DAVV गर्ल्स हॉस्टल: देवी अहिल्या यूनिवर्सिटी के गर्ल्स हॉस्टल में एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है, जिससे पूरे कैंपस में सवाल उठ रहे हैं। फर्स्ट ईयर की एक स्टूडेंट पर आरोप है कि वह दूसरी स्टूडेंट्स पर बॉयफ्रेंड बनाने और गलत कामों में शामिल होने का दबाव डाल रही थी। पांच स्टूडेंट्स की लिखित शिकायत के बाद, यूनिवर्सिटी एडमिनिस्ट्रेशन ने जांच की और आरोपी स्टूडेंट को हॉस्टल से निकाल दिया।
क्या हैं आरोप?
शिकायत करने वाली स्टूडेंट्स के मुताबिक, आरोपी स्टूडेंट ने दूसरी स्टूडेंट्स से कहा कि “ज़िंदगी का मज़ा लो और रिश्ते बनाओ,” नहीं तो वह एक मोबाइल ऐप के ज़रिए उनके लिए बॉयफ्रेंड अरेंज कर देगी। यह भी आरोप है कि वह वीडियो कॉल के ज़रिए अनजान आदमियों से बात करती थी और दूसरी स्टूडेंट्स को भी ऐसा करने के लिए उकसाती थी।

कुछ स्टूडेंट्स ने दावा किया कि उन पर गलत बातचीत करने का दबाव डाला गया। जांच के दौरान, दस से ज़्यादा स्टूडेंट्स ने इन घटनाओं की पुष्टि की। कई ने बताया कि वे मानसिक रूप से असहज और डरे हुए महसूस कर रहे थे, जिससे स्थिति और बिगड़ गई।
DAVV गर्ल्स हॉस्टल: लिखित शिकायत के बाद की गई कार्रवाई
करीब आठ दिन पहले, हॉस्टल वार्डन को एक लिखित शिकायत दी गई थी। शिकायत के बाद, स्टूडेंट के कमरे और सामान की जांच की गई। जांच में कुछ आपत्तिजनक चीजें मिलीं।
पूरी रिपोर्ट वाइस-चांसलर प्रो. राकेश सिंघई और रजिस्ट्रार प्रज्जवल खरे को सौंपी गई। एडमिनिस्ट्रेशन ने स्टूडेंट को तुरंत हॉस्टल से निकाल दिया। इस एक्शन से हॉस्टल कैंपस में अशांति का माहौल बन गया है।
कैंपस कल्चर और सिक्योरिटी पर सवाल
यह मामला सिर्फ एक स्टूडेंट को निकालने तक ही सीमित नहीं है, बल्कि हॉस्टल सिक्योरिटी, फीमेल प्राइवेसी और कैंपस डिसिप्लिन पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है। हॉस्टल फीमेल स्टूडेंट्स के लिए सेफ जगह माने जाते हैं, और किसी भी तरह का प्रेशर या हैरेसमेंट चिंता की बात है।
एक्सपर्ट्स का मानना है कि यूनिवर्सिटीज़ को काउंसलिंग, अवेयरनेस प्रोग्राम और डिजिटल सेफ्टी एजुकेशन को और मजबूत करना चाहिए ताकि फीमेल स्टूडेंट्स को किसी भी तरह के मेंटल या सोशल प्रेशर से बचाया जा सके।
एडमिनिस्ट्रेशन का साफ रुख
यूनिवर्सिटी एडमिनिस्ट्रेशन ने साफ कहा है कि किसी भी तरह का बेवजह प्रेशर या हैरेसमेंट बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। फीमेल स्टूडेंट्स से ऐसी किसी भी घटना की तुरंत रिपोर्ट करने की अपील की गई है।
आगे की कार्रवाई तय करने के लिए एक एडमिनिस्ट्रेटिव मीटिंग तय की गई है, जिसमें यह भी शामिल है कि क्या डिसिप्लिनरी एक्शन को एकेडमिक लेवल तक बढ़ाया जाना चाहिए। अभी यह मामला पूरे कैंपस में चर्चा का विषय बन गया है और इसने छात्राओं की सुरक्षा को लेकर गंभीर बहस छेड़ दी है।
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