मध्य प्रदेश में सरकारी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए अच्छी खबर है। कर्मचारियों के लिए लंबे समय से प्रतीक्षित स्वास्थ्य बीमा योजना जल्द ही शुरू होने वाली है। खबरों के अनुसार, योजना का ड्राफ्ट तैयार है और इसे इस महीने राज्य कैबिनेट के सामने मंजूरी के लिए पेश किया जा सकता है।
अगर इसे मंजूरी मिल जाती है, तो राज्य के 11 लाख से अधिक कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ मिलेगा। इस योजना के तहत कर्मचारियों को कैशलेस इलाज की सुविधा मिलेगी, जिससे उन्हें अस्पताल के खर्चों की चिंता से राहत मिलेगी।
कर्मचारियों के लिए ₹20 लाख तक का कैशलेस इलाज
प्रस्तावित योजना के तहत, सरकारी कर्मचारियों और उनके परिवारों को सालाना ₹20 लाख तक का कैशलेस इलाज कवर मिलेगा। वहीं, पेंशनभोगी ₹5 लाख तक के इलाज कवर के लिए पात्र होंगे। इसके अलावा, कर्मचारियों को OPD सेवाओं, दवाओं और चिकित्सा उपकरणों के लिए प्रति वर्ष ₹20,000 तक की अतिरिक्त वित्तीय सहायता देने का भी प्रस्ताव है।
योगदान की राशि क्या है?
इस योजना का लाभ उठाने के लिए कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को योगदान देना होगा।
- कर्मचारी हर महीने अपने मूल वेतन का 1% योगदान देंगे।
- पेंशनभोगी हर महीने अपनी पेंशन राशि का 4% योगदान देंगे।
- बाकी प्रीमियम का खर्च राज्य सरकार उठाएगी।
स्वास्थ्य बीमा योजना किसे लाभ होगा?
इस योजना के तहत कर्मचारी के परिवार के कई सदस्यों को कवर किया जाएगा। इसमें जीवनसाथी, माता-पिता, 2 आश्रित बच्चे, गोद लिए गए बच्चे और संभवतः तलाकशुदा बेटी शामिल हैं। पेंशनभोगियों के मामले में, पेंशनभोगी और उनके जीवनसाथी दोनों को योजना का लाभ मिलेगा।
छह साल से अटकी हुई थी योजना
इस स्वास्थ्य बीमा योजना को शुरू करने का विचार 2019 में आया था। उस समय, तत्कालीन मुख्यमंत्री कमलनाथ ने इसे लागू करने का निर्णय लिया था और इसकी शुरुआत की तारीख 1 अप्रैल, 2020 तय की गई थी। हालांकि, सरकार बदलने के बाद प्रशासनिक प्रक्रियाओं के कारण यह योजना लंबे समय तक अटकी रही। अब, कई वर्षों के अध्ययन और अन्य राज्यों के मॉडलों की समीक्षा के बाद, ड्राफ्ट आखिरकार तैयार हो गया है।
स्वास्थ्य बीमा योजना कैसे काम करेगी:
स्वास्थ्य बीमा योजना आयुष्मान भारत की तर्ज पर लागू की जाएगी। सभी लाभार्थियों को एक डिजिटल हेल्थ कार्ड जारी किया जाएगा जिसमें उनकी पूरी जानकारी होगी। राज्य सरकार द्वारा चुने गए अस्पतालों में कैशलेस इलाज की सुविधा उपलब्ध होगी। अगर किसी इमरजेंसी की वजह से बिना-पैनल वाले अस्पताल में इलाज कराना पड़ता है, तो कर्मचारी बाद में खर्च की भरपाई (रीइम्बर्समेंट) के लिए आवेदन कर सकेंगे।
कर्मचारियों के लिए बड़ी राहत
हेल्थकेयर सेवाओं की बढ़ती लागत को देखते हुए, यह स्कीम कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए बड़ी राहत साबित हो सकती है। इससे आर्थिक बोझ काफी कम होगा, खासकर गंभीर बीमारियों के इलाज और महंगे मेडिकल प्रोसीजर के दौरान। अब सबकी नज़रें राज्य कैबिनेट की मंज़ूरी पर टिकी हैं; अगर यह प्रस्ताव पास हो जाता है, तो राज्य भर के लाखों परिवारों को इसका सीधा फ़ायदा मिलेगा।


