से दिल्ली स्थानांतरित करने की मांग वाली याचिका पर केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) और आरोपी समार्थ सिंह तथा गिरिबाला सिंह को नोटिस जारी किया। अदालत ने संबंधित पक्षों से दो सप्ताह के भीतर जवाब मांगा है।

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से जुड़े ट्विशा शर्मा मामले में सुप्रीम कोर्ट ने अहम कदम उठाया है। शुक्रवार को शीर्ष अदालत ने मामले की जांच और सुनवाई को भोपाल से दिल्ली स्थानांतरित करने की मांग वाली याचिका पर केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) और आरोपी समार्थ सिंह तथा गिरिबाला सिंह को नोटिस जारी किया। अदालत ने संबंधित पक्षों से दो सप्ताह के भीतर जवाब मांगा है।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए भोपाल सेशंस कोर्ट में चल रही सभी कार्यवाहियों पर अगले आदेश तक रोक भी लगा दी है।
यह याचिका ट्विशा शर्मा के पिता नवनीधि शर्मा ने दाखिल की है। उन्होंने मामले की सुनवाई भोपाल से दिल्ली की सक्षम अदालत में स्थानांतरित करने की मांग की है। उनका कहना है कि निष्पक्ष और स्वतंत्र सुनवाई सुनिश्चित करने के लिए मामले को दिल्ली स्थानांतरित किया जाना चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट ने मामले को दिल्ली स्थानांतरित करने की मांग पर संबंधित पक्षों से जवाब तलब किया है। अदालत ने CBI और दोनों आरोपियों को नोटिस जारी करते हुए जवाब देने के लिए दो सप्ताह का समय दिया है।
इसके साथ ही पीठ ने भोपाल सेशंस कोर्ट में चल रही मामले से संबंधित कार्यवाही पर अगले आदेश तक रोक लगा दी है।
यह आदेश स्थानांतरण याचिका पर विचार के दौरान दिया गया है। फिलहाल अदालत ने मामले को दिल्ली स्थानांतरित करने की अंतिम मंजूरी नहीं दी है। आगे की सुनवाई में पक्षों के जवाब और दलीलों पर विचार किया जाएगा।
ट्विशा शर्मा 33 वर्ष की थीं और मूल रूप से उत्तर प्रदेश के नोएडा की रहने वाली थीं। वह MBA ग्रेजुएट थीं। उन्होंने मॉडलिंग की दुनिया में भी काम किया था और मिस पुणे प्रतियोगिता की फाइनलिस्ट रह चुकी थीं। इसके अलावा, वह अभिनेत्री और योग शिक्षिका के रूप में भी जानी जाती थीं।
उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, ट्विशा की मुलाकात भोपाल के वकील समार्थ सिंह से एक डेटिंग ऐप के जरिए हुई थी। दोनों ने दिसंबर 2025 में शादी की थी, जिसके बाद ट्विशा अपने पति के साथ भोपाल आ गई थीं।
बाद में उनकी संदिग्ध परिस्थितियों में मौत का मामला सामने आया। इसके बाद उनके परिवार ने उत्पीड़न और दहेज की मांग से जुड़े गंभीर आरोप लगाए, जिन्हें लेकर अब कानूनी प्रक्रिया जारी है।
ट्विशा के पिता नवनीधि शर्मा ने आरोप लगाया है कि शादी के बाद उनकी बेटी को दहेज की मांग को लेकर मानसिक और शारीरिक उत्पीड़न का सामना करना पड़ा।
परिवार का आरोप है कि ट्विशा से बड़ी रकम और कीमती सामान की मांग की गई थी। इसके अलावा, उसके चरित्र को लेकर झूठे आरोप लगाए जाने की बात भी याचिका में कही गई है।
परिवार ने यह भी आरोप लगाया है कि गर्भावस्था के दौरान ट्विशा पर गर्भपात कराने का दबाव डाला गया और उसकी इच्छा के विरुद्ध दवाइयां दी गईं, जिससे उसे मानसिक परेशानी हुई।
ये सभी आरोप परिवार की ओर से लगाए गए हैं। इनकी न्यायिक पुष्टि होना अभी बाकी है। मामले में आरोपियों का पक्ष और अदालत में प्रस्तुत साक्ष्य भी अंतिम निर्णय के लिए महत्वपूर्ण होंगे।
ट्विशा शर्मा के पिता ने मामले में 46 मोबाइल नंबरों के कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) का हवाला दिया है। परिवार की ओर से आरोप लगाया गया है कि ट्विशा की मौत के अगले दिन उनकी सास गिरिबाला सिंह ने कई प्रभावशाली लोगों को फोन किए थे।
गिरिबाला सिंह पूर्व जिला न्यायाधीश रह चुकी हैं। परिवार ने इन कॉल रिकॉर्ड का उल्लेख करते हुए मामले की निष्पक्ष जांच की जरूरत पर जोर दिया है।
हालांकि, कॉल रिकॉर्ड से संबंधित आरोपों और उनके कथित महत्व का अंतिम निष्कर्ष जांच तथा न्यायिक परीक्षण के बाद ही निकाला जा सकता है। केवल फोन कॉल होने से अपने आप किसी गलत काम का प्रमाण स्थापित नहीं होता।
समार्थ सिंह भोपाल के वकील हैं और ट्विशा शर्मा के पति थे। गिरिबाला सिंह उनकी मां हैं तथा वह पूर्व जिला न्यायाधीश रह चुकी हैं।
ट्विशा के परिवार ने दोनों पर दहेज उत्पीड़न और आत्महत्या के लिए उकसाने से जुड़े आरोप लगाए हैं। मामले में इन आरोपों की जांच और न्यायिक प्रक्रिया जारी है।
यह ध्यान रखना जरूरी है कि किसी व्यक्ति के खिलाफ आरोप लगाए जाने मात्र से अपराध सिद्ध नहीं हो जाता। दोनों आरोपियों के संबंध में अंतिम निष्कर्ष सक्षम अदालत द्वारा उपलब्ध साक्ष्यों और लागू कानून के आधार पर ही निकाला जाएगा।
मामले को लेकर परिवार की मांग और बढ़ते दबाव के बीच मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने 20 मई को ट्विशा के परिवार से मुलाकात की थी। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इसके बाद उन्होंने मामले की जांच CBI से कराने की सिफारिश की थी।
CBI जांच की मांग के साथ परिवार लगातार निष्पक्ष जांच और न्याय सुनिश्चित करने की अपील करता रहा है। अब सुप्रीम कोर्ट में दायर स्थानांतरण याचिका के जरिए परिवार मामले की सुनवाई दिल्ली में कराने की मांग कर रहा है।
सुप्रीम कोर्ट द्वारा नोटिस जारी किए जाने के बाद संबंधित पक्षों को दो सप्ताह के भीतर अपना जवाब देना है। इसके बाद अदालत मामले को दिल्ली स्थानांतरित करने की मांग पर आगे विचार कर सकती है।
भोपाल सेशंस कोर्ट की कार्यवाही पर लगी रोक अगले आदेश तक प्रभावी रहेगी। स्थानांतरण याचिका पर अंतिम निर्णय आने तक यह स्पष्ट नहीं है कि मामले की सुनवाई आगे किस अदालत में होगी।
फिलहाल इस मामले में तीन बातें महत्वपूर्ण हैं: परिवार की ओर से लगाए गए आरोपों की निष्पक्ष जांच, आरोपियों का पक्ष और सुप्रीम कोर्ट का स्थानांतरण याचिका पर अंतिम फैसला।