
आज के समय में लगभग हर बिजनेस चाहता है कि उसकी वेबसाइट Google पर दिखाई दे और ज्यादा से ज्यादा लोग उस तक पहुंचें। लेकिन सिर्फ वेबसाइट बना लेने या उस पर ब्लॉग पोस्ट करने से ऐसा नहीं होता। इसके लिए वेबसाइट को सही तरीके से तैयार करना और ऐसा कंटेंट डालना जरूरी है, जो लोगों के काम आए।
यहीं पर SEO की भूमिका आती है। अगर आप भी अपनी वेबसाइट को Google पर बेहतर रैंक दिलाना चाहते हैं, तो SEO को समझना आपके लिए काफी मददगार हो सकता है। अच्छी बात यह है कि इसके लिए शुरुआत में किसी बहुत तकनीकी जानकारी की जरूरत नहीं होती।
SEO का पूरा नाम Search Engine Optimization है। आसान भाषा में समझें तो यह उन तरीकों का समूह है, जिनकी मदद से आप अपनी वेबसाइट को Google जैसे सर्च इंजन के लिए बेहतर बना सकते हैं।
उदाहरण के लिए, अगर कोई व्यक्ति Google पर "वेबसाइट बनाने वाली कंपनी" या "डिजिटल मार्केटिंग सर्विस" सर्च करता है, तो कई वेबसाइट उसके सामने आती हैं। SEO का उद्देश्य आपकी वेबसाइट के पेजों को संबंधित सर्च में दिखने और सही लोगों तक पहुंचने में मदद करना है।
हालांकि, SEO करने का मतलब यह नहीं है कि वेबसाइट तुरंत पहले नंबर पर आ जाएगी। इसमें समय लगता है और परिणाम वेबसाइट, प्रतिस्पर्धा, कंटेंट की गुणवत्ता और दूसरे कई पहलुओं पर निर्भर करते हैं।
SEO में कीवर्ड का काफी महत्व है। कीवर्ड वे शब्द या वाक्य होते हैं, जिन्हें लोग किसी जानकारी की तलाश में Google पर लिखते हैं।
मान लीजिए, आपकी कंपनी वेबसाइट डिजाइनिंग की सर्विस देती है। ऐसे में "वेबसाइट कैसे बनाएं", "वेबसाइट डिजाइनिंग सर्विस" और "बिजनेस के लिए वेबसाइट" जैसे शब्द आपके काम से जुड़े हो सकते हैं।
लेकिन केवल ज्यादा सर्च होने वाले कीवर्ड चुनना काफी नहीं है। यह भी देखना जरूरी है कि लोग उस शब्द को सर्च करके क्या जानना चाहते हैं और क्या आपका पेज उनकी जरूरत पूरी करता है।
कीवर्ड ढूंढने के लिए Google के ऑटो सजेशन, Google Trends और Google Keyword Planner जैसे टूल की मदद ली जा सकती है।
वेबसाइट पर ब्लॉग लिखते समय सबसे जरूरी बात यह है कि उसमें पाठकों को सही और उपयोगी जानकारी मिले। सिर्फ कीवर्ड डालने या शब्दों की संख्या बढ़ाने के लिए लेख लिखने से लंबे समय तक अच्छा परिणाम मिलना मुश्किल है।
अगर आप "SEO क्या है?" पर ब्लॉग लिख रहे हैं, तो उसमें SEO का मतलब, इसके फायदे, शुरुआती लोगों के लिए जरूरी तरीके और इस्तेमाल होने वाले टूल्स को आसान भाषा में समझाएं।
कोशिश करें कि लेख में एक ही बात बार-बार न दोहराई जाए। जहां जरूरी हो, वहां उदाहरण दें और जानकारी को छोटे पैराग्राफ में लिखें, ताकि पाठक आसानी से समझ सकें।
जब कोई व्यक्ति Google पर कुछ सर्च करता है, तो सबसे पहले उसकी नजर पेज के टाइटल पर पड़ती है। इसलिए टाइटल ऐसा होना चाहिए जिससे पाठक को साफ पता चले कि लेख में क्या जानकारी मिलेगी।
उदाहरण के लिए, "SEO के बारे में जानकारी" लिखने के बजाय "SEO क्या है? वेबसाइट की रैंकिंग सुधारने के 7 आसान तरीके" जैसा टाइटल ज्यादा स्पष्ट है, बशर्ते लेख में वास्तव में इन सवालों के जवाब दिए गए हों।
इसी तरह URL छोटा और समझने में आसान रखें। उदाहरण के लिए:
yourwebsite.com/seo-guide-for-beginners
URL में मुख्य विषय का उल्लेख होना उपयोगी हो सकता है, लेकिन उसमें बेवजह बहुत सारे कीवर्ड भरने से बचें।
आज बहुत से लोग मोबाइल फोन से इंटरनेट इस्तेमाल करते हैं। ऐसे में अगर आपकी वेबसाइट मोबाइल पर ठीक से नहीं खुलती, टेक्स्ट पढ़ने में परेशानी होती है या बटन सही से काम नहीं करते, तो पाठक जल्दी वापस जा सकते हैं।
इसलिए वेबसाइट को मोबाइल और कंप्यूटर दोनों पर चेक करें। पेज जल्दी खुलें, टेक्स्ट आसानी से पढ़ा जा सके और जरूरी जानकारी खोजने में परेशानी न हो।
Google PageSpeed Insights जैसे टूल की मदद से वेबसाइट की स्पीड और कुछ तकनीकी समस्याओं की जांच भी की जा सकती है।
कई बार वेबसाइट पर अच्छा कंटेंट होने के बावजूद कुछ पेज Google में दिखाई नहीं देते। इसकी एक वजह तकनीकी समस्या भी हो सकती है।
उदाहरण के लिए, अगर किसी पेज पर गलती से noindex निर्देश लगा है, तो Google उसे सर्च रिजल्ट में शामिल नहीं कर पाएगा। इसी तरह गलत लिंक, बार-बार खुलने वाले रीडायरेक्ट या वेबसाइट का ठीक से क्रॉल न हो पाना भी परेशानी पैदा कर सकता है।
शुरुआत में इन बातों की जांच करें:
वेबसाइट के जरूरी पेज खुल रहे हैं या नहीं।
पेज पर कोई तकनीकी त्रुटि तो नहीं है।
XML sitemap उपलब्ध है या नहीं।
वेबसाइट Google Search Console में जोड़ी गई है या नहीं।
इन चीजों को सही रखने से Google को वेबसाइट के पेज खोजने और समझने में मदद मिल सकती है।
अगर आप जानना चाहते हैं कि आपकी वेबसाइट Google पर कैसा प्रदर्शन कर रही है, तो Google Search Console एक उपयोगी टूल है। इससे पता चल सकता है कि वेबसाइट के पेज कितनी बार सर्च रिजल्ट में दिखाई दिए, उन पर कितने क्लिक मिले और लोग किन सर्च शब्दों से वेबसाइट तक पहुंचे।
उदाहरण के लिए, हो सकता है कि आपका कोई ब्लॉग Google पर काफी बार दिखाई दे रहा हो, लेकिन उस पर क्लिक कम आ रहे हों। ऐसी स्थिति में आप टाइटल और मेटा डिस्क्रिप्शन को ज्यादा स्पष्ट और उपयोगी बना सकते हैं।
इसी तरह अगर किसी पेज पर इंप्रेशन बहुत कम हैं, तो उसके विषय, कंटेंट और इंडेक्सिंग की स्थिति को जांचना उपयोगी होगा।
ध्यान रखें कि Search Console में किसी पेज का URL सबमिट कर देने से उसके तुरंत इंडेक्स होने या पहले पेज पर रैंक करने की गारंटी नहीं मिलती।
SEO का काम सिर्फ नया कंटेंट प्रकाशित करने तक सीमित नहीं है। वेबसाइट पर पहले से मौजूद ब्लॉग भी समय-समय पर चेक करने चाहिए।
अगर किसी लेख में पुरानी जानकारी है, कोई जरूरी सवाल छूट गया है या उदाहरण बदल चुके हैं, तो उसे अपडेट किया जा सकता है। संबंधित नए ब्लॉग के लिंक भी जोड़े जा सकते हैं।
मान लीजिए, आपने पहले "डिजिटल मार्केटिंग क्या है?" पर लेख लिखा था। बाद में आपने SEO, सोशल मीडिया मार्केटिंग और कंटेंट मार्केटिंग पर अलग-अलग ब्लॉग प्रकाशित किए। ऐसे में इन लेखों को आपस में लिंक करने से पाठकों को संबंधित जानकारी खोजने में आसानी हो सकती है।
Internal linking का मतलब है अपनी ही वेबसाइट के एक पेज से दूसरे संबंधित पेज का लिंक देना। इससे पाठकों को आगे की जानकारी मिलती है और सर्च इंजन को वेबसाइट के पेजों के बीच संबंध समझने में मदद मिलती है।
उदाहरण के लिए, अगर आप SEO पर ब्लॉग लिख रहे हैं और आपकी वेबसाइट पर कीवर्ड रिसर्च के बारे में अलग लेख मौजूद है, तो वहां उसका लिंक दे सकते हैं।
बाहरी वेबसाइटों से लिंक प्राप्त करना भी उपयोगी हो सकता है, खासकर जब दूसरी भरोसेमंद वेबसाइटें आपके कंटेंट को संदर्भ के रूप में इस्तेमाल करें। हालांकि, केवल लिंक पाने के लिए कम गुणवत्ता वाली वेबसाइटों से लिंक खरीदना सही तरीका नहीं है।
यह सवाल लगभग हर उस व्यक्ति के मन में आता है जो पहली बार SEO कर रहा है। इसका कोई निश्चित जवाब नहीं है। कुछ पेज जल्दी इंडेक्स हो सकते हैं, जबकि अच्छी रैंकिंग हासिल करने में कई सप्ताह या महीने लग सकते हैं।
यह इस बात पर निर्भर करता है कि वेबसाइट कितनी पुरानी है, विषय पर कितनी प्रतिस्पर्धा है, कंटेंट कितना उपयोगी है और वेबसाइट की तकनीकी स्थिति कैसी है।
इसलिए कुछ दिनों में परिणाम न मिलने पर ब्लॉग हटाने या लगातार कीवर्ड बदलने के बजाय उसके प्रदर्शन को समझना ज्यादा बेहतर है।
Google पर वेबसाइट की रैंकिंग सुधारने के लिए किसी एक ट्रिक पर निर्भर रहना सही नहीं है। सही कीवर्ड चुनना, उपयोगी कंटेंट तैयार करना, वेबसाइट को मोबाइल के अनुकूल रखना और Search Console की मदद से परिणाम देखना, ये सभी SEO का हिस्सा हैं।
अगर आप शुरुआत कर रहे हैं, तो पहले अपनी वेबसाइट के जरूरी पेजों और कुछ अच्छे ब्लॉग पर ध्यान दें। पाठकों की जरूरत समझकर काम करें और समय-समय पर सुधार करते रहें। धीरे-धीरे आपको यह समझने में मदद मिलेगी कि आपकी वेबसाइट के लिए कौन-सी रणनीति बेहतर काम कर रही है।