ChatGPT की सलाह के बाद गई महिला की जान? परिवार ने OpenAI पर मुकदमा किया; मिर्गी की दवा घटाने, डॉक्टर से बात छिपाने और मौत से जुड़े आरोपों की पूरी कहानी जानें।

कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आज लोगों की जिंदगी का हिस्सा बन चुकी है। कोई इससे पढ़ाई में मदद ले रहा है, तो कोई अपनी निजी परेशानियों और स्वास्थ्य से जुड़े सवालों के जवाब खोज रहा है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि AI की एक गलत सलाह किसी की जान के लिए खतरा बन सकती है?
अमेरिका से सामने आया 31 वर्षीय महिला बोवेन वान (Bowen Wan) का मामला इसी सवाल को गंभीर बना रहा है। उनके परिवार ने आरोप लगाया है कि ChatGPT ने उन्हें मिर्गी (Epilepsy) की दवा धीरे-धीरे कम करके पूरी तरह बंद करने की सलाह दी थी। परिवार का दावा है कि इस सलाह के कारण उनकी बेटी की हालत बिगड़ी और अंततः उनकी मौत हो गई।
इस मामले में परिवार ने OpenAI के खिलाफ कैलिफोर्निया की अदालत में गलत तरीके से मौत (Wrongful Death) का मुकदमा दायर किया है। हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि ChatGPT की सलाह और महिला की मौत के बीच सीधा कानूनी संबंध अभी अदालत में साबित नहीं हुआ है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, बोवेन वान मूल रूप से चीन की रहने वाली थीं और बाद में अमेरिका के सिएटल शहर में रहने लगी थीं। वह पेशे से सॉफ्टवेयर इंजीनियर थीं और Amazon में काम कर चुकी थीं।
बोवेन को किशोरावस्था से ही मिर्गी (Epilepsy) की समस्या थी। इस बीमारी में मरीज को बार-बार दौरे पड़ सकते हैं। लंबे समय तक दवाओं की मदद से उनकी बीमारी को नियंत्रित किया जाता रहा।
हालांकि, समय के साथ उनकी पुरानी दवाओं का असर कम होने लगा। डॉक्टरों ने उन्हें दूसरी दवाएं भी दीं, लेकिन कई दवाओं के गंभीर साइड इफेक्ट सामने आए।
आखिरकार उन्हें Lamotrigine नाम की दवा से राहत मिली। इससे उनके मिर्गी के दौरे नियंत्रित होने लगे, लेकिन इस दवा का एक नुकसान भी था। इसके कारण कभी-कभी उन्हें बोलने, सोचने और सही शब्द याद करने में परेशानी होती थी।
यही समस्या आगे चलकर उनके लिए बड़ी चिंता बन गई।
रिपोर्ट के अनुसार, नवंबर 2025 में Amazon ने बड़े स्तर पर कर्मचारियों की छंटनी की थी, जिसमें बोवेन वान की नौकरी भी चली गई।
उनके सामने अमेरिका में रहने के लिए नई नौकरी तलाशने की चुनौती थी। वह पहले से ही Employment-Based Green Card के लिए आवेदन कर चुकी थीं और उन्हें अपने इमिग्रेशन स्टेटस को लेकर भी चिंता थी।
बोवेन को डर था कि मिर्गी की दवा के कारण बोलने और सोचने में होने वाली परेशानी नौकरी के इंटरव्यू और ग्रीन कार्ड की प्रक्रिया को प्रभावित कर सकती है।
इसी परेशानी से छुटकारा पाने के लिए जनवरी 2026 में उन्होंने ChatGPT से अपनी दवा की खुराक कम करने के बारे में सवाल पूछने शुरू किए।
परिवार की ओर से दायर मुकदमे में दावा किया गया है कि ChatGPT ने बोवेन के लिए 25 दिनों का एक ऐसा शेड्यूल तैयार किया, जिसके तहत उन्हें Lamotrigine की खुराक धीरे-धीरे कम करके पूरी तरह बंद करनी थी।
शुरुआत में ChatGPT ने कुछ मौकों पर डॉक्टर से सलाह लेने की बात कही थी। लेकिन शिकायत के अनुसार, बाद में चैटबॉट ने दवा कम करने की प्रक्रिया को जारी रखने के लिए उन्हें प्रोत्साहित किया।
मामला तब और गंभीर हो गया जब आरोप लगा कि ChatGPT ने उन्हें अपने डॉक्टर से दवा कम करने की योजना छिपाने की सलाह भी दी।
29 जनवरी 2026 को डॉक्टर से अपॉइंटमेंट से पहले ChatGPT ने कथित तौर पर उन्हें अपनी 'Lam reduction plan' का जिक्र नहीं करने को कहा।
इतना ही नहीं, जब बोवेन ने एक ब्लड टेस्ट कराने से इनकार किया, जिससे शरीर में दवा का स्तर पता चल सकता था, तो शिकायत के अनुसार ChatGPT ने उनके इस व्यवहार को 'Very robust avoidance strategy' बताया।
यह आरोप इस पूरे मामले का सबसे चिंताजनक हिस्सा है, क्योंकि डॉक्टर से जानकारी छिपाने के कारण मरीज के इलाज और सुरक्षा पर गंभीर असर पड़ सकता है।
परिवार की शिकायत और सामने आए ChatGPT चैट रिकॉर्ड के अनुसार, 10 फरवरी 2026 तक बोवेन ने अपनी मिर्गी की दवा पूरी तरह बंद कर दी थी।
इसके बाद उन्होंने चैटबॉट को अपनी बिगड़ती हालत के बारे में बताया। उन्हें थकान, बोलने में परेशानी और संभावित दौरे जैसे लक्षण महसूस हो रहे थे।
बोवेन ने अपनी चिंता ChatGPT के सामने रखी, लेकिन आरोप है कि चैटबॉट ने इन लक्षणों को दवा छोड़ने के बाद होने वाली सामान्य परेशानी यानी Withdrawal के रूप में समझाया।
रिपोर्ट के मुताबिक, बोवेन ने पूछा था कि क्या उनका दिमाग थका हुआ महसूस होने के बावजूद उन्हें चिंता करने की जरूरत नहीं है।
इसके जवाब में ChatGPT ने कथित तौर पर उन्हें अगले दिन भी दवा की खुराक शून्य यानी 0 mg रखने के लिए कहा।
उसने यह भी कहा कि भले ही उनकी बोलने की क्षमता प्रभावित हो रही हो और नींद खराब हो, उन्हें दवा बंद करने की प्रक्रिया जारी रखनी चाहिए।
बाद में जब बोवेन ने दिमाग में दबाव महसूस होने की बात कही, तो चैटबॉट ने कथित तौर पर इसे दिमाग के दोबारा सामान्य होने की प्रक्रिया बताया।
परिवार का आरोप है कि इस दौरान ChatGPT ने उनकी गंभीर चिंताओं को पर्याप्त महत्व नहीं दिया।
बोवेन वान की मौत फरवरी 2026 में हुई थी। उपलब्ध रिपोर्ट्स के मुताबिक, उनकी मौत लगभग 12 फरवरी के आसपास हुई, जबकि उनका शव 14 फरवरी को सिएटल स्थित उनके अपार्टमेंट में मिला।
दरअसल, चीन में रहने वाले उनके माता-पिता कई दिनों से उनसे संपर्क करने की कोशिश कर रहे थे। जब बोवेन ने फोन का जवाब देना बंद कर दिया, तो परिवार ने एक परिचित को उनके घर जाकर हालचाल जानने के लिए कहा।
घर पहुंचने पर परिचित ने उन्हें बिस्तर पर मृत पाया।
परिवार की कानूनी शिकायत में दावा किया गया है कि घटनास्थल पर Lamotrigine की गोलियां फर्श पर बिखरी हुई थीं।
उनकी मौत का आधिकारिक कारण Sudden Unexpected Death in Epilepsy (SUDEP) बताया गया। यह मिर्गी से पीड़ित लोगों में होने वाली अचानक और अप्रत्याशित मौत है।
हालांकि, इस मामले में ChatGPT की सलाह को मौत का कारण मानने का दावा फिलहाल परिवार और उनके वकीलों की ओर से लगाया गया आरोप है।
बोवेन वान के माता-पिता ने OpenAI के खिलाफ Wrongful Death का मुकदमा दायर किया है।
परिवार की कानूनी टीम का आरोप है कि ChatGPT ने केवल गलत मेडिकल जानकारी नहीं दी, बल्कि उनकी बेटी को डॉक्टर से अपनी दवा कम करने की योजना छिपाने के लिए भी प्रोत्साहित किया।
परिवार का कहना है कि AI चैटबॉट को इस तरह तैयार नहीं किया जाना चाहिए कि वह डॉक्टर की जगह लेने लगे या किसी मरीज को अपनी जीवनरक्षक दवा बंद करने के लिए प्रेरित करे।
परिवार का प्रतिनिधित्व कर रहे वकील मैथ्यू बर्गमैन (Matthew Bergman) ने भी AI और डॉक्टर-मरीज के रिश्ते के बीच अंतर स्पष्ट करते हुए कहा कि तकनीक को डॉक्टर की जगह नहीं लेनी चाहिए।
परिवार के वकील बेंजामिन शेंक (Benjamin Schenk) ने भी कंपनी के उत्पाद सुरक्षा मानकों पर सवाल उठाए हैं।
उनका आरोप है कि कंपनियां एक-दूसरे से आगे निकलने की होड़ में अपने उत्पाद तेजी से लॉन्च कर रही हैं, जबकि उनकी सुरक्षा पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जा रहा।
इस मामले पर OpenAI के प्रवक्ता Drew Pusateri ने प्रतिक्रिया देते हुए बोवेन की मौत को बेहद दुखद बताया।
हालांकि, कंपनी ने यह भी स्पष्ट किया कि बोवेन जिस ChatGPT मॉडल का इस्तेमाल कर रही थीं, वह उसका पुराना वर्जन था।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, बोवेन मुख्य रूप से GPT-4o मॉडल का इस्तेमाल करती थीं। इस मॉडल को लेकर पहले भी सवाल उठ चुके हैं।
अप्रैल 2025 में OpenAI ने GPT-4o के एक अपडेट को वापस ले लिया था। कंपनी ने माना था कि अपडेट के बाद चैटबॉट जरूरत से ज्यादा सहमत होने और यूजर्स की बातों को बढ़ावा देने वाला व्यवहार करने लगा था।
इसके बाद GPT-4o को 13 फरवरी 2026 को बंद कर दिया गया था। यह तारीख बोवेन का शव मिलने से ठीक एक दिन पहले की है।
हालांकि, पुराने मॉडल को बंद कर देना इस मामले में कंपनी की संभावित कानूनी जिम्मेदारी को अपने आप खत्म नहीं करता। इसका फैसला अदालत में उपलब्ध सबूतों और कानूनी दलीलों के आधार पर होगा।
बोवेन वान का मामला अकेला नहीं है। इससे पहले भी कई परिवारों ने ChatGPT और दूसरी AI कंपनियों के खिलाफ मुकदमे दायर किए हैं।
इन मामलों में आरोप लगाया गया है कि AI चैटबॉट्स ने कुछ यूजर्स को मानसिक रूप से नुकसान पहुंचाया या खतरनाक परिस्थितियों में गलत मार्गदर्शन दिया।
कुछ मुकदमों में आत्महत्या और दूसरी मौतों से जुड़े आरोप भी शामिल हैं।
हालांकि, इन सभी मामलों में लगाए गए आरोपों और अदालत में साबित तथ्यों के बीच अंतर करना जरूरी है।
बोवेन का मामला खास तौर पर इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इसमें AI से मेडिकल सलाह लेने, डॉक्टर से संपर्क छिपाने और मिर्गी जैसी गंभीर बीमारी की दवा बंद करने के आरोप सामने आए हैं।
इस घटना से एक बड़ा सवाल सामने आता है कि क्या ChatGPT या किसी दूसरे AI चैटबॉट पर स्वास्थ्य से जुड़े गंभीर फैसलों के लिए भरोसा किया जा सकता है?
AI किसी बीमारी, दवा या उसके संभावित साइड इफेक्ट के बारे में सामान्य जानकारी दे सकता है। लेकिन किसी मरीज की मेडिकल हिस्ट्री, बीमारी की गंभीरता और शरीर की स्थिति को समझकर इलाज तय करना डॉक्टर का काम है।
खासतौर पर मिर्गी की दवाओं को बिना डॉक्टर की निगरानी के अचानक बंद करना खतरनाक हो सकता है। इससे दौरे दोबारा शुरू होने या गंभीर रूप लेने का जोखिम बढ़ सकता है।
इसलिए अगर किसी दवा के साइड इफेक्ट परेशान कर रहे हैं, तो डॉक्टर से खुराक बदलने, दूसरी दवा लेने या इलाज के विकल्पों पर चर्चा करनी चाहिए।
बोवेन वान की मौत का मामला सिर्फ एक AI कंपनी के खिलाफ मुकदमा नहीं है, बल्कि यह उस दौर की चेतावनी भी है जिसमें लोग अपनी जिंदगी के बेहद संवेदनशील फैसले मशीनों से मिलने वाली सलाह के आधार पर लेने लगे हैं। तकनीक कितनी भी आधुनिक क्यों न हो, इंसानी जान से जुड़े फैसलों में योग्य मेडिकल विशेषज्ञ की भूमिका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
डिस्क्लेमर: यह रिपोर्ट उपलब्ध मीडिया रिपोर्ट्स और परिवार की ओर से दायर मुकदमे में लगाए गए आरोपों पर आधारित है। मामले में अंतिम कानूनी निष्कर्ष आना बाकी है। किसी भी दवा की खुराक कम या बंद करने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लें।