Madhya Pradesh

Tigers in Danger : टाइगर स्टेट कहलाने वाले मप्र में बाघों पर संकट, शहडोल में करंट लगने से दो बाघों की मौत

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किसान ने फसल बचाने को फैलाया था करंट, जांच टीम मौके पर

शहडोल। टाइगर स्टेट कहलाने वाले मप्र में बाघों की लगातार मौत होने के मामले सामने आ रहे हैं। बीते साल राज्य में कुल 55 बाघों की मौत हुई है। अब शहडोल जिले के जयसिंहनगर वन परिक्षेत्र में करंट लगने से रविवार रात एक नर और एक मादा बाघ की मौत हो गई। करपा बीट क्षेत्र में हुई इस घटना से वन विभाग में सकते हैं। सूचना मिलते ही वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचे और तत्काल जांच शुरू की गई।
वन विभाग को रविवार रात सर्किल मसिरा के आरएफ 382 क्षेत्र के पास एक बाघ का शव मिलने की सूचना मिली थी। प्रारंभिक जांच के दौरान सोमवार तड़के उसी क्षेत्र में एक बाघिन का शव भी बरामद हुआ। दोनों शव राजस्व क्षेत्र में एक-दूसरे के नजदीक पाए गए, जिससे यह पुष्टि हुई कि उनकी मौत एक ही घटना में हुई है।

किसान ने फसल बचाने बिछाया था बिजली तार

प्रारंभिक जांच और मौके से मिले साक्ष्यों के आधार पर दोनों बाघों की मौत बिजली के करंट से होने की पुष्टि हुई है। जांच में यह सामने आया है कि एक किसान ने अपनी फसल को जंगली जानवरों से बचाने के लिए खेत में अवैध रूप से बिजली का तार बिछाया था। इसी तार की चपेट में आने से दोनों बाघों की जान चली गई।

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यह गंभीर अपराध का मामला

डीएफओ तरुणा वर्मा ने बताया कि दो बाघों की मौत की पुष्टि हो चुकी है। यह मामला वन्यजीव संरक्षण कानून के तहत एक गंभीर अपराध है। नियमानुसार पोस्टमॉर्टम की प्रक्रिया पूरी की जा रही है और जांच के सभी पहलुओं की बारीकी से पड़ताल की जा रही है।

 

डॉग स्क्वॉड और दूसरे दल मौके पर

वन विभाग की डॉग स्क्वॉड टीम, फील्ड स्टाफ और अन्य विशेषज्ञ दल क्षेत्र में सघन तलाशी अभियान चला रहे हैं। संबंधित किसान की भूमिका की जांच की जा रही है और दोषी पाए जाने पर उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इस घटना से वन्यजीव प्रेमियों और स्थानीय लोगों में चिंता का माहौल है।

प्रदेश में बाघों की मौतों का अध्ययन, 38 बाघ प्राकृतिक कारण से मरे

विशेषज्ञों का मानना है कि प्रदेश में बाघों की अधिक संख्या और बेहतर निगरानी प्रणाली के कारण मृत्यु की घटनाएं अधिक सटीकता से दर्ज होती हैं। इसे संरक्षण में विफलता नहीं, बल्कि बेहतर डिटेक्शन रेट के रूप में देखा जाना चाहिए। बताया गया है कि वर्ष 2025 में मध्य प्रदेश में दर्ज 55 बाघ मृत्यु घटनाओं का विस्तृत अध्ययन किया गया। इनमें प्राकृतिक कारणों से 38 बाघों की मृत्यु हुई, जो कुल मौतों का 69 प्रतिशत है। इनमें आपसी संघर्ष, बीमारी, वृद्धावस्था, दुर्घटनाएं, और रेल और सड़क हादसे शामिल हैं।

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शिकार से 11 बाघों की मृत्यु

MP में शिकार से 11 बाघों की मृत्यु हुई है, जो कुल मृत्यु संख्या का 20 प्रतिशत है। इनमें से अधिकांश मामलों में विद्युत करंट के उपयोग की पुष्टि हुई। उल्लेखनीय है कि इन प्रकरणों में अवैध शिकार की मंशा सिद्ध नहीं हुई, बल्कि फसलों और पशुधन की रक्षा का प्रयास प्रमुख कारण रहा है। व्याघ्र अंगों की तस्करी के लिए 6 बाघों का शिकार हुआ, जो कुल मौतों का 11 प्रतिशत है। इन मामलों में बाघ के अवयव जब्त कर आरोपियों को गिरफ्तार किया गया।

 

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2022 की जनगणना में सबसे ज्यादा 785 बाघ एमपी में मिले

बता दें कि केंद्र सरकार द्वारा वर्ष 2022 में कराई गई बाघ गणना के अनुसार देश में कुल 3,682 बाघ पाए गए हैं, जिनमें से 785 बाघ मध्य प्रदेश में दर्ज किए गए। यह संख्या देश में सर्वाधिक है। इसी के आधार पर मध्यप्रदेश को ‘टाइगर स्टेट’ का दर्जा प्राप्त हुआ है। वर्तमान में प्रदेश में 11 राष्ट्रीय उद्यान, 26 वन्यप्राणी अभयारण्य और 09 टाइगर रिजर्व हैं। इन संरक्षित क्षेत्रों में वैज्ञानिक पद्धति से निगरानी, आवास प्रबंधन, शिकार की रोकथाम और मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं।

 

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